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लश्कर-ए-तैयबा पर और सबूत देने की जरूरत नहीं: मनमोहन

लश्कर-ए-तैयबा पर और सबूत देने की जरूरत नहीं: मनमोहन

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हाफिज सईद और मुंबई हमले की साजिश रचने के आरोपी अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त सबूत न होने की पाकिस्तान की दलील को खारिज करते हुए कहा कि तमाम सबूत सबके सामने हैं और अब उसे कोई और सुबूत देने की जरूरत नहीं है।

परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी के साथ दो बार बातचीत करने वाले मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत पाकिस्तान के साथ सभी मामलों पर बातचीत शुरू कर सकता है बशर्ते पाकिस्तान मुंबई पर आतंकी हमले की साजिश रचने वालों के खिलाफ ठोस और कारगर कार्रवाई करे।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका अथवा किसी अन्य देश को भारत पाकिस्तान के मसलों में दखल देने की कोई जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उनसे गिलानी की इस दलील के बारे में पूछा गया कि पाकिस्तान के पास सईद जैसे लश्कर-ए-तैयबा के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं, तो उन्होंने कहा कि सबसे पहले मैं कहना चाहूंगा कि मुझे लश्कर-ए-तैयबा की भूमिका के बारे में कोई और सबूत देने की जरूरत महसूस नहीं होती।


गिलानी ने सोमवार को कहा था कि मुंबई हमलों की साजिश में शामिल होने के आरोप के सिलसिले में कार्रवाई करने के लिए पाकिस्तान को लश्कर-ए-तैयबा के खिलाफ और सबूत चाहिएं। गिलानी ने कहा था, अगर हमारे पास और ठोस सुबूत होंगे तो हम उन लोगों के खिलाफ निश्चित रूप से कानूनी कार्रवाई करेंगे।

सिंह ने कहा कि वह गिलानी के साथ संवाददाता सम्मेलन में बहस करने को गैर जरूरी मानते हैं और कहा,  मुझे लगता है कि अमेरिकी गुप्तचर एजेंसियों और अमेरिकी सेनाओं ने लश्कर-ए-तैयबा की भूमिका और अल कायदा के साथ लश्कर के संपर्क की बात कही है और इस ओर इशारा किया है।

उन्होंने कहा कि ऐसे में मुझे नहीं लगता कि लश्कर-ए-तैयबा, हाफिज सईद, इलयास कश्मीरी, जकीउर्रहमान की भूमिका के बारे में प्रधानमंत्री गिलानी को कोई और अतिरिक्त सबूत देने की जरूरत है। ये वह नाम हैं जो आतंकवाद को हवा दे रहे हैं।

मनमोहन सिंह ने मुंबई हमले की साजिश रचने वालों के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा मुनासिब कार्रवाई न किए जाने पर भारत की नाखुशी से ओबामा को अवगत कराते हुए इस संदर्भ में सईद और अल कायदा के नेता इलयास कश्मीरी का नाम लिया और कहा कि सईद सहित मुंबई हमले के कई साजिशकर्ता खुले घूम रहे हैं। मनमोहन ने आशा जताई कि अमेरिका सरकार उनके उठाए गए मुद्दों को अहमियत देगी।

इस बात से इनकार करते हुए कि उन्होंने ओबामा से पाकिस्तान की शिकायत की है मनमोहन ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों के बारे में बैठकों में जब भी कोई सवाल करता है तो उन्हें इस संबंध में भारत का दृष्टिकोण बताना पड़ता है, जो एक खुला रहस्य है।

मनमोहन सिंह ने कहा कि हम एक से ज्यादा बार कह चुके हैं कि पाकिस्तान मुंबई पर खौफनाक हमले की साजिश रचने वालों को कानून के दायरे में लाने के लिए ठोस कदम उठाए। पाकिस्तान से कम से कम हम यही चाहते हैं और अगर वह ऐसा करता है तो उनसे बातचीत करके और हमारे तमाम मसलों पर एक बार फिर बातचीत की शुरूआत करके हमें खुशी होगी।

यह बताए जाने पर कि पाकिस्तान मुंबई आतंकी हमले के संदर्भ में सात आतंकवादियों को कानून के घेरे में ले चुका है, प्रधानमंत्री ने कहा ऐसे और भी लोग हैं जिनका इस साजिश में नाम लिया गया है और वह खुले घूम रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यही हकीकत है और इस संदर्भ में तथ्य मौजूद हैं, जो सिर्फ हमारी गुप्तचर एजेंसियों ने ही नहीं बल्कि मित्र राष्ट्रों की गुप्तचर एजेंसियों द्वारा जुटाए गए हैं। हम चाहते हैं कि पाकिस्तान कम से कम इन लोगों को कानून के दायरे में लाए और कारगर ढंग से ऐसा करे।

मुंबई हमलों के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ समग्र वार्ता स्थगित कर दी थी और कहा था कि पाकिस्तान जब तक मुंबई हमलावरों को सजा नहीं देगा, बातचीत को दोबारा शुरू नहीं किया जाएगा। भारत को नुकसान पहुंचाने वाले सीमा पार आतंकवाद पर विचार करने के लिए भारत की पहल पर फरवरी में दोनो देशों के बीच विदेश सचिव स्तर की बातचीत हुई।

हालांकि भारत ने मुंबई हमलों की साजिश रचने वालों के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा ठोस कार्रवाई किए जाने तक समग्र वार्ता फिर शुरू होने की संभावना से इनकार किया है। मनमोहन सिंह परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए थे, जो बुधवार को समाप्त हो गया। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी के साथ दो बार संक्षिप्त बातचीत की।

इस महीने भूटान में होने वाली दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन की बैठक में गिलानी से मुलाकात के बारे में मनमोहन ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। एक सवाल के जवाब में सिंह ने कहा कि अंतत: भारत को अपनी समस्याओं का अंत खुद ही करना होगा।

यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उनसे कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम होना चाहिए, प्रधानमंत्री ने कहा,  मेरा मानना है कि दक्षिण एशिया के मामले सिर्फ सार्थक द्विपक्षीय वार्ता से ही सुलझाए जा सकते हैं और इसी तरह से सुलझाए जाने चाहिएं। मुझे नहीं लगता कि इसमें किसी बाहरी ताकत को कोई भूमिका निभाने की जरूरत है।

दक्षेस बैठक के दौरान गिलानी से मुलाकात के बारे में पूछे जाने पर मनमोहन ने कहा,  मुझे लगता है कि भूटान में मुलाकात के बारे में सोचने के लिए अभी समय है। जब हम वहां पहुंचेंगे तो इस बारे में सोचेंगे।

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