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मतदान का महापर्व

लोकसभा चुनावों को भारत के आम मतदाता ने एक महापर्व का दर्जा सहा ही दे डाला है। पर्व की एक बहुत गहरी और ममत्वभरी समझ भारतीय मन में है। प्रिय काज, प्रियजन का जन्मदिन उसके लिए हर बार जीवन की पवित्रता और नएपन की ताजगी के अलावा उस उल्लास को सबके साथ मनाने का एक रंगारंग मौका भी बन कर आता है। इसलिए चुनाव रूपी महापर्व में भी सभी भागीदारों की प्रसन्नता और उत्साह भारतीय मतदाता को कहीं अपनी प्रसन्नता और उत्साह की ही सहा अभिव्यक्ित लगती है। मतदान के दिन कंबल ओढ़ कर सोने वाले, छुट्टी या सैरसपाटे पर निकलने वालों के उलट यह महापर्व मनाना आम आदमी के लिए विवश कर्तव्य-पालन नहीं, बल्कि लोकतंत्र की नित्य नूतन और सदा आगे बहने वाली धारा में मजे लेते हुए छपाछप तैरना भी बन जाता है।ड्ढr ड्ढr यही वजह है कि देश-विदेश से आए पर्यवेक्षक और पत्रकार भी दुनिया की सबसे बड़ी मतदाता आबादी वाले इस देश के छोटे से छोटे गॉंव कस्बे के चुनावों की जीवंत रंगीनी पर रीझते आए हैं। किसी महाकुंभ या उर्स की ही तरह इस महापर्व की आत्मा के मूल में भी अपने स्वार्थो के विसर्जन के साथ कहीं आज भी आम मतदाता के मन में मतदान की यह वेला सबकुछ एक पवित्र उद्देश्य पर लुटाने की भावना है। अपने साथ दूसरों पर भी यकीन करने की इच्छा का सरल इÊाहार है, लोकतंत्र के प्रति कृतज्ञता की अभिव्यक्ित है।ड्ढr ड्ढr इसी दर्शन में भीग कर इस बार हिन्दुस्तान ने बहुत उत्साह और ममत्व के साथ इस महापर्व को अपने सुधी पाठकों के लिए विभिन्न कोणों से पेश करने का मन बनाया है। हम अपने पाठकों को इस बार भी चुनावी पण्डितों, धाकड़ पत्रकारों, शीर्ष समाजशास्त्रियों और बुद्धिाीवियों की टिप्पणियॉं, लेख और ऑंकड़े तो लगातार देंगे ही, हमार हर संस्करण से जुड़े पत्रकार अपने इलाके की खास मिठास और तुर्शी के साथ इस महापर्व (ाो पारसी थियेटर के मुहावर में ‘दि ग्रेट इंडिया मेला’ भी कहा जा सकता है) की कुछ खास खबरों को भी लगातार आपके साथ साझी करंगे, और हॉं, यत्र-तत्र आपसे ई-मेल या एसएमएस संदेशों के जरिए अपनी राय प्रतिक्रिया भी देने को कहते रहेंगे। क्योंकि वक्ता और श्रोता, लेखक और पाठक की समवेत भागीदारी बिना महापर्व कैसा?ड्ढr ड्ढr आम चुनाव हमार समय का शायद सबसे महत्वपूर्ण महापर्व है, क्योंकि इसके द्वारा हम कहीं अपने देश के सामान्य नागरिकों के जीवन में छुपे तप और त्याग से जुड़ते हैं, बिना अपनी वैचारिक जमीन छोड़े हुए। और इस महापर्व की भी अपनी रूढ़ियॉं हैं, और अपनी तरह के अनेक दुनियावी शौकों से जुड़े मनोरांन केन्द्र भी।़ प्रवचन, सत्यकथा, इन्द्रजाल का जादू, हिण्डोलों के झोंके, पर्वाधिकारियों के बूटों, सीटियों की ध्वनियॉं, क्या नहीं हैं इस पर्व में? भारत की उत्सवधर्मिता के जीवंत प्रतीक इस चुनाव-महापर्व में आइए हम आप आज से क्रमश: एक साथ पैठना, समवेत पैठना शुरू करंे।ं

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