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अब अंगना में उतरा अंतरिक्ष

अब अंगना में उतरा अंतरिक्ष

इस माह जब छह अप्रैल को स्पेस शटल डिस्कवरी में क्रू के साथ तीन महिलाएं स्पेस के लिए उड़ीं तो यह एक ऐतिहासिक कदम माना गया। एक महिला पहले से ही स्पेस में मौजूद थी। यानी यह पहला मौका था, जब एक साथ चार महिलाएं स्पेस में मौजूद थीं। यह घटना इस बात का भी संकेत है कि कम से कम स्पेस में लैंगिक असमानता खत्म होने के आसार दिखाई देने लगे हैं। स्पेस में जाने वाली इन चारों महिलाओं के बारे में बता रहे हैं अनुराग मिश्र

पिछले दिनों नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) के कार्यालय में एक रिपोर्टर ने अचानक यह सवाल पूछ लिया कि क्या नासा मेल डोमिनेटेड संस्था है? इस सवाल से वहां मौजूद सभी अधिकारी चकित रह गये। नासा के ऑपरेशंस प्रमुख बिल ग्रेस्टेनमेयर ने कहा, संभव है ऐसा इस व्यवस्था के चलते लगता हो, लेकिन हम ऐसा नहीं सोचते कि ये मेल डोमिनिटेड है या फीमेल डोमिनेटेड। हम केवल प्रतिभाशाली लोगों के बारे में सोचते हैं, जो स्पेस में जाकर अपना काम कर सकें।

लेकिन इसके बावजूद जब 6 अप्रैल को स्पेस शटल डिस्कवरी स्पेस के लिए उड़ा तो स्पेस में पहली बार चार महिलाएं एक साथ मौजूद हुई, जो इस बात की गवाही दे रहा था कि कम से कम से स्पेस में लैंगिक असमानता कम हो रही है। हालांकि इस तथ्य के बावजूद कि स्पेस में पहली बार चार महिलाएं एक साथ मौजूद हैं, अभी भी पुरुषों के मुकाबले स्त्रियों की स्पेस में जाने की रफ्तार काफी धीमी है। इसकी एक वजह यह भी मानी जा सकती है कि महिलाएं विज्ञान विषयों की पढ़ाई तुलनात्मक रूप से कम करती हैं।

और यह तो तथ्य है कि अक्सर महिलाओं को अपना करियर घर, परिवार, पति और बच्चों के सामने छोड़ना पड़ता है। लेकिन 27 साल पहले अमेरिका की पहली पहली महिला सैली राइड ने स्पेस में कदम रखकर जिस सफर की शुरुआत की थी, वह रफ्ता-रफ्ता अब आगे बढ़ने लगा है। और आज पचास से अधिक महिलाएं स्पेस में कदम रख चुकी हैं, जो  इस बात का भी प्रतीक है कि महिलाओं की दुनिया अब केवल चूल्हे चौके तक ही सीमित नहीं रही है। अब वह खुले आकाश में उड़ना चाहती है और उड़ रही है।

कल्पना चावला

कल्पना चावला का नाम आज सभी जानते हैं। वह एक भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष शटल विशेषज्ञ थीं। वे कोलंबिया हादसे में मारे गए सात दल के यात्रियों में से एक थीं। कल्पना चावला हरियाणा के एक हिंदू परिवार से संबंध रखती थीं। कल्पना की प्रारंभिक शिक्षा टैगोर पब्लिक स्कूल, हरियाणा से हुई। उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से वैमानिक अभियांत्रिकी की शिक्षा प्राप्त की। कल्पना को हवाई जहाजों, ग्लाइडरों और व्यावसायिक विमानचालन के लिए प्रमाणित उड़ान प्रशिक्षक का दर्जा हासिल था। कल्पना ने नासा को 1995 में बतौर एस्ट्रोनॉट कॉर्प्स ज्वॉइन किया और 1998 में उनका चयन पहली फ्लाइट के लिए हो गया। उनका पहला स्पेस मिशन 1997 को शुरू हुआ। कल्पना अंतरिक्ष में उड़ने वाली भारत की प्रथम महिला थीं। कल्पना ने पहले मिशन में 10.4 करोड़ मील का सफर तय किया। वर्ष 2000 में कल्पना को एसटीएस 107 की सेकेंड फ्लाइट के लिए चुना गया। एक फरवरी, 2003 को कोलंबिया हादसे में कल्पना की मौत हो गई। कल्पना को नासा का स्पेस फ्लाइट मेडल, डिफेंस डिस्टिंगुइश सर्विस मेडल के पुरस्कार से नवाजा गया। पूरी दुनिया में कल्पना चावला का नाम आज भी आदर से लिया जाता है। इनके नाम पर कई स्कॉलरशिप भी शुरू की जा चुकी हैं और कई विश्विद्यालयों का नाम भी इनके नाम पर रखा गया है।

नाओको यामाजाकी

अंतरिक्ष की दुनिया में लैंगिक समानता कायम करने के लिए जिन चार महिलाओं का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है, उनमें से एक हैं जापान की नाओको यामाजाकी। यह दूसरी जापानी महिला हैं, जो अंतरिक्ष में गई हैं। जापान में उन्हें मम एस्ट्रोनॉट कहा जा रहा है। उनके पति (ताईची यामाजाकी), जो सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करते थे, ने अपनी नौकरी सात साल की लड़की युकी की देखभाल करने और पत्नी नाओको की देखभाल करने की खातिर छोड़ दी।

जापानी टेलीविजन में ताईची यामाजाकी को चावल धोते और लाउंड्री का काम करते दिखाया जा रहा है। ताईची कहते हैं कि उन्हें इस बात को लेकर जरा भी हिचक या शर्म नहीं है कि वह घरेलू काम कर रहे हैं, बल्कि मुझे इस बात का फक्र है कि मेरी पत्नी स्पेस की दुनिया में झंडे गाड़ रही है। नाओको का जन्म 1970 में माट्सुडो शहर में हुआ था। उन्होंने स्नातक की डिग्री एयरोस्पेस इंजीनियरिंग टोक्यो विश्वविद्यालय से 1993 में की और मास्टर डिग्री 1996 में की। 1999 में यामाजाकी का चयन इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए चुनी गई तीन जापानी महिलाओं में हुआ था। 2004 में उन्हें सोयज-टीएमए फ्लाइट इंजीनियर से सर्टिफाइड किया गया। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए छोड़े गए जापानी एक्सपेरीमेंट माडय़ूल कीबो में उन्हें एस्ट्रोनॉट डोई की क्रू सपोर्ट के तौर पर नियुक्त किया गया।

स्टेफनी विल्सन

1966 में बोस्टन, मैसाचुसेट्स में जन्मी एस विल्सन को स्नो स्कीइंग, संगीत, टिकट एकत्र करना और घुमक्कड़ी बेहद पसंद है। 1984 में मैसाचुसेट्स के टैकोनिक हाई स्कूल से स्नातक विल्सन ने वर्ष 1988 में हारवर्ड यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग साइंस में बैचलर डिगरी हासिल की। उसके बाद 1992 में टेक्सास यूनिवर्सिटी से उन्होंने एअरो-स्पेस इंजीनियरिंग में एमएससी की पढ़ाई पूरी की। हारवर्ड से ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद विल्सन ने दो साल के लिए डेनवर में पूर्व माटिन मैरीएटा एस्ट्रॉनिक्स के लिए काम किया। टाइटन के लिए बतौर इंजीनियर के तौर पर काम करते हुए उन्होंने व्हिकल लॉन्च और पेलोड में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके बाद उन्होंने टेक्सास यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया। इसकी पढ़ाई के बाद उन्होंने केलिफोर्निया में जेट प्रपल्शन लेबोरेटरी में काम करना प्रारंभ कर दिया। गेलीलियो स्पेस-क्राफ्ट के एटीटय़ूड एंड आर्टिकुलेशन कंट्रोल सब-सिस्टम के सदस्य के तौर पर विल्सन प्लेटफॉर्म प्वॉइंटिंग एक्युरेसी, एंटीना प्वॉइंटिंग एक्युरेसी और स्पिन रेट एक्युरेसी के लिए जिम्मेदार थीं। सीक्वेंस डेवलपमेंट और टेस्टिंग के क्षेत्र में भी उन्होंने काम किया है। अप्रैल 1996 में उन्हें  नासा द्वारा चुना गया। विल्सन को जॉनसन स्पेस सेंटर में नियुक्त किया गया।

दो साल के प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने मिशन स्पेशलिस्ट के तौर पर विशेषज्ञता हासिल करते हुए फ्लाइट असेसमेंट में प्रशिक्षण हासिल किया। प्रारंभ में उन्हें एस्ट्रोनॉट ऑफिस स्पेस स्टेशन में टेक्निकल ड्य़ूटी निभाने की जिम्मेदारी सौंपी गईं। उसके बाद उन्हें एस्ट्रोनॉट ऑफिस कैपकॉम ब्रांच में रखा गया, जहां वे मिशन कंट्रोल में अन्य ऑर्बिट सदस्यों के साथ प्राइम कम्युनिकेटर के तौर पर काम किया। बाद में विल्सन को शटल ऑपरेशन में टेक्निकल डय़ूटी प्रदान की गई।

लिंडनबर्गर

डोटी मैटकॉफ लिंडनबर्गर ने तीन साल पहले एस्ट्रोनॉट बनने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी थी । अब वह कक्षा में बतौर छात्र पढ़ रही हैं। उन्होंने 2006 में एस्ट्रोनॉट के रूप में अपना प्रशिक्षण पूरा किया, लेकिन सीखना लगातार जारी रखा। वह वर्तमान में रोबोटिक्स, कंप्यूटर साइंस, नेटवर्किंग और रूसी भाषा पढ़ाती हैं। मेटकॉफ लिंडनबर्गर एक एजूकेटर एस्ट्रोनॉट हैं, जो बतौर एस्ट्रोनॉट पूरी तरह प्रशिक्षित हैं। मैटकॉफ का चयन बतौर एस्ट्रोनॉट 2004 में हुआ। मॉर्गन पहली ऐसी एजूकेटर एस्ट्रोनॉट थीं, जो स्पेस में गई थीं। मॉर्गन एसटीएस-118 की क्रू-मेंबर थीं। मेटकॉफ का वर्तमान काम स्टेशन पर टैक्नोलॉजी को लागू करना है। वह वर्तमान में अमेरिका की सबसे कम उम्र की एस्ट्रोनॉट हैं। उनका चयन 29 साल की उम्र में हो गया था। वह ओलंपियाड के लिए भी पढ़ाती हैं। उनके पास जीओलॉजी में स्नातक की डिग्री है और विज्ञान और इतिहास पढ़ाने का सटिर्फिकेट है। लिंडनबर्गर बताती हैं कि उनकी नासा की यात्रा एक ऐसे सवाल से शुरू हुई, जो सुनने में मजाक-सा लगता है, लेकिन उसने मुङो स्पेस की बातें खोजने के लिए प्रेरित किया। मेरे एक छात्र ने मुझसे सवाल पूछा कि एस्ट्रोनॉट स्पेस में बाथरूम कैसे करते हैं?

मुझे उस वक्त सवाल का जवाब मालूम नहीं था। मैंने तुरंत ही इस सवाल तलाशने के लिए इंटरनेट का सहारा लिया। मुङो न सिर्फ सवाल का जवाब मिला, बल्कि नासा के बारे में कई महत्त्वपूर्ण जानकारियां भी मिलीं। लिंडनबर्गर का कहना है कि उन्हें इस बात पर यकीन नहीं था कि उनका चयन नासा के लिए हो जाएगा, लेकिन उनकी मेहनत रंग लाई और उनका चयन नासा के लिए हो गया। इसीलिए मैं अपने छात्रों को हमेशा कहती हूं कि मेहनत करो, सफलता जरूर मिलेगी।

लिंडनबर्गर कहती हैं कि युवा छात्रों को पढ़ाने को मैं हमेशा याद करती हूं, क्योंकि उनके सवालों से आपको बहुत कुछ सीखने का मौका मिलता है।

ट्रेस डायसन

ट्रेस केल्डवेल डायसन नासा की रूसी एस्ट्रोनॉट हैं। उनका जन्म 14 अगस्त, 1969 को हुआ था। उनकी विशेषज्ञता रसायन विज्ञान में है। डायसन स्पेस शटल इंडेवर की फ्लाइट एसटीएस-118 में मिशन विशेषज्ञ के तौर पर शामिल हुई थीं। नासा में उनका चयन जून 1998 में हुआ। 1999 में डायसन को एस्ट्रोनॉट ऑफिस आईएसएस ऑपरेशन का काम सौंपा गया। उनका काम था कि वह रशियन हार्डवेयर और प्रोडक्ट को आईएसएस के लिए डेवलप करें। डायसन अपने परिवार की दो लड़कियों में सबसे छोटी थीं। उनके पिता बतौर इलेक्ट्रिशियन काम करते थे। वह केलीफोर्निया स्टेट विश्वविद्यालय के दल में बतौर जंपर और स्पिंटर काम कर रही थीं। 2009 में उनकी शादी जॉर्ज डायसन से हुई थी। वह मशहूर बैंड मैक्स क्यू की प्रमुख वोकलिस्ट थी। डायसन सिग्मा एक्सआई रिसर्च सोसाइटी एंड केमिकल सोसाइटी से संबद्ध है। उन्होंने 1997 में केलिफोर्निया विश्वविद्यालय से फिजिकल कैमिस्ट्री में पीएच.डी की थी। उन्होंने 2001-02 में नासा के परफॉरमेंस अवॉर्ड से नवाजा गया था। 1997 में डायसन को इंवायरनमेंटल साइंस में कैमरी और ड्रिफस फेलोशिप मिली थी। डायसन ने अपने इस काम को विभिन्न साइंटफिक जनरल में प्रकाशित कराया।

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