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45 डिग्री पर हावी सियासत की गर्मी, दोनों पार्टियों ने किया शक्ति प्रदर्शन

45 डिग्री सेल्सियस के गर्म तापमान के बीच पाँच सौ मीटर के फासले पर आयोजित कांग्रेस और बसपा कार्यक्रमों से भी सियासत की गर्मी उठ रही थी। डॉ. अम्बेडकर की जयन्ती के बहाने ही सही दोनों पार्टियों ने अपनी शक्ति का पूरा प्रदर्शन किया। दोनों ही कार्यक्रमों में पार्टी कार्यकर्ताओं के अन्दर उत्साह की कमी नहीं नजर आ रही थी।

बुधवार की सुबह भगवान भास्कर के उदय के साथ दो सियासी दलों में कार्यक्रम के बावत जबरदस्त चहल-पहल शुरू हो गई। ज्यों-ज्यों धूप का प्रभाव आम जनमानस पर पड़ता गया वैसे-वैसे कार्यक्रम भी परवान चढ़ने लगा। कांग्रेस की रैली और संदेश यात्रा में जिले के साथ-साथ गैर जनपद से भी हजारों लोगों ने शिरकत की थी। वहीं बसपा के कार्यक्रम में ट्रैक्टर ट्राली, बसों तथा चार पहिया वाहनों से सवार होकर महिला और पुरुष विरोध प्रदर्शन में शरीक हुए।

10 बजे के लगभग दोनों दलों का कार्यक्रम शुरू हुआ। कांग्रेस ने राहुल गांधी के आने के पूर्व औपचारिक शुभारम्भ किया लेकिन बसपा कार्यक्रम चूँकि स्थानीय नेताओं की भागीदारी पर सुनिश्चित था इसलिए यहाँ कार्यक्रम की शुरुआत निर्धारित समय पर ही हो गई।

बसपा के कार्यक्रम में शरीक हुए सर्व समाज के लोगों में डॉ. अम्बेडकर और बसपा प्रमुख मायावती के प्रति जबरदस्त समर्थन नजर आ रहा था। एक नारे पर कार्यकर्ता पूरे गले का जोर लगाकर अपनी भावनाओं को प्रदर्शित कर रहे थे। बसपा कार्यक्रम में जयन्ती की धूम इस तरह थी कि अधिकांश कार्यकर्ता और नेता बिना ठुमका लगाए अपने आपको रोक नहीं सके। पाँच घण्टे तक चले जयन्ती समारोह और केन्द्र की यूपीए सरकार एवं महिला आरक्षण बिल के मौजूदा स्वरूप के विरोध प्रदर्शन में कार्यकर्ता पूरी ताकत और जोर शोर से जुटे रहे।

उधर कांग्रेस ने अपने पंजे का दम दिखलाने में तनिक भी कसर नहीं छोड़ी। राहुल गांधी की एक झलक पाने के लिए युवाओं में गजब का उत्साह नजर आ रहा था। भीड़ का व्यवहार यह बताने के लिए काफी था कि राहुल का आम लोगों में क्या ग्लैमर है। राहुल को देखने की इतनी बेताबी थी कि अगल-बगल लगी तमाम बैरीकेटिंग भी टूट गई।

सियासत की इस रैली में राहुल के मंच के साथ एक अलग मंच पर दिग्गज कांग्रेसियों की फौज आसीन रही। इसमें पुराने कर्मठी नेताओं, केन्द्रीय मंत्रियों के साथ सिने स्टार की भी आमद भीड़ को काबू करने के लिए माकूल थी। साढ़े तीन घण्टे में कांग्रेसियों ने वह सब कुछ उड़ेल दिया, जिसके लिए इतना बड़ा ‘शो’ आयोजित था।

राहुल गांधी ने तो यह नहीं बताया कि आखिर यह कार्यक्रम अम्बेडकरनगर में ही क्यों आयोजित हुआ, लेकिन अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस मकसद को जमकर परिभाषित किया। कांग्रेसियों ने डॉ. अम्बेडकर को अपना बताया और दलितों पर अपना हाथ भी सहलाया।

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