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एक आदेश ले डूबा लाखों की फसल

महाकुंभ मेलाधिकारी के गंगा में फूल नहीं चढ़ाने के एक आदेश ने हरिद्वार जिले में खड़ी करीब 220 हेक्टेयर गेंदे के फूल की फसल बर्बाद कर दी। इससे किसानों को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। हरिद्वार जिले में करीब छह माह पहले महाकुंभ की तैयारियों के दौरान उद्यान विभाग में किसानों के लिए गेंदे के फूल उगाने की एक योजना आई थी।

इस योजना के तहत किसानों को यह कहकर लुभाया गया था कि महाकुंभ में गेंदे के फूलों की जबरदस्त सप्लाई होगी। इसके आधार पर महाकुंभ में बाहरी क्षेत्रों से फूल मंगाने के बजाए जिले के किसानों को ही गेंदे की फसल की बुआई के लिए प्रोत्साहित किया गया। जिसके तहत जिले के खानपुर, रुड़की, बहादराबाद, नारसन, लक्सर और भगवानपुर ब्लाक में इस योजना में करीब 265 किलोग्राम बीज किसानों को दिया गया।

योजना में किसानों को नि:शुल्क गेंदे का बीज, खाद और कीटनाशक दवाईयां दी गई थी। कुंभ में फूलों की खूब डिमांड होगी, इसे देखते जिले के करीब 500 किसानों ने 220 हेक्टेयर भूमि पर गेंदे की फसल बोयी। वैसे तो यह फसल मात्र तीन महीने की थी। जिससे शुरू में किसानों ने इस फसल को सितंबर-अक्टूबर माह में तैयार किया। पर उस दौरान सर्दी अधिक होने के कारण पौधे नहीं चल पाए।

बाद में किसानों ने इस फसल को दिसंबर-जनवरी में तैयार किया। जिससे इस फसल में किसानों ने छह माह बर्बाद कर दिये। जब फूल आने लगे तो गंगा में प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए मेलाधिकारी गंगा में फूल विर्सजन पर रोक लगा दी।

नतीजनत खेतों में खड़ा फूल कुंभ बाजार में नहीं पहुंच पाया और जिले के 500 किसानों को लाखों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा। जिला उद्यान अधिकारी हितपाल सिंह का कहना है कि फूल नहीं बिकने के कारण एक-एक किसान को लाखो रुपये का नुकसान उठाना पड़ा हैं। क्योंकि एक तो गेंदे की फसल में उन्हें नुकसान उठाया। वहीं दूसरी ओर यदि वह गेंदे की फसल के बजाये गेहूं, गन्ना या फिर अन्य कोई फसल तैयार करते तो उसमें वह काफी मुनाफा कमा सकते थे।

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