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फर्जी परीक्षाएं भी करा डालते माफिया

बिहार में तो कई ऐसे मामले पकड़े जा चुके हैं, जब ठगों के गिरोह ने दो साल पहले हो चुकी परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं को भरवाया। कई बार तो इन गिरोहबाजों ने रलवे के लिए फर्ाी परीक्षाएं तक आयोजित करवा डालीं। इन गिरोहबाजों की करतूतों से रलवे को अपनी परीक्षाएं भी स्थगित करनी पड़ी हैं। रलवे भर्ती बोर्ड पटना व मुजफ्फरपुर को पिछले वर्ष नौ नवम्बर की लिखित परीक्षा स्थगित करनी पड़ी थी। मात्र यही नहीं इसी बोर्ड ने सात दिसम्बर को आयोजित होने वाली अपनी सभी परीक्षाएं स्थगित कर दी थीं।ड्ढr ड्ढr बिहार में फर्ाीवाड़ा का एक ऐसा सच गत वर्ष उाागर हुआ कि लोगों ने दांतों तले अंगुली दबा ली थी। कटिहार पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर जिले के प्राणपुर थाना के बुद्धनगर स्थित एक सरकारी मध्य विद्यालय में छापेमारी की। छापेमारी में पुलिस यह जानकर चकित रह गई कि वहां रलवे की एक ऐसी परीक्षा आयोजित हो रही थी, जो दो वर्ष पहले ही संपन्न कराई जा चुकी थी। इसमें दो सौ परीक्षार्थी शामिल थे। असली परीक्षा तो असम के कामरूप में वर्ष 2006 में ही आयोजित कराई गई थी। गत वर्ष 27 अक्टूबर को हुई छापेमारी में उस स्कूल से जो एडमिट कार्ड पकड़े गए थे, उसमें परीक्षा तिथि 1नवम्बर, 2006 और परीक्षा केन्द्र की जगह दक्षिण कामरूप गर्ल्स कालेज, मिर्जा (कामरूप, असम) लिखा हुआ था। छापेमारी के दौरान परीक्षार्थी तो भाग निकले, लेकिन दो लोग पकड़े लिए गए थे।ड्ढr ड्ढr गत वर्ष ही 13 दिसम्बर को पटना पुलिस ने एक ऐसे गिरोह के सात लोगों को पकड़ा था, जो रलवे की फर्ाी परीक्षाएं आयोजित कराते थे। इस परीक्षा के बाद बाकायदा मेडिकल टेस्ट लिया जाता था और फर्ाी नियुक्ित पत्र भी दिया जाता था। प्रत्येक परीक्षार्थी से एक से दो लाख रुपये लिए जाते थे। उसी दिन पुलिस ने सौ ऐसे परीक्षार्थियों को बचाया था, जिन्हें फर्ाी परीक्षा दिलाने के लिए बोकारो और मुजफ्फरपुर ले जाया जा रहा था। ऐसा करने वाले गिरोह ने उन छात्रों को फर्ाी परीक्षा के प्रश्नपत्र भी बेचे थे और उसके लिए भी मोटे पैसे ऐंठ लिए थे।

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