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भारत में दुनिया के बाकी हिस्सों से कम भुखमरी

भारत में 23 करोड़ लोगों के भुखमरी का सामना करने की अंतराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान की बात को झुठलाते हुए सरकार ने कहा है कि मौजूदा आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए इस क्षेत्र में भारत की दुश्वारियां दुनिया के बाकी हिस्सों से काफी कम रहने की संभावना है। आधिकारिक सूत्रों के दावे की माने तो देश में खाद्यान्न का उत्पादन पूरी आबादी की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। पिछले साल शुरू किए गए खाद्य सुरक्षा मिशन का मकसद 2012 तक चावल का उत्पादन एक करोड़ टन, गेहूं का उत्पादन अस्सी लाख टन और दालों का उत्पादन बीस लाख टन बढ़ाने का है। योजना आयोग के अनुसार देश में भुखमरी का सामना कर रहे लोगों के बारे में कोई आधिकारिक अनुमान नहीं है लेकिन राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन की उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक भारत में ऐसे लोगों का प्रतिशत जिन्हें पर्याप्त भोजन नही मिल पाता है ग्रामीण क्षेत्रों में 2.4 और शहरी क्षेत्रों में मात्र आधा प्रतिशत है। सरकारी आंकडों के मुताबिक राजस्थान ही एक प्रदेश है जहां एक भी ऐसा व्यक्ित नही है जिसे प्र्याप्त भोजन नहीं मिलता हो। लेकिन आश्चर्य है कि खाद्यान्न उत्पादन के मामले में अग्रणी राय पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों एक प्रतिशत ऐसे लोग हैं। हालांकि शहरी क्षेत्र में ऐसे लोगों की संख्या नगण्य है। पर्याप्त भोजन नहीं पाने वाले लोगों की संख्या सबसे अधिक पश्चिम बंगाल में है। वहां के ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे लोगों की संख्या करीब 12 प्रतिशत है हालांकि शहरी क्षेत्रों में उनका प्रतिशत मात्र 1.3 ही है। उडीसा के ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे लोगों की संख्या करीब छह प्रतिशत है जबकि शहरी क्षेत्रों में मात्र आधा प्रतिशत है। इसी तरह असम के ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे लोग 5.3 प्रतिशत हैं और शहरी क्षेत्र में 2.4 प्रतिशत हैं।

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