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नर्सो के बहिष्कार से मरीचा परेशानं

रकारी अस्पतालों में कार्यरत नर्सो के बहिष्कार से सोमवार को सेवाएँ पूरी तरह प्रभावित रहीं। दोपहर की पाली में नर्से डय़ूटी पर नहीं आईं। महिला अस्पतालों में इसका खासा असर दिखा। वहाँ तीमारदारों को खुद ग्लूको बोतल लगाने की जिम्मेदारी उठानी पड़ी। डफरिन, झलकारीबाई समेत सभी बाल व महिला अस्पतालों में रात पाली की डय़ूटी एएनएम ने सम्भाली। चिविवि,लोहिया, बलरामपुर और सिविल अस्पतालों में भी इसा असर दिखा। हालाँकि देर शाम इन सभी अस्पतालों में निजी अस्पतालों में कार्यरत नर्सो को काम डय़ूटी के लिए बुला लिया गया है। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव शैलेश कृष्णा के आश्वासन के बावजूद राजकीय नर्सेस संघ उत्तर प्रदेश ने बहिष्कार जारी रखने का फैसला किया है।ड्ढr दोहपर तीन बजे बजे संगठन के पदाधिकारियों ने चिविवि के नर्सेस प्रशिक्षण केन्द्र परिसर में बैठक की । संगठन के महामंत्री अशोक कुमार का कहना है कि प्रदेश भर में नर्सो की व्यापक कमी है। एक नर्स, तीन नर्सो के बराबर डय़ूटी कर रही हैं। उसके बावजूद उन्हें केन्द्र के समान भत्ते नहीं मिलते। उनका कहना है कि कार्य बहिष्कार की सूचना पहले ही दे दी गई है। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव शैलेश कृष्णा से बातचीत में कोई ठोस निर्णय नहीं निकल सका। श्री कुमार का कहना है कि 20 फरवरी तक सिर्फ सुबह की शिफ्ट में ड्यूटी की जाएगी। मंगलवार को कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है उसमें आंदोलन की विस्तृत रूपरेखा बनाई जाएगी । सीएमओ डॉ. एके शुक्ला ने बताया कि सोमवार रात सभी महिला अस्पतालों में एएनएम को डय़ूटी पर लगाया गया है। लोहिया अस्पताल के एमएस डॉ. अभिषेक वर्मा का कहना है कि मेयो कॉलेज में प्रशिक्षण पा रही नर्सो को बुलाया गया है। विभिन्न वार्डो में, पैरामेडिकल कार्सो का प्रशिक्षण पा रहे छात्रों को अतिरिक्त रूप से लगाया गया है। चिविवि के सीएमएस प्रो. आरके टंडन का कहना है कि ट्रामा सेंटर समेत सभी संवेदनशील वार्डो में संविदा पर कार्यरत नर्सो को तैनात किया गया है। उनके मुताबिक सेवाओं पर कोई खास असर नहीं पड़ा। वहीं संगठन की अध्यक्ष रूथ डेनियल ने कहा है कि प्रशिक्षण ले रही नर्सो को डय़ूटी पर लगाना नियम विरूद्ध है।ंं

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  • Web Title: नर्सो के बहिष्कार से मरीचा परेशानं