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डीईएफ और ईएलएसएस

पिछला साल इक्विटी म्यूचुअल फंड की दृष्टि से अच्छा था, पर विभिन्न फंड के गत वर्ष के प्रदर्शन को ही इस वर्ष के निवेश का आधार नहीं बनाना चाहिए। इस संबंध में कोई भी योजना बनाने से पूर्व बाजार में मौजूद विभिन्न इक्विटी फंड और निवेश के अपने उद्देश्यों के बारे में जानकारी हासिल करना बेहतर होता है। जिनमें दो तरह के फंड हैं - डीईएफ और ईएलएसएस
डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड: इस इक्विटी फंड के तहत विभिन्न कंपनी स्टॉक्स में निवेश किया जाता है, जिनका उद्देश्य इक्विटी और इक्विटी आधारित प्रतिभूतियों के वर्गीकृत और संतुलित पोर्टफोलियो की मदद से नियमित दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ हासिल करना है। इन फंड को आगे लार्ज या मिड कैप के आधार पर बांटा जा सकता है। लार्ज कैप फंड्स बड़ी कंपनियों के स्टॉक जैसे रिलायंस, इंफोसिस, ओएनजीसी, टाटा स्टील और एसबीआई आदि में निवेश करते हैं। दूसरी ओर, मिड कैप फंड मध्यम और छोटी कंपनियों के स्टॉक जैसे नागाजरुन फर्टिलाइजर, मद्रास सीमेंट, पुंज लॉयड आदि में निवेश करते हैं। चूंकि छोटी कंपनियां, बड़ी कंपनियों की तुलना में कम स्थायी होती हैं, ऐसे में मिड कैप के संबंध में हमें अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। अत: डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड में निवेश करने से पूर्व अपने निवेश के उद्देश्यों की बेहतर समझ विकसित करना जरूरी होता है। यदि अधिक जोखिम लेने की क्षमता नहीं तो मिडकैप फंड में निवेश न करें।
इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम: इन्हें कर बचत करने वाले म्यूचुअल फंड भी कहा जाता है, जो मूलत: डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड है। इएलएसएस फंड मैनेजर सौ प्रतिशत पैसे का निवेश इक्विटी मार्केट में करते हैं। ऐसे में इससे मिलने वाले रिटर्न भी शेयर बाजार परफॉरमेंस आधारित होते हैं, पर इसमें मूल अंतर यह है कि ये फंड कर लाभ भी देते हैं। आयकर अधिनियम की धारा 80सीसी के अनुसार ईएलएसएस सहित विभिन्न कर बचत करने वाले विकल्पों में एक लाख रुपये के निवेश पर कर में छूट मिलती है।

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