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ब्याज दरों में कटौती के बाद का विकल्प ढूंढ रहे जी सात

वैश्विक आर्थिक संकट से अपनी अर्थव्यस्थाआें को उबारने की जी तोड़ कोशिश में जुटे दुनिया के सात बड़े औद्योगिक देशों के समूह जी 7 के केन्द्रीय बैंकों ने ब्याज दरों में कटौती के बाद आगे का विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है। रोम में आयोजित बैठक में इन बैंकों ने कहा है कि मौद्रिक उपायांे के तहत मुख्य ब्याज दरों में लगातार कटौती एक सीमा तक ही की जा सकती है ऐसे में इसके बाद आगे के विकल्प तय करना अब जरूरी हो गया है। अमेरिका का फेड रिजर्व अैार बैंक आफ जापान अपनी ब्याज दरांे में कटौती कर इसे पहले ही शून्य के स्तर तक ले जा चुके हैं जबकि बैंक आफ इंग्लैंड और यूरापीय सेंट्रल बैंक (इसीबी) इस आेर अग्रसर हैं। इन बैंकों का मानना है कि ब्याज दरें शून्य स्तर तक ले जाने के बाद बैंकिंग तंत्र में पूंजी प्रवाह को बढ़ाने तथा अर्थव्यवस्था मंे मांग में तेजी लाने के लिए दूसरा रास्ता मुद्रा की यादा छपाई और बैंकों द्वारा सीधे परिसपंत्तियां खरीदे जाने का रहा जाता है। ईसीबी के अध्यक्ष यां क्लाडे ने कहा कि मौजूद गहरे आर्थिक संकट के दौर में दुनिया के यादातर बड़े देशों के केन्द्रीय बैंक यह कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह इस तरह के गैर मानक उपाय अपनाने पर असहमत तो नहीं है लेकिन अन्य देशों के बैंकों के साथ हुए विचार विमर्श में इस बारे में कोई अंतिम फैसला अभी नहीं हो सका है। ईसीबी ने अपनी प्रमुख ब्याज दर में इस महीने 2 प्रतिशत की कटौती की है और आगे इसे 1.5 प्रतिशत तक कर देने की योजना है। बैठक में हिस्सा ले रहे बैंकों ने नए विकल्पों पर आम सहमति का एलान तो नहीं किया लेकिन इतना जरूर कहा कि अपनी अर्थव्यवस्थाआंे को उबारने के लिए वह गैर मानक कदम उठाने से भी नहीं हिचकेंगे। पर इनकी आम राय यह थी कि संकट की इस घड़ी में जो भी कदम उठाए जाएं उनमें पूरा एहतियात बरता जाए क्योंकि थोड़ी सी भी चूक हालात को सुधारने की बजाए और बिगाड़ सकती है।

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  • Web Title: अर्थव्यवस्था को उबारने में जुटे जी सात