DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

हर मौसम में आम में मिठास घोलने में जुटे वैज्ञानिक

हर मौसम में आम में मिठास घोलने में जुटे वैज्ञानिक

देश के कृषि वैज्ञानिक ऐसी स्वप्निल परियोजना पर काम कर रहे हैं, जिससे फलों का राजा आम की फसल न केवल हर मौसम में ली जा सकेगी, बल्कि उसमें लोकप्रिय दशहरी और मालदा जैसी मिठास और स्वाद भी होगा।

हालांकि देश के दक्षिणी भागों में बंगलोरा जैसी आम की किस्में नवंबर-दिसंबर में होती हैं, लेकिन स्वाद के मामले में ये मई-जून में तैयार होने वाली दशहरी और मालदा प्रजाति के आमों से मुकाबला नहीं कर सकतीं।

लखनउ स्थित केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के वैज्ञानिक आम पर इस तरह के अनुसंधान में लगे हैं। राष्ट्रीय कृषि नवप्रवर्तन परियोजना के तहत आम अनुसंधान परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों ने इसे स्वप्निल परियोजना कहा है।

केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के विभाग प्रमुख (फसल सुधार) डॉ. रमेश चंद्र ने बताया कि नेशनल एग्रीकल्चर इनोवेशन प्रोजेक्ट के तहत कृषि वैज्ञानिकों का एक दल आम के ऐसे किस्मों पर काम कर रहा है जो न केवल दशहरी और मालदा जैसे स्वादिष्ट हो बल्कि हर मौसम में और प्रत्येक भौगोलिक परिस्थिति में फल दें।

इस परियोजना को पिछले वर्ष 2009 में शुरू किया गया था और इसके चार वर्ष में पूरा होने की उम्मीद है।
इसी संस्थान के प्रोफेसर डॉ. एसआर भगवंशी (फसल उत्पादन, प्रमुख) ने कहा कि यह हमारे लिए स्वप्निल परियोजना है। इसका पूरा होना हमारे लिये सपनों के पूरा होने जैसा है।


भगवंशी ने कहा कि परियोजना के तहत हम आम के विभिन्न किस्मों का अध्ययन कर रहे हैं और यह जानने की कोशिश की जा रही है कि आखिर दक्षिण भारत में होने वाले नीलम और बंगलोरा जैसे आम की किस्मों में वह मिठास क्यों नहीं होती जो दशहरी, अल्फांसो या फिर मालदा में होती है। फिर ये किस्म नवंबर-दिसंबर में होते हैं तो फिर पूर्वी भारत के फल नवंबर-दिसंबर में क्यों नहीं हो सकते।

इसके अलावा कृषि वैज्ञानिक इस बात का भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर मलीहाबाद में जिस प्रकार की आम होती है उसे सहारनपुर या अन्य क्षेत्रों में क्यों नहीं उपजाया जा सकता। भगवंशी ने कहा कि हम आम के विभिन्न किस्मों में जीन और रसायनिक बदलाव के जरिए अपने मकसद तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें तीन से चार साल का समय लग सकता है।

उल्लेखनीय है कि विश्व के लगभग 2.3 करोड़ टन आम उत्पादन में से 50 फीसदी हिस्सा यहां होता है। मैंगीफेरा इंडिका नाम के इस फल की लगभग 1,000 किस्में पाई जाती हैं, जिनमें अल्फांसो, बंगलोरा, दशहरी, बंबई, वनराज, लंगरा, सफेदा आदि प्रमुख हैं। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल इसके प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:हर मौसम में आम में मिठास घोलने में जुटे वैज्ञानिक