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मेग्नीशियम

हमारे शरीर के लिए जितनी जरूरत कैल्शियम की है, उतनी ही जरूरत मेग्नीशियम की भी पड़ती है। यह खास तौर पर हमारी हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी अवयव भी कहा जा सकता है। इसकी कमी होने से डिप्रेशन, खून के थक्के जमना, डायबिटीज, नींद कम आना, जल्दी थकान होना, पथरी होना, दांतों में सड़न, आंतों की तकलीफ और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी दिक्कतों को बढ़ावा मिल सकता है। इसकी कमी रहने का एक बुरा असर हमारी हड्डियों के कमजोर होने के रूप में भी पड़ता है।

कैसे इसे प्राप्त करें: मेग्नीशियम आम तौर पर तो हरी सब्जियों जैसे सरसों, पालक, सेम, घीया, मटर के अलावा सोयाबीन, काजू, बादाम, अखरोट और आटे में मौजूद होता है। इनका इस्तेमाल बढ़ाने से इसकी कमी दूर हो सकती है। खाने पीने की अन्य चीजों में केला, कच्चा अमरूद, चाकलेट, देसी घी, पिस्ता, सौंफ, जीरा, धनिया, अजवायन मसालों और चोकर में भी इसके तत्व रहते हैं।  इसका पर्याप्त मात्रा में सेवन शरीर के जरूरी हारमोन्स को नियंत्रित रखता है। तनाव के प्रकोप से आप बेफिक्र रह सकते हैं। मस्तिष्क को तरोताजा रखने के साथ ही यह दिमागी गतिविधियों को सामान्य बनाए रखने में भी मददगार है। इसकी कमी न रहने से ही पाचन तंत्र व्यवस्थित रह पाता है, वरना कब्ज की गंभीर शिकायत तक हो सकती है। कई अन्य बीमारियों जैसे टीबी के प्रकोप को घटाने के साथ ही खांसी और हृदयाघात जैसे खतरों को कम रखने में अहम भूमिका निभाता है।
इसके अलावा, पैरों में ऐंठन और दर्द से लेकर माइग्रेन तक नियंत्रित करने में इसकी भूमिका रहती है। मेग्नीशियम की मात्र कम रहने से पेट में अपचन और मांसपेशियों में दर्द की शिकायत हो सकती है। इसीलिए हमेशा चिकित्सक उन चीजों को नियमित खाने की सलाह देते हैं जिनमें मेग्नीशियम भरपूर मात्रा में मौजूद होता है।

 

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