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नए विवाद में थरूर

दोनों ही देश के सबसे ज्यादा विवादास्पद लोगों में से हैं लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि दोनों एक साथ एक विवाद में फंसे हैं। शशि थरूर जबसे भारत आकर राजनीति में शामिल हुए हैं, तब से किसी न किसी विवाद में चर्चित होते रहे हैं। आईपीएल के कर्ताधर्ता ललित मोदी जब से आईपीएल शुरू हुआ है, तब से विवादों के साथ खेल रहे हैं। अब कोच्चि की आईपीएल टीम की मिल्कियत के मामले में दोनों आमने-सामने हैं।

आधुनिक संचार टेक्नॉलॉजी के युग में आमने-सामने भी ‘वर्च्युअल’ होता है, सो यह लड़ाई भी ट्विटर पर लड़ी जा रही है। इस विवाद में मुद्दे दो हैं, पहला यह कि शशि थरूर का कोच्चि आईपीएल टीम से क्या संबंध है? थरूर की करीबी मित्र सुनंदा पुष्कर को इस टीम की मिल्कियत की एक बड़ी हिस्सेदारी मुफ्त क्यों दी गई? 

दूसरा मुद्दा यह है कि मिल्कियत को लेकर सारी बातें विस्तार से ललित मोदी ने ट्विटर पर क्यों लिख दीं? ऐसा उन्होंने किसी और टीम के साथ नहीं किया, तो कोच्चि की टीम के बारे में ही यह सब बताने के पीछे उनका उद्देश्य क्या था? शशि थरूर एक जिम्मेदार पद पर हैं, वे विदेश राज्यमंत्री हैं और संयुक्त राष्ट्र में भी बड़े पद पर रहे हैं, ऐसे में वे जानते हैं कि राजनीति में और खासकर राजनय में एक-एक शब्द का, एक-एक छोटी-छोटी हरकत का बड़ा महत्व होता है।

लेकिन थरूर विदेश नीति या राजनयिक संबंधों में किसी महत्वपूर्ण पहल के लिए नहीं, अपने असावधान बयानों की वजह से चर्चा में हैं। संभव है कोच्चि की टीम के बारे में उनका पक्ष सही हो, लेकिन उन्हें यह जानना चाहिए था कि वे भारत सरकार में एक मंत्री हैं और किसी भी व्यावसायिक उपक्रम के साथ उनके रिश्ते से विवाद खड़ा हो सकता है।

यह सही है कि ललित मोदी ने ट्विटर पर यह उजागर करके गलत किया, लेकिन थरूर को पहले ही इस मामले में अपनी स्थिति से सरकार और जनता को अवगत करवा देना था। सुनंदा पुष्कर से उनका जो भी संबंध है, उसकी गरिमा भी तभी बनी रहेगी, जब वे किसी व्यावसायिक विवाद को बीच में नहीं आने देंगे।

ललित मोदी का आचरण इस प्रसंग में ही विवादास्पद नहीं है, वे लगातार विवादों में ही रहे हैं। बीसीसीआई आखिरकार देश के क्रिकेट का प्रतिनिधित्व करता है और इसलिए देश के प्रति उसकी जवाबदेही है। लेकिन आईपीएल में अरबों रुपए का खेल करके ललित मोदी इस तरह व्यवहार कर रहे हैं जैसे भारतीय क्रिकेट उनकी निजी मिल्कियत है।

उनका आचरण व्यावसायिक नैतिकता की कसौटी पर भी सही नहीं है और बीसीसीआई को उन्हें संयत आचरण और पारदर्शी कारोबार के लिए नियंत्रित करना चाहिए। ट्विटर और फेसबुक के युग में वैसे भी ज्यादा संयम की जरूरत है क्योंकि ये माध्यम ही कुछ ज्यादा अराजक हैं।

अब थरूर के एक अधिकारी इस ट्विटर युद्ध में कूद गए हैं और उन्होंने मोदी के खिलाफ कुछ पुराने आरोप खोद निकाले हैं। एक केन्द्रीय मंत्री और बीसीसीआई के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का व्यावसायिक हितों के इस युद्ध में इस स्तर पर लड़ना सार्वजनिक जीवन की दृष्टि से शोभनीय नहीं है। वरिष्ठ और समझदार लोगों को इस विवाद का निपटारा करने के लिए आगे आना चाहिए।

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  • Web Title:नए विवाद में थरूर