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समस्या दर समस्या

नार्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रदेश में पहले ही समस्याएं कम नहीं थीं। तालिबान की बगावत और आतंकवाद ने तो इस इलाके को परेशान कर ही रखा है, अब वहां प्रदेश का नाम बदले जाने को लेकर भी हिंसा शुरू हो गई है। सोमवार को हजारों प्रदर्शकारी एबटाबाद की सड़कों पर निकल पड़े। वे खैबर पख्तूनखवा नाम का विरोध कर रहे थे। पुलिस के साथ हुई झड़पों में सात लोग मारे गए और 200 से ज्यादा घायल हो गए। अभी यह कहना मुश्किल है कि पुलिस ने ही ज्यादा कुछ ज्यादती कर दी या कारों और गाड़ियों को जलाने वाली इस भीड़ को काबू करने का कोई और तरीका ही नहीं बचा था। मंगलवार को मिली खबरों के अनुसार यह हिंसा अब हजरा इलाके की दूसरी जगहों में भी फैल गई है। हालांकि प्रदेश के नाम का यह बदलाव काफी लंबी बातचीत के बाद हुआ था, फिर भी पाकिस्तान मुस्लिम लीग का एक धड़ा इसका काफी विरोध कर रहा है। जो हो रहा है वह गैरजरूरी है और इससे पहले ही मुसीबतों से गुजर रहा यह इलाका और परेशानी में पड़ गया है।
द न्यूज़, पाकिस्तान


हादसे के बाद
पोलैंड का वह नौजवान जो अपनी सायकिल पर राष्ट्रपति लेक किजंस्की के ताबूत के पीछे चल रहा था जब उससे एक अखबार ने उससे बात की तो उसका जवाब था कि इस हादसे से उसे डर नहीं लग रहा, कानून और संविधान इस समस्या से निपट लेंगे। पिछले हफ्ते पोलैंड ने अपनी राष्ट्रपति और कईं आला नेताओं को हवाई हादसे में खो दिया लेकिन इस त्रासदी ने कुछ और भी बता दिया। वह यह कि पौलैंड अपने दमनकारी कम्युनिस्ट अतीत से बाहर आ चुका है। आज वहां स्थिरिता और शांतिपूर्ण लोकतंत्र है। संविधान के हिसाब से चुनाव की तैयारियां होने लगीं। जैसे ही गर्मियां शुरू होंगी पौलैंड के लोग अपने नए राष्ट्रपति का चुनाव करेंगे।
क्रिश्चियन साइंस मॉनीटर

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