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प्ले फॉर इंडिया भावी खिलाड़ियों के सपने करेगा सच- खेल निदेशक

हरियाणा में खेल प्रतिभाओं की तलाश कर उन्हें तरासने के लिए 15 अप्रैल से स्पोर्ट्स टेलेंट हंट की शुरुआत की जा रही है। इस कार्यक्रम के जरिये प्रदेश भर में खेल के प्रति रूचि रखने वाले प्रतिभावान भावी खिलाड़ियों सहित खेल प्रशिक्षकों का एक डाटाबेस तैयार किया जाएगा। हंट में मिलने वाले ग्रेड के आधार पर खिलाड़ियों को तमाम खेल सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।
यह जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में खेल निदेशक ओपी सिंह ने दी। उन्होंने कहा कि 8 से 19 वर्ष आयु की खेल प्रतिभाओं की तलाश के लिए एक अप्रैल से स्पोर्ट्स टेलेंट हंट कार्यक्रम शुरू किया गया है। यह देश में अपने तरह का अनूठा कार्यक्रम हैं। इसके तहत खिलाड़ियों को 10 अप्रैल तक प्ले फार इंडिया नामक वेबसाइट पर अपना पंजीकरण कराना था। 15 अप्रैल से गुड़गांव सहित रोहतक, भिवानी तथा पंचकूला चार जिलों के खेल परिसरों में पंजीकृत खिलाडियों का स्पोर्ट्स एंड फिजिकल एप्टीट्यूड टेस्ट (एसपीएटी) होगा। खेल निदेशक ने एक सवाल के जवाब में स्पष्ट किया कि इन चार जिलों में सभी पंजीकृत खिलाडियों के टेस्ट पूरा होने तक यह कार्यक्रम जारी रहेगा। पहले 15-17 अप्रैल तक इसके लिए समय निर्धारित किया गया था। पहले दिन 15 अप्रैल को 8 से 9 वर्ष आयु के खिलाडियों का टेस्ट होगा। निदेशक ने बताया कि प्रदेश के अन्य जिलों में इस प्रकार का टेस्ट 24 अप्रैल से शुरू किए जाएगे। सिंह के अनुसार कार्यक्रम के तहत लगभग 85 हजार खिलाड़ियों ने पंजीकरण के लिए आवेदन किया था। इनमें से 73080 आवेदन ठीक पाए गए हैं। यह अपेक्षा से अधिक है। खेल विभाग को इतने कम समय में लगभग दस हजार आवेदन प्राप्त होने की उम्मीद थी।
उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों द्वारा विभिन्न मान्यता प्राप्त प्रतियोगिताओं में जीते गए मेडलों तथा एसपीएटी के आधार पर उनकी ग्रे¨डग की जाएगी। ग्रेड के आधार पर ही खिलाड़ियों के बैंक खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। सिंह के अनुसार 8 से 14 वर्ष आयु के खिलाडियों को 18 हजार रूपए प्रति वर्ष तथा 14 से 19 आयु वर्ग के खिलाडियों को 30 हजार रूपए प्रति वर्ष दिए जाएंगें। इसके लिए हरियाणा सरकार द्वारा चालू वित्त वर्ष में खिलाडियों को प्रोत्साहन देने के लिए 6 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। ग्रेडिंग के हिसाब से पहले एक हजार खिलाडियों को 1500  से 3000 रूपए प्रतिमाह दिए जाएंगें। एक हजार खिलाड़ियों को 5000 रूपए वार्षिक। एक हजार खिलाडियों को 3000 रूपए वार्षिक  के साथ कोचिंग व स्पोर्टस किट भी दी जाएगी ताकि कोई प्रतिभावान खिलाड़ी पैसे की कमी के कारण खेलने से वंचित न रहें। खिलाड़ियों से इस पैसे के खर्च का लेखा जोखा भी मांगा जाएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में  स्वीमिंग कोच जगवीर सिंह का भी मामल सहित कोचों और स्टेडियमों के बारे में  बातें उठी।
चेस व अन्य गेम्स के लिए टेस्ट का स्वरूप बदलेगा
कुछ लोगों ने गेम्स निर्धारित प्रारूप पर कुछ खिलाड़ियों का टेस्ट नहीं दे पाने की बात उठाई। इसमें चेस, आर्चरी,टेनिस सहित ऐसे खेल जिनमें ज्यादा शारीरिक गतिविधि नहीं होती । इस पर निदेशक ने कहा कि ऐसे खेलों के लिए एसपीएटी से हटकर अलग योजना बनाई जाएगी। किसी भी गेम्स के खिलाड़ियों को टेस्ट के लिए असुविधा नहीं होने दी जाएगी। ये तय कार्यक्रम के बाद किया जाएगा।
मल्टीमीडिया के जरिये प्रशिक्षकों की दर्ज होगी उपस्थिति
खेल विभाग में नियुक्त कोचों को मल्टीमीडिया मोबाइल फोन दिए जाएंगें। उन्हें अपने वर्किग आवर के दौरान निदेशक को एमएमएस भेजने होंगें, उनकी हाजिरी रजिस्टर में नहीं लगेगी। निदेशक ने कहा कि आने वाले समय में खिलाड़ी तक करेगा कि किस कोच की  वह सुविधा लेगा। जब खिलाडी के पास पैसा होगा तो वह अपनी पसंद के कोच से कोचिंग ले सकता है।
एसएमएस से मिलेगी खिलाड़ियों की जानकारी
सिंह ने यह भी कहा कि राज्य सरकार द्वारा खिलाडियों व कोचों का एक विश्ववसनीय डाटाबेस तैयार किया जा रहा है ताकि कोई भी व्यक्ति इंटरनेट पर यह जान सकें कि हरियाणा में एक खेल विशेष के कौन कौन खिलाड़ी व कोच हैं। नेट पर ही सभी स्टार खिलाड़ियों की जानकारी होगी जिसे एमएमएस से कोई भी प्राप्त कर सकता हैं। इस मौके पर उपायुक्त राजेन्द्र कुमार कटारिया, नगराधीश अंजू चौधरी, उपनिदेशक सुखबीर सिंह,डीएसओ कुलविन्दर सिंह सहित अन्य उपस्थित थे।

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