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अफसरों के मोबाइल बने पैमाना खुल रहीं समस्याओं की परतें

मोबाइल फोन की बार-बार बज रही घंटी बता रही है बीपीएल सूची की गड़बड़ी! सड़क की घटिया क्वालिटी! बिजली की फर्जी बिलिंग! शिक्षक बहाली में मुखिया की दादागिरी! पहला कॉल समाप्त नहीं हुआ कि दूसरा वेटिंग में। अफसरों का मोबाइल राज्य में जन समस्याओं का पैमाना बन गया है। जिन पर विकास की जिम्मेदारी है उन्हें यह पता तो चल रहा है कि योजनाओं में कहां गड़बड़ी है या कौन सी कमी है? मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव, स्वास्थ्य सचिव और बिजली बोर्ड के अध्यक्ष का मोबाइल दिन भर बजता रहता है। मुख्य सचिव आर.जे.एम.पिल्लै कहते हैं, शासन के लिए यह अच्छी बात है। सरकार के काम पर लोगों की नजर है। शुक्रवार को उन्होंने 148 कॉल रीसिव किये। किसी को बिजली की समस्या तो कोई बीपीएल सूची में अपना नाम जुड़वाना चाहता है। कुछ लोगों ने सड़क की क्वालिटी को लेकर शिकायत की है।ड्ढr ड्ढr वैसे फोन तो तमाम अधिकारियों को आ रहे हैं, लेकिन इस मामले में ‘अफसर नंबर वन’ शिक्षा सचिव अंजनी कुमार सिंह हैं। शिक्षक बहाली में गड़बड़ी और मुखिया की दादागिरी को लेकर कॉल की ऐसी झड़ी लगी कि मोबाइल हर पल ‘बीजी’। नियमों और प्रक्रियाओं को समझाने में ही उनका दिन गुजरता है। स्वास्थ्य सचिव भानु प्रताप शर्मा कहते हैं, दिन भर में दो दर्जन से अधिक कॉल आए। अधिकतर फोन इलाज में सहायता के लिए थे। पीएचसी में डॉक्टर नहीं रहने की भी एक शिकायत मिली। बिजली बोर्ड के अध्यक्ष स्वपन मुखर्जी को लगातार तीसर दिन भी 300 से अधिक फोन आए। अधिकतर को बिजली गुल रहने या बिल में गड़बड़ी की समस्या थी।

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