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80 साल के बुजुर्ग ने नहीं छोड़ा हौसला

21 साल तक बेटे की नौकरी का मुकदमा लड़ा, सुप्रीमकोर्ट  तक लड़ने के बाद हार गए पर 80 साल के बुजुर्ग ने हौसला नहीं छोड़ा। लगा सुप्रीम कोर्ट से सम्पूर्ण न्याय नहीं मिला तो सूचना के अधिकार में देश की सर्वोच्च अदालत से लड़ने को खड़े हो गए।

केन्द्रीय सूचना आयुक्त ने भी उनकी दलीलों पर सुप्रीमकोर्ट को पार्टी बनाया और वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई तय की। सुनवाई गुरुवार को होगी, बुजुर्गवार कानपुर एनआईसी के स्टूडियो में बैठेंगे। केंद्रीय सूचना आयुक्त अपने स्टूडियो में बैठकर दोनों पक्षों की दलीलें सुनेंगे।

रिजर्व बैंक से रिटायर विकासनगर निवासी यूके जैन 1989 से अपने बेटे संजय कुमार जैन की नौकरी की लड़ाई लड़ रहे हैं। संजय जैन यूटीआई में नौकरी करते थे, एक जुलाई 1989 को उन्हें नौकरी से हटा दिया गया। अब 80 साल के हो चुके यूके जैन के अनुसार यूटीआई ने बेटे को गलत तरीके से नौकरी से निकाला। लेबर कोर्ट में मुकदमा किया वहाँ से उनके पक्ष में एवार्ड हो गया। इसके खिलाफ यूटीआई ने हाईकोर्ट में अपील की जिसमें वे हार गए।

इसके बाद श्री जैन ने सुप्रीमकोर्ट में एसएलपी दाखिल की पर वहाँ से भी उनकी एसएलपी खारिज हो गई। फिर उन्होंने रिव्यू के लिए अर्जी लगायी। इस अर्जी के साथ एक और अर्जी लगायी जिसमें सुप्रीमकोर्ट से अनुरोध किया कि रिव्यू की अर्जी पर सुनवाई खुली अदालत में की जाए। पर अदालत ने बंद कमरे में सुनवाई कर रिव्यू की अर्जी के साथ खुली अदालत में सुनवाई की अर्जी भी खारिज कर दी।

श्री जैन का कहना है कि कई मामलों में सुप्रीमकोर्ट ने खुली अदालत में रिव्यू की अर्जी पर सुनवाई की है, लेकिन उनके साथ ऐसा नहीं किया गया। इस पर उन्होंने सुप्रीमकोर्ट को पार्टी बनाते हुए केन्द्रीय सूचना आयुक्त के यहाँ अपील की और इस सम्बन्ध में पूरी सूचना माँगी।

केन्द्रीय सूचना आयुक्त ने खुद इस मामले की सुनवाई का फैसला किया। सूचना आयुक्त ने सुनवाई के लिए 15 अप्रैल की तिथि निर्धारित की है। पूरी सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग से होगी। सूचना आयुक्त के अनुसार श्री जैन कानपुर एनआईसी के स्टूडियो में बैठकर दलील पेश करेंगे। सुप्रीमकोर्ट की ओर से रजिस्ट्रार एमके गुप्ता और वहाँ के जनसूचना अधिकारी राजपाल अरोड़ा दिल्ली के स्टूडियों में बैठकर जवाब देंगे।

केन्द्रीय सूचना आयुक्त अपने कार्यालय के स्टूडियो में बैठकर सुनवाई करेंगे और फिर इस पर फैसला देंगे। श्री जैन इस सुनवाई के लिए उत्साहित हैं। उनका कहना है इससे अब बेटे को नौकरी की उम्मीद तो नहीं है पर वह अपने अधिकारों के लिए जरूर अंतिम सांस तक लड़ते रहेंगे।  

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