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नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात होगी स्पेशल फोर्स

लोकसभा चुनाव में प्रशासन के लिए नक्सली बड़ी चुनौती होंगे। बिहार में बढ़ती नक्सली गतिविधियों पर चुनाव के दौरान काबू पाने के लिए रणनीति बनायी जा रही है। चुनाव में हिंसा रोकने के लिए नक्सल प्रभावित जिलों में स्पेशल फोर्स तैनात किए जाएंगे। पुलिस मुख्यालय चुनाव आयोग से इसी हिसाब से फोर्स की मांग करगा। हालांकि बिहार में कितनी फोर्स की जरूरत होगी यह तस्वीर तब तक साफ नहीं होगी जब तक आयोग यह घोषणा न कर दे कि चुनाव कितने चरण में कराए जाएंगे।ड्ढr ड्ढr पिछला लोकसभा चुनाव और विधान सभा का चुनाव क्रमश: तीन और चार चरणों कराए गए थे। इसके लिए केन्द्रीय अर्ध सैनिक बलों की करीब 600 और 700 कंपनियों की मदद ली गयी थी। बिहार के 40 जिलों (दो पुलिस जिला सहित) में से 31 जिलों को नक्सल प्रभावित माना गया है। इस लिहाज से इसबार नक्सली खतरों को भांपते हुए सुरक्षा बलों की मांग में परिवर्तन संभव है।ड्ढr एडीजी (मुख्यालय) नीलमणि ने पूछने पर कहा कि चरण के हिसाब से ही सुरक्षा बलों की मांग होगी। दूसरी ओर नक्सलियों के खिलाफ ऑपरशन के लिए पुलिस हाईटेक लड़ाई की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार पुलिस के निशाने पर अब नक्सलियों के ट्रनिंग कैम्प हैं। बीते साल पुलिस ने कांबिंग ऑपरशन के दौरान 6 नक्सल ट्रनिंग कैम्पों को निशाना बनाया। उनकी पहचान करने और धावा बोलने के लिए सेटेलाइट इमेज का सहारा लिया जा सकता है। इसके अलावा उनकी गतिविधियों पर निगाह रखने और सुराग पाने के लिए मोबाइल फॉरंसिक की भी मदद ली जा सकती है। नक्सल प्रभावित राज्य आंध्रप्रदेश में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरशन में इन तकनीकों का फायदा भी हुआ है।ड्ढr ड्ढr हालांकि सेटेलाइट इमेज के आधार पर कार्रवाई के लिए आंध्रप्रदेश में हेलीकॉप्टर और दूसर साधनों का भी इस्तेमाल होता रहा है। यह सुविधा बिहार में उपलब्ध नहीं है। वैसे बिहार में लोकसभा चुनाव के दौरान रकी के लिए हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल पर पुलिस मुख्यालय के अधिकारी भी इनकार नहीं करते।

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