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व्यावहारिक रूप से 'अंधा' बना सकती है ईर्ष्या

ईर्ष्या हमें व्यावहारिक रूप से 'अंधा' बना सकती है। इस कारण व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल नहीं हो पाता है।

एक नए अध्ययन से पता चला है कि जिन महिलाओं में ईर्ष्या की प्रवृत्ति ज्यादा होती है वे अप्रिय भावनात्मक दृश्यों से ज्यादा विचलित होती हैं जिससे वह अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में असफल रहती हैं।

इस बात को तो लोग अच्छे से जानते हैं कि सामाजिक रिश्तों से जुड़ी भावनाओं का हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है लेकिन यह भी पता चला है कि सामाजिक भावनाओं का हमारे देखने पर भी असर पड़ता है।

अमेरिका की डेलावेयर विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान के प्रोफेसर स्टीवन मोस्ट और जीन फिलिप ने अपने सहयोगियों के साथ प्रयोगशाला में इस संबंध में एक परीक्षण किया।

इस परीक्षण में प्रेमी जोड़ों को एक दूसरे के करीब लेकिन अलग-अलग कंप्यूटरों पर बिठाया गया। युवतियों को स्क्रीन पर तेजी से चल रही तस्वीरों में प्राकृतिक दृश्यों को खोजने को कहा गया। साथ ही उनसे यह भी कहा गया कि भावनात्मक रूप से अप्रिय तस्वीरों (भयानक तस्वीरों या ग्राफिक) को नजरंदाज करने का प्रयास करें।

वहीं पुरुषों को प्राकृतिक दृश्यों के आकर्षण को मापन की जिम्मेदारी दी गई। प्रयोग के बीच में ही प्रयोगकर्ताओं ने कहा कि पुरुष अब दूसरी युवतियों के साथ बैठकर उनके द्वारा खोजे गए प्राकृतिक दृश्यों के आकर्षण का मापन करेंगे।

अंत में युवतियों से पूछा गया कि अपने जोड़ीदार को दूसरी युवती के साथ बैठकर प्राकृतिक दृश्यों के आकर्षण का मापन करते देख उन्हें किस तरह की दिक्कत महसूस हुइर्ं।

प्रयोग में पता चला कि जिन महिलाओं को ज्यादा ईष्र्या महसूस हुई वे अप्रिय चित्रों से ज्यादा विचलित हुईं जिससे वे अपने लक्ष्य को नहीं प्राप्त कर सकीं।

ईष्र्या और भावना से प्रभावित अंधेपन के बीच का संबंध उसी समय उभरकर सामने आया जब पुरुष दूसरी युवतियों के साथ बैठकर उनके खोजों का मापन करने लगे।

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