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दो टूक (गुरुवार, 15 अप्रैल 2010)

सैलानियों की आमद के मामले में दिल्ली दूसरे राज्यों पर भारी है। कम से कम आंकड़ों का खेल तो यही कहता है। मगर यह नहीं भूलना चाहिए कि सत्कार व सुविधा के मामले में हमारा रिकॉर्ड अच्छा नहीं है। ऑटो-टैक्सियों में होने वाले अपराध, तकलीफदेह ट्रैफिक व नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाते लोग, दिल्ली की एक पहचान यह भी है। दिल वालों की साबित होने के लिए अभी इसे कई इम्तहानों में खरा उतरना होगा।

 

 

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