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जेके मिल की बंदी, मजदूरों को पड़े वेतन के लाले

जेके जूट मिल की बंदी के बाद अब मिल के मजदूरों को पिछले महीने के बकाया वेतन के लिए संघर्ष करना पड़ रहा हैं। इस भीषण गर्मी में मिल में कार्यरत करीब ढा़ई हजार मजदूर धूप में खड़े मिल के बंद पड़े दरवाजे को निहार रहे है। आखिर कब मिलेगी उन्हें पिछले माह की सैलरी और कैसे भरेगा उनके बच्चों का पेट।

मिल के दरवाजे पर ताला लटका हुआ है और मिल के मालिकों का कोई अता पता नही हैं। इस बारे में लेबर (श्रम) विभाग के अधिकारियों से पूछा गया तो उनका कहना है कि वेतन की बाबत मिल के मालिकों से बात हो गई हैं, शीघ्र ही वेतन मिल जाएगा। लेकिन कब मिलेगा इस बात का कोई जवाब किसी अधिकारी के पास नही हैं।

पहले की दो बार की बंदी के बाद खुली जेके जूट मिल एक बार फिर पांच अप्रैल को सुबह अनिश्चित काल के लिए बंद हो गई थी। इस बंदी की बाबत श्रम विभाग (लेबर डिपार्टमेंट) और मजदूरों का कहना है कि मिल में मालिको ने अघोषित तालाबंदी कर दी हैं। जिससे करीब 2700 मजदूर एक बार फिर बेरोजगार होकर सड़क पर आ गए हैं।

जेके जूट मिल के प्रबंधन के अनुसार पिछले 22 मार्च से मजदूर आंदोलन पर थे और मिल का उत्पादन लगातार घटता जा रहा था।

पहले से जो उत्पादन 70 टन प्रति दिन होता था, वह अब घटकर 20 से 22 टन पर हो गया था। ऐसी स्थिति में मिल में काम करना मुश्किल हो रहा था। इसलिए पांच अप्रैल की सुबह से मिल में कार्य स्थगित कर दिया गया था और मिल का गेट बंद कर दिया गया था।

 

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