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सारी दुनिया को लुभाती है दिलवालों की दिल्ली

दिल्ली देश की राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र ही नहीं है बल्कि पर्यटकों की आमद के मामले में भी अव्वल साबित हो रही है। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय, राजस्थान पर्यटन विभाग और फिक्की द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इंडियन ट्रेवल बाजार में इस हकीकत का खुलासा हुआ है।

आंकड़ों के मुताबिक राजधानी में 2008 में 23.4 लाख पर्यटक आए तो उसकी तुलना में महाराष्ट्र और तमिलनाडु में कम। महाराष्ट्र में 2008 में 20.6 लाख पर्यटक आए तो तमिलनाडु में 20.3 लाख। उत्तर प्रदेश और राजस्थान क्रमश: 16.1 लाख और 14.8 लाख पर्यटकों को ही आकर्षित कर सके।

दिल्ली को पर्यटकों द्वारा ज्यादा आकर्षित करने की वजह यहां की ऐतिहासिक इमारतें, हेल्थकेयर सेंटर और इसका बिजनेस हब होना है। इनके अलावा दिल्ली के पास के चार शहर गुड़गांव, नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद भी पर्यटकों को आकर्षित करने में पीछे नहीं हैं। दूसरी ओर महाराष्ट्र में देश की आíथक राजधानी मुंबई पर्यटकों को आकर्षित करने के मामले सफल रही है। सर्वे में पुणे एजूकेशन और आईटी हब के तौर पर उभरकर सामने आया। हालांकि मुंबई और पुणे में उपयुक्त जमीन की अनुपलब्धता और बढ़ती कीमतों ने होटल उद्योग विकसित करने को बाधित किया है।

रिपोर्ट में आया है कि दोनों शहर बिजनेस सेंटर के तौर पर विकसित हुए हैं जिसकी वजह से पर्यटन के उद्देश्य से इसका इस्तेमाल सीमित हो गया। विश्व प्रसिद्ध ताजमहल के अलावा उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक विरासतें और धार्मिक स्थल सैलानियों को लुभाती हैं। तमिलनाडु अपने समुद्र तटों, हिल स्टेशन, ऐतिहासिक इमारतों, मंदिरों और वाइल्ड लाइफ के लिए पर्यटकों को आकर्षित करता है।

वहीं सात राज्य अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा पर्यटकों को वहां मौजूद सुविधा, कृषि और रोमांचकारी स्थानों के लिए आकर्षित करते हैं। 2008 में सिक्किम में जहां 19,514 पर्यटक आए तो असम में 14,426 मेहमानों की आमद रही।

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