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सलामी देने में नहीं चली गोलियां

दंतेवाड़ा में नक्सलियों की गोलियों से शहीद पुलिकर्मियों को जब सलामी देने की बात आई तो पुलिस वालों की रायफलों ने उन्हें मुंह चिढ़ा दिया। मुंह चिढ़ाने की यह घटना मंगलवार को बनारस में भी दुहरायी गई। आए थे शहीदों को सलामी देने लेकिन बंदूकें थी कि चली ही नहीं। जलियांवाला बाग नरसंहार गोलीकांड के महानायक शहीद ऊधम सिंह की याद में मंगलवार की शाम छह बजे सलामी देते समय जवानों की रायफलों से गोलियां ही छिटक गई।

ऐन मौके पर भरी जनता के बीच पुलिस के जवानों की पोल खुल गई। किसी प्रकार पुलिस ने पहले पांच फिर 27 राउंड फायरिंग कर सलामी देकर अपनी इज्जत बचायी। समारोह स्थल पर मौजूद लोगों ने कहा कि जब शहीदों को सलामी लेते वक्त गोलियां नहीं चलतीं तो आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान क्या होगा?

अखिल भारतीय शहीद सरदार ऊधमसिंह स्मारक समिति की ओर से हर साल की तरह इस बार भी मंगलवार की शाम गिरजाघर चौमुहानी पर जालियांवाला बाग गोलीकांड के महानायक शहीद ऊधम सिंह की स्मृति में उनकी प्रतिमा स्थल के समीप शहीदी मेला का आयोजन किया गया था। यहां पर 32 फायरों की सलामी भी दी जाने वाली थी। सलामी देने के लिए पुलिस लाइन से दस जवान बुलाए गए थे, जो कार्यक्रम स्थल पर कुर्सियों पर ही जमे रहे।

कुछ दूरी पर चार घुड़सवार पुलिस के जवान भी घोड़ों पर रौब के साथ बैठे हुए थे। समारोह की अध्यक्षता मंगल सिंह कर रहे थे। पौने छह बजे सलामी का कार्यक्रम तय था। समारोह में डीआईजी डी.के. ठाकुर को आयोजकों ने बतौर मुख्य अतिथि बनाया था लेकिन काफी इंतजार के बाद वह नहीं आए।

5.40 बजे समिति के चेयरमैन व गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार सतनाम सिंह धुन्ना पहुंचे। पहले गुरुद्वारा से आए रागी जत्थे ने गुरुवाणी पेश की। इसके बाद मंच पर से कार्यक्रम संयोजक उदय नारायण सिंह ने 32 फायरों की सलामी देने की घोषणा की। सलामी सरदार सतनाम सिंह को लेनी थी। वह मंच से उतर कर आए उनके पीछे पांच-पांच पुलिस के जवान हाथों में रायफलें लिए हुए थे। दरोगा ने कमांड दिया..फायर। लेकिन यह क्या? गोलियां चली ही नहीं। पुलिस के जवान रायफलों को ठीक करते रहे। हड़बड़ी में सिर्फ पांच ही फायरिंग हो पायी। बंदूकों से गोलियां छिटक कर गिर पड़ीं।

32 राउंड फायर पूरी न होने पर मंच के लोगों के बीच सुगबुगाहट बढ़ गई। आखिरकार आर.आर. सिंह नामक पुलिस के जवान ने अपनी रायफल से अकेले 27 फायरिंग की। पुलिस वालों का कहना था कि बंदूकें ठीक न होने से तथा कारतूस पुराना होने से फायरिंग नहीं हुई।

उधर समिति के महासचिव नरेश रुपानी ने कहा कि 32 फायरों की एक साथ सलामी न होना शहीद ऊधमसिंह का अपमान है। इसकी जांच करायी जानी चाहिए। कार्यक्रम में विजय नारायण सिंह, डा. दयाशंकर मिश्र दयालु, हेड ग्रंथी सरदार सुखदेव सिंह, डा. शिवशंकर सिंह, श्रीकृष्ण सिंह, रामसूरत तिवारी, गोविंद बग्गा समेत काफी लोग मौजूद थे।

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