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‘मांग बढ़ाने वाला हो अंतरिम बजट’

ऐसे समय में जब आर्थिक मंदी का असर देश के उद्योग जगत पर दिखाई देने लगा है और निर्यात तथा औद्योगिक उत्पादन मंे कमी आई है, विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा सोमवार को पेश किए जाने वाले अंतरिम बजट से लोगों को काफी उम्मीदंे हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अनुपस्थिति मं मुखर्जी द्वारा पश किया जा रहा यह बजट भल ही अंतरिम होगा, लकिन उद्योग जगत का मानना है कि इस समय अप्रत्याशित परिस्थितियों से निपटने क लिए विशेष कदम उठाए जान की आवश्यकता है। अंतरिम बजट से उद्योग जगत को उम्मीद है कि कार्यवाहक वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी औसत टैक्स दरों में और कमी करेंगे तथा नए आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा भी कर सकते हैं। वाणिज्य संगठन फिक्की के नए अध्यक्ष हर्षपति सिंघानिया ने कहा है कि सोमवार को पेश होने वाला अंतरिम बजट अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ाने वाला होना चाहिए। श्री सिंघानिया के मुताबिक अंतरिम बजट में उद्योगों के लिए तीसरा प्रोत्साहन पैकेज आएगा या नहीं यह तो कहना मुश्किल है लेकिन अर्थव्यवस्था की गति बढ़ाने के लिए सरकार को अब वित्तीय उपायों पर गौर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतरिम बजट आर्थिक वृद्धि की गति पर केन्द्रित होना चाहिए। मांग बढ़ाने के लिए सरकार को कर दरों में कमी करनी चाहिए। एसोचैम ने विभिन्न कंपनियों से कुछ सुझाव मांगे थे और इनमें से अधिकतर ने कॉरपारेट टैक्स कम करने, आबकारी टैक्स को नीचे लाने और वर्ष 2010 तक वस्तुओं तथा सेवाओं संबंधी टैक्स की योजना सुनिश्चित करने की मांग की थी। उधर वाणिज्य एवं उद्योग मंडल फिक्की के नवनिर्वाचित अध्यक्ष हर्षपति सिंघानिया ने कहा है कि सत्यम घोटाले के बहाने कंपनियों पर इंस्पेक्टर राज की वापसी नहीं होनी चाहिए। फिक्की के नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री सिंघानिया का कहना है कि सत्यम कंप्यूटर्स का घोटाला एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। इस एक घटना को देखते हुए सभी कंपनियों के बारे में इस तरह की सोच रखना गलत होगा। इसलिए सरकार को इस एक घटना का सहारा लेकर कंपनियों पर ज्यादा सख्त कायदे-कानून नहीं थोपने चाहिए। यदि ऐसा होता है तो इसका उद्योगों पर खराब असर होगा और उनकी उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

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