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साइबर चोरों ने उड़ाई बैंकों की नींद

यदि आप इंटरनेट से अपना सेविंग एकाउंट आपरेट करते हैं या क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन खरीददारी करते हैं तो फिर आपके एकाउंट की साइबर सुरक्षा खतरे में है। बैंकों में इंटरनेट के जरिये रकम चोरी की वारदातें तेजी से बढ़ रही हैं। चाक-चौबंद साइबर सुरक्षा का दावा करने वाले नेशनल-मल्टीनेशनल बैंकों की तिजोरी में सबसे ज्यादा हजारों इंटरनेट डाके पड़ रहे हैं जिसमें इन्हें करोड़ों की चपत लग चुकी है। दरअसल, जब कोई इंटरनेट के जरिये अपना खाता आपरट करता है या क्रेडिट कार्ड से खरीददारी करता है तो इंटरनेट पर सक्रिय साइबर चोर सीक्रेट पासवर्ड और पर्सनल इंफार्मेशन को कापी कर लेते हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार 2005-06 में इंटरनेट के जरिये क्रेडिट कार्ड फ्राड के सिर्फ 2मामले थे जिनमें बैंकों के पांच करोड़ उड़ाए गए। ये मामले मल्टीनेशनल बैंकों मसलन एबीएन एमरो, स्टैंडर्ड चार्टर, सिटी, एचएसबीसी, आईसीआईसीआई, डयूक, अमेरिकन एक्सप्रेस, राष्ट्रीय बैंकों में बड़ौदा, यूनियन, विजया, कैनरा तथा निजी बैंकों में एचडीएफसी कोटक महेन्द्रा आदि के हैं। लेकिन 2007-08 में इन मामलों की संख्या बढ़कर 16308 हो गई तथा इनमें बैंकों को 35.82 करोड रुपये का चूना लगा। अप्रैल-दिसंबर 2008 के बीच 12मामले दर्ज किए गए हैं जिनमें 36.54 करोड़ रुपये की चपत लगी। इंटरनेट से आपरट होने वाले बचत खातों से भी धन निकालने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। 2006-07 में ऐसे सिर्फ 107 मामले दर्ज किए गए थे। लेकिन पिछले साल अप्रैल-दिसंबर बीच ऐसे मामले बढ़कर 233 पहुंच गए। धोखाधड़ी के इन मामलों में 6.47 करोड़ रुपये निकाल लिए गए। गृह मंत्रालय ने रिजर्व बैंक के हवाले से कहा है कि पिछले तीन सालों में साइबर चोरी से बैंकों को 126 करोड़ रुपये की चपत लग चुकी है। आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन सालों में इंटरनेट धोखाधड़ी के सबसे करीब 11 हजार मामले आईसीआईसीआई बैंक के हैं। उसे सर्वाधिक 50 करोड़ की चपत लगी है। इसके बाद एचएसबीसी बैंक का नंबर है जिसमें 2483 फ्राड हुए। साइबर चोरों ने फिशिंक, स्पैमिंग, ऑनलाइन फ्रॉड और आइडेंटिटी थेप्ट के जरिये इन चोरियों को अंजाम दिया है। गृह राज्य मंत्री शकील अहमद ने संसद में बताया कि इन मामलों की जांच होती है लेकिन ज्यादातर मामलों में कोई नतीजा नहीं निकल पाता। अब सीडैक पुलिस कार्मिकों को प्रशिक्षित करने के लिए कुछ देशी टूल्स विकसित किए हैं जिसकी पुलिस को ट्रेनिंग दी जा रही है।

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