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5000 भिखारी! हर कोई परेशान

आप कार में बैठे किसी चौराहे पर ट्रैफिक सिग्नल मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इतने में बाबू दो रुपए दो ना कहते हुए एक बच्चा आपके पीछे पड़ जाए। आप दया भाव या पीछा छुड़ाने के लिए उसे रुपए देने लगेंगे। आपकी कार के पीछे का शीशा खुला हुआ है। इतनी देर में इस सीट पर रखा लैपटॉप, मोबाइल, पर्स या फिर अन्य कीमती सामान गायब हो सकता है। आगे निकलने के बाद आप को जब तक होश आएगा तब तक बहुत देर हो चुकी होगी। नोएडा के चौक-चौराहे पर पहले ही भिखारियों से लोग परेशान थे, अब कॉमनवेल्थ के मद्देनजर दिल्ली से भगाए जाने के कारण यहां दर-दर पर भिखारियों की भीड़ दिख रही है। आम आदमी, वाहन चालक और ऑटो-टेम्पो में सफर करने वाली महिलाएं इनसे ज्यादा परेशान हैं।


भीख मांगते हुए छोटे-छोटे बच्चों वाहन के सामने आ जाते हैं। इससे जान पर भी आफत बन जाती है। कॉमनवेल्थ के मद्देनजर दिल्ली से भगाए गए भिखारियों के लिए नोएडा गढ़ बन चुका है। इसने नोएडावासियों की मुश्किलें और भी बढ़ा दी हैं। पुलिस फिलहाल इनका रिकार्ड बनाने की बात कह रही है, लेकिन दिल्ली में लागू फैसले के बाद आम तौर पर यह माना जाने लगा है कि नोएडा में भिखारियों की तादाद पांच हजार के पार हो गई है। इनमें मंदिर के आसपास बैठने वालों के अलावा चौराहों व मेट्रो स्टेशन के नीचे जमे रहने वालों की तादाद ठीकठाक है।

सभी व्यस्त चौराहे कब्जे में
शहर में करीब 86 चौराहे हैं। इन पर करीब पांच हजार भिखारियों ने कब्जा कर रखा है। इन लोगों ने चोराहों को आपस में बांट रखा है। प्रमुख रूप से गोलचक्कर, रजनीगंधा चौक, सेक्टर-37 चौक, सिटी सेंटर, अट्टा पीर, स्टेडियम चौक व सेक्टर-12-22 चौक ऐसे हैं, जिनको भिखारियों ने आपस में बांट रखा है। यहां से हर महीने लाखों रुपए की आमदनी होती है। भीख मांगने के पेशे में न सिर्फ छोटे बच्चाे बल्कि बुजुर्ग व महिलाएं भी शामिल हैं। छोटे बच्चाों को गोद में लेकर ये लोग चौराहों पर खड़े वाहन चालकों को परेशान कर देते हैं। भीख मांगने के लिए जान जोखिम में डालने से नहीं चूकते। वाहन रुकने से पहले ही ये लोग सामने आ जाते हैं।
इनके नए-नए फंडे
कई बार वाहन साफ करने वाले कपड़े, एसी गार्ड व अन्य सामान बेचते समय भी ये लोग वाहन चालकों को चूना लगा देते हैं।  एक साथ टोली बनाकर ये आपको सामान बेचने आ जाएंगे आप उनसे बात करने में व्यस्त हो जाएंगे,उधर पहले नजर गड़ाए उनके अन्य साथी लोगों के कार में रखे मोबाइल आदि पर हाथ साफ कर देते हैँ।
वाहन चालकों की जान पर आफत
ये लोग भिखारी वाहन चालकों की जान की भी आफत बने हुए हैं। छोटे-छोटे बच्चाे व बुजुर्ग दूसरी तरफ भींख मांगने के लिए तेज रफ्तार से आ रही वाहनों को देखे बिना रोड क्रॉस करने के लिए दौड़ पड़ते हैं। इससे दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं। यातायात पुिलस की मानें तो करीब 20 फीसदी दुर्घटनाएं भीख मांगने वालों के कारण होती है।

एक महीने में बनेगी सूची
चौराहों पर मुसीबत बनने के साथ ही ये लोग अपराधिक वारदातों को भी अंजाम दे रहे हैं। लैपटॉप, पर्स, चेन आदि सामानों की चोरी में शामिल रहते हैं। पुलिस इस बात को स्वीकार कर रही है। ऐसी करीब 20 प्रतिशत घटनाओं में भिखारियों के शामिल होने का अनुमान है। अब पुलिस की भी नींद टूटी है। कॉमनवेल्थ से पहले इनको ठिकाने लगाने के लिए पुलिस योजना  बना रही है। इन भिखारियों की सूची बनाकर वारदातों में इनके शामिल होने की जांच करने की योजना है।
 
‘‘शहर में भिखारियों की तादात हजारों में है। सभी कोतवालों को इनकी सूची बनाकर एक माह के भीतर सुपुर्द करने को कहा गया है। इनकी शिनाख्त की जाएगी। किसी अपराधिक घटनाओं में शामिल होने से इंकार नहीं किया जा सकता। सूची बनाकर इन सबकी जांच की जाएगी। कॉमनवेल्थ से पहले यह काम पूरा कर लिया जाएगा।’’
ए के त्रिपाठी
एस पी सिटी, नोएडा
एक नजर में
 शहर में भिखारियों की संख्या-करीब पांच हजार
 शहर के सभी 86 चौराहों पर भिखारियों का कब्जा
 प्रमुख चौराहे -गोलचक्कर, रजनीगंधा चौक, सेक्टर-37 चौक, सिटी सेंटर, अट्टा पीर, स्टेडियम चौक, सेक्टर-12-22 चौक
 औसतन रोजाना पांच लाख रुपए का कारोबार
 सेक्टर-8, 9 10, 16 की झुग्गी, मोरना गांव, होशियारपुर, अट्टा के पीछे बनी झुग्गियों में डेरा
 महीने में लैपटॉप, मोबाइल पर्स आदि की सौ से अधिक वारदातें
 एक भिखारी की औसतन सौ रुपए रोजाना कमाई

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