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गर्मी बढ़ने से लीची उत्पादन को लग सकती है लू

गर्मी बढ़ने से लीची उत्पादन को लग सकती है लू

लीची के पेड़ों पर लगे अच्छे बौर के बावजूद उत्पादक क्षेत्रों में गर्मी में अचानक हुई वृद्धि तथा पछुआ हवा के कारण इस साल लीची का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले कम रह सकता है। उत्पादकों की सुने तो गर्मी बढ़ने के कारण इस साल उत्पादन आधा रह सकता है।

लीची उत्पादक एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज चिनवाल ने कहा कि लीची का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष 50 फीसद तक घट सकता है। इसका कारण बिहार, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में गर्मी में अचानक हुई वृद्धि है। कृषि वैज्ञानिक भी सामान्य से अधिक गर्मी के से फल पर दुष्प्रभाव को मानते हैं। पर उनका कहना है कि उत्पादन पर 20 प्रतिशत तक असर हो सकता है।

बिहार में मुजफ्फरपुर स्थित लीची अनुसंधान संस्थान के निदेशक के के कुमार नेबताया कि इस साल पेड़ों पर अच्छे बौर थे लेकिन 23 मार्च से गर्मी में अचानक हुई बढ़ोतरी तथा तेज पछुआ हवाओं के कारण लीची का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कम होकर लगभग 4 लाख टन रह सकता है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2009 में देश में 4.48 लाख टन लीची का उत्पादन हुआ था। कुमार ने कहा कि गर्मी बढ़ने के कारण लगभग 20 फीसद फल सूख गये हैं।

तापमान में अचानक हुई वृद्धि के कारण चाइना जैसे देरे से पकने वाले फल पर ज्यादा असर पड़ेगा। पुन: जल्दी पकने वाले शाही, देहरादून पर भी इसका असर पड़ना तय है। उन्होंने कहा कि मौजूदा फसल मौसम मार्च़ जून में पेड़ों पर अच्छे बौर थे लेकिन मार्च में पारे के अचानक 40 के आंकड़े पर पहुंच जाने के कारण इसका फसल पर बुरा असर पड़ा है। लीची अनुसंधान संस्थान मुजफफरपुर के निदेशक ने कहा कि लीची पर फल लगने के समय तापमान 35 से 36 सेल्सियस तथा फसल पकने के समय 38 से 38 सेल्सियस बेहतर माना जाता है। जबकि 23 मार्च को तापमान 40 डिग्री पहुंच गया। बिहार का प्रमुख लीची उत्पादक जिला मुजफ्फरपुर में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है जबकि आमतौर पर मई में पारा इस स्तर पर पहुंचता है।

लीची उत्पादक एसोसिएशन के महासचिव बच्चा प्रसाद का कहना है कि अगर अगले 1 2 सप्ताह में बारिश नहीं होती है तो मुजफ्फरपुर में पकने वाली शाही लीची पूरी तरह खराब हो सकती है। गर्मी से बचाव के बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा कि किसान निरंतर सिंचाई विशेषकर शाम में स्प्रिंकल के जरिये सिंचाई से फसल उत्पादन में गिरावट को कम कर सकते हैं। पुन: प्लानो फिक्स का 4 एमएल 10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने से अच्छे फल प्राप्त किये जा सकते हैं। यह विधि चाइना जैसे देर से पकने वाली प्रजाति के लिये ज्यादा मददगार है। गर्मी के कारण पेड़ों में हार्मोन असंतुलन को दूर करने में प्लानो फिक्स मददगार है।

उल्लेखनीय है लीची मौसम की शुरुआत बंबइया किस्म से होती है जो मई के दूसरे सप्ताह में बाजार में आती है। लीची मुख्यत: बिहार का फल है जहां कुल उत्पादन का 80 फीसदी होता है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी लीची उपज होती है। उड़ीसा और झारखंड में यह कम मात्रा में होती है।

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