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विरोधियों ने चढ़ाई त्यौरियां, ‘ये भी कोई बजट है’

अंतरिम बजट विभिन्न क्षेत्रों से मिलीजुली प्रतिक्रिया आई। माकपा की बृंदा करात और राज्यसभा सांसद व उद्योगपति राहुल बजाज बजट पर तीखी प्रतिक्रिया दी, खास मंदी के निपटने की इसकी क्षमता को लेकर। राहुल बजाज : राज्य सभा सांसद एवं प्रसिद्ध उद्योगपति राहुल बजाज काफी तल्ख दिखे। वह बोले, ‘उद्योगों का ग्राहक आम आदमी होता है। मेरा कहना है कि राहुल बजाज को सस्ता लोन मत दो पर कम से कम उस आम आदमी को तो सस्ता लोन दीजिये जो बजाज का स्कूटर खरीदता है।’ बजाज ने कहा कि जब आम के आदमी पास औद्योगिक उत्पादों को खरीदने के लिये पैसे ही नहीं होंगे तो उद्योग अपना उत्पादन करके उसे कहां ले जायेंगे। मांग न होने पर उसे उत्पादन घटाना पड़ेगा जिसकी गाज उद्योगों में काम करने वाले कामगारों पर पड़नी स्वाभाविक है। बेरोजगारी बढ़ेगी और क्रय शक्ित और कम होगी। इस प्रकार बाजार में मांग के अभाव में विकास का पूरा चक्का उल्टा घूमने लगेगा और पूरी अर्थव्यवस्था मंदी के दल-दल में धंसती चली जायेगी। बृंदा करात (माकपा) : माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की बृंदा करात ने अंतरिम बजट को रसोई विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि मंदी के इस दौर में महिलाओं के लिए रसोई चलाना मुश्किल हो गया है। इस बजट में उनके लिए कोई राहत नहीं दी गई है इसलिये इसने देश की महिलाओं की परशानी और बढ़ा दी है। सरकार का दावा है कि उसके गोदाम खाद्यान्न से भरे पड़े हैं पर उसे इसकी चिंता नहीं है कि गरीब की रसोई खाली पड़ी है। ज्योतिरादित्य सिंधिया (कांग्रेस) : संचार एवं सूचना तकनीकी राज्य मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि बजट देश के आम आदमी को राहत देने वाला है। सरकार ने ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत और ज्यादा धन की व्यवस्था करके गांवों में ही लोगों के रोजगार की पक्की गारंटी कर दी है। स्कूली बच्चों के लिए दोपहर के भोजन के लिए और धन की व्यवस्था की गई है ताकि गरीब बच्चे शिक्षा से वंचित न रह सकें। पिछले तीन साल तक लगातार प्रतिशत की विकास दर तथा अब मंदी के बावजूद 7.7 प्रतिशत विकास दर का लक्ष्य यूपीए सरकार की कार्यकुशलता दर्शाता है। भारतीय मजदूर संघ : मजदूर संघ ने कहा है कि देश के मजदूर,श्रमिक और कर्मचारी वर्ग इस बजट से अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। संघ के मीडिया प्रभारी अश्विनी राणा ने अपनी प्रकिक्रिया देते हुए बताया कि सरकार ने आर्थिक मंदी का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव के बार में कोई जिक्र नहीं किया है और न ही इससे उभरने का कोई रास्ता सुझाया है।

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