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ईरान पर प्रतिबंध परमाणु महत्वाकांक्षा का हल नहीं: भारत

ईरान पर प्रतिबंध परमाणु महत्वाकांक्षा का हल नहीं: भारत

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से कहा है कि भारत ईरान के परमाणु हथियारों की महत्वाकांक्षा का समर्थन नहीं करता, लेकिन उस पर प्रतिबंध इसका हल नहीं हैं क्योंकि प्रतिबंधों से सत्ता में शामिल लोगों की बजाए गरीबों पर ज्यादा प्रभाव पड़ता है।

मनमोहन ने दो दिन पहले ओबामा से मुलाकात के दौरान ईरान के मुद्दे पर हुई बातचीत के बारे में पत्रकार वार्ता में बताया, "मैंने राष्ट्रपति से कहा कि हम ईरान की परमाणु हथियारों की महत्वाकांक्षा का समर्थन नहीं करते।"

मनमोहन के मुताबिक उन्होंने ओबामा से कहा कि परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर करने वाला देश होने के नाते ईरान को वह सभी अधिकार प्राप्त हैं, जो इस पर हस्ताक्षर करने वाले सभी देशों को मिले हुए हैं। इसमें परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग का अधिकार भी शामिल है।

मनमोहन ने कहा कि जहां तक प्रतिबंधों का सवाल है, मैंने उनसे कहा कि जहां तक हम सोचते हैं, हमें नहीं लगता कि प्रतिबंध वास्तव में अपना उद्देश्य पूरा करते हैं।

मनमोहन ने कहा कि आम तौर पर जब किसी देश पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो उस देश की सरकार के बजाय गरीबों पर उसका असर ज्यादा होता है। जहां तक सरकार की बात है, इन प्रतिबंधों से वे किसी भी सार्थक तरीके से प्रभावित नहीं होते। इसके आगे और कोई बात नहीं थी।

अमेरिका ईरान पर संयुक्त राष्ट्र के चौथे चरण के प्रतिबंध लगाने के लिए भारत समेत अन्य देशों से समर्थन एकत्रित कर रहा है। अमेरिका की इस मांग के बीच मनमोहन ने यह वक्तव्य दिया है।

एक अन्य प्रश्न के जवाब में मनमोहन ने कहा कि भारत के ईरान के साथ अच्छे संबंध हैं।  यह पूछे जाने पर कि क्या वह ईरान द्वारा अगले सप्ताह आयोजित एक सम्मेलन में भाग लेने के लिए तेहरान जाएंगे, मनमोहन ने कहा कि उनकी ऐसी कोई योजना नहीं है।

मनमोहन ने कहा कि मैं इतने शॉर्ट नोटिस पर यात्रा नहीं कर सकता, मुझे भारत में और कई काम हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि सम्मेलन में भारत की ओर से कोई और शामिल होगा।

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