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भारत में 10 करोड़ बुजुर्ग डिमेंसिया के निशाने पर

भारत में 10 करोड़ लोग बढ़ती उम्र में होने वाली बीमारी डिमेंसिया के निशाने पर हैं। 60 साल की आयु पार कर चुके लोगों में यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है। विकसित देशों में 30 फीसदी बुजुर्ग आबादी को अपने चपेट में ले चुका डिमेंसिया अब भारत जैसे विकासशील देशों में भी बढ़ने लगा है। टीएस श्रीनिवासन न्यूरोसाइंस फोरम के तत्वावधान में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए जैव प्रौद्यौगिकी विभाग के सचिव एम. के. भान ने कहा कि संयुक्त परिवारों के टूटने, गांवों से नौकरी के लिए शहरों को पलायन और शहरों से नई पीढ़ी के विदेशों को पलायन से वरिष्ठ नागरिक घर और समाज में अलग-थलग पड़ गए हैं। इस कारण वह अबनार्मल एजिंग के शिकार हो रहे हैं। यानी अच्छे रहन-सहन के कारण जिस उम्र में उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहना चाहिए, वे डिमेंसिया से ग्रस्त हो रहे हैं। डिमेंसिया में सोचने की शक्ित घट जाती है। रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित होने लगती हैं। याददाश्त कमजोर पड़ जाती है। व्यक्ित में बदलाव आने लगता है तथा स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर मेरी गांगुली ने बताया कि 2030 तक भारत में डिमेंसिया के रोगियों की संख्या में 174 फीसदी का इजाफा हो सकता है। यही हाल चीन का भी होगा। विकसित देश इस समस्या से अभी ग्रस्त हैं लेकिन विकासशील देशों के समक्ष यह चुनौती खड़ी है।

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