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पहाड़ों में पहुंचा फलभेदक कीट, फसल को नुकसान

सूखे के बाद नगदी व पारंपरिक फसलों पर फल भेदक कीट (हेलिकोवर्पा आर्मिजेरा) ने हमला बोल दिया है। सीजनल फसलों के साथ कीट का प्रकोप सेब, आलू, राजमा के बगीचों में नजर आने से काश्तकार परेशान हैं। पहाड़ में भी मैदान जैसा पारा चढ़ने से फसलों पर सीधा प्रभाव पड़ने लगा है।

खासकर मार्च-अप्रैल माह में नगदी फसलों की बुवाई होने का चक्र बदलने से इन दिनों खेतों में असमय पौध व फूल तैयार हो गये हैं। सूखे की मार से बदले फसलीय चक्र ने काश्तकारों की आजीविका व आर्थिकी को गड़बड़ा दिया है। मैदानी जैसा मौसम पहाड़ों की ठंडी वादियों में भी दिखने से कई तरह के नुकसान सामने आने लगे हैं। खास कर मैदानी क्षेत्रों की बीमारियां भी गर्मियों के साथ यहां की फसलों को लगने लगी है।

इन दिनों पहाड़ में फल भेदक कीट का चारों तरफ प्रकोप छाया हुआ है। आलू, सेब, राजमा सहित नगदी फसलों में टमाटर, शिमला मिर्च, फ्रांस बीन, मिर्च, प्याज, बैंगन, खीरा, मिर्च आदि में कीट भेदक कीट नजर आने लगे हैं। इसके अलावा खेतों में तैयार हो रही गेहूं की फसल में इस कीट का सर्वाधिक प्रकोप दिखने लगा है।

सूंडी बहुभक्षीय इस कीट ने पौध तैयार होते ही उस पर कहर बरपाना शुरू कर दिया है। कीट की सूंडी हरे रंग की होती है तथा इसके पृष्ठ भाग पर तीन भूरी धारियां पायी जाती है। वयस्क कीट भूरे रंग के होते हैं और उनके अगले पंख पर काली बिन्दी पाई जाती है । वयस्क कीट इन दिनों रात्रि प्रकाश में आसानी से देखा जा सकता है। कीट की क्षतिकर अवस्था सूंडी होती है जो  सुंडियां पत्तियों, फूलों और फलों को खाकर नुकसान पहुंचाता है। रवी की फसल पर फल भेदी कीट का प्रकोप खरीफ मौसम में विभिन्न सब्जियों व फसलों पर भी आक्रमक रूप में दिखेगा।

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