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गलती स्कूल की,बोर्ड परीक्षा से वंचित हुए बच्चे

राजधानी के दो स्कूलों ने 20 छात्र-छात्रओं के कॅरियर में एक साल का बट्टा लगा दिया। दो वर्ष से परीक्षा की तैयारी में जुटे इन छात्रों के फार्म ही बोर्ड नहीं भेजे गए। इससे इन्हें परीक्षा से वंचित कर दिया गया है। परीक्षा न दे पाने से यह छात्र-छात्राएँ सदमे में हैं। आवासीय पब्लिक इण्टर कॉलेज की 12 वीं की छात्रा अमृता सिंह व छात्र आशीष शुक्ला ने खाना-पीना छोड़ दिया। कॉलेज ने ऐसे एक नहीं 16 छात्रों के परीक्षा फार्म बोर्ड को नहीं भेजे। इसी तरह बास्को कान्वेंट हाईस्कूल कमता चिनहट के हाईस्कूल के चार छात्रों का भविष्य भी अधर में लटक गया है।ड्ढr आवासीय पब्लिक इण्टर कॉलेज विराटनगर आलमबाग में 16 विद्यार्थियों ने 11वीं कक्षा में दाखिला लिया था। रेगुलर पढ़ाई की। पूरी फीस जमा की। 12वीं में बोर्ड परीक्षा फार्म भरने के साथ विद्यालय की अतिरिक्त फीस की फरमाइश भी पूरी की। कॉलेज ने कुल 3छात्रों की परीक्षा फीस बोर्ड के खाते में जमा की। लेकिन उसने इसमें से केवल 381 छात्र-छात्राओं के परीक्षा फार्म ही बोर्ड में जमा किए। 16 छात्रों के परीक्षा फार्म उसने नहीं जमा किया। बच्चों को इसकी जानकारी तब हुई जब वे प्रैक्िटकल में परीक्षक ने इन्हें प्रैक्िटकल देने से रोक दिया। इनके रोल नम्बर ही नहीं आए थे। अभिभावकों ने पड़ताल की तो स्कूल की पोल खुली।ड्ढr बच्चों की अपील पर अब हाईकोर्ट ने डीआईओएस को प्रकरण का निस्तारण करने का निर्देश दिया है। इसी तरह वास्को कान्वेंट हाईस्कूल के 10 वीं की छात्रा रेनू राजपूत,रति कश्यप, मोहित चौरसिया तथा रूपम शर्मा के परीक्षा फार्म भी बोर्ड नहीं पहुँचे। इससे इन बच्चों के रोल नम्बर भी बोर्ड ने नहीं जारी किए। इन छात्रों ने भी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अभिभावकों ने बताया कि बच्चे इतना आहत हैं कि उन्होंने खुद को अकेले में कैद कर लिया है। खाना-पीना तक छोड़ दिया है। इस मामले में आवासीय पब्लिक इण्टर कॉलेज के प्रबंधक हवलदार सिंह यादव ने कहा कि शायद इन बच्चों के फार्म उनसे खो गए थे। वास्को कान्वेंट स्कूल के प्रबंधक से सम्पर्क नहीं हो सका।

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