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किशोर को मिली बस स्टैंड पर पानी पिलाने की सजा

जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने एक बच्ची के साथ दुष्कर्म का प्रयास करने वाले किशोर को झज्जर बस स्टैंड पर पानी पिलाने की सजा सुनाई है। बस अड्डा इंचार्ज की देखरेख में वह एक साल तक यह सजा भुगतेगा। जस्टिस बोर्ड के प्रधान न्यायाधीश हरीश गुप्ता ने यह सजा सुनाई। सात मार्च 2002 को झज्जर के युवक रिशु ने पड़ोस में रहने वाली चार वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया था।

बालिका की दादी ने पुलिस को शिकायत में बताया था कि उनके परिवार के सदस्य बाहर थे तो तभी रिशु मौका पाकर उनके मकान में चला आया और उसने उसकी पौत्री के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। पुलिस ने रिशु के खिलाफ धारा 376 व 511 के तहत मामला दर्ज कर लिया।

घटना के समय रिशु नाबालिग था। सहायक जिला न्यायवादी किरण ने बोर्ड से कहा कि दुष्कर्म के आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। उसका अपराध गंभीर है। अगर उस पर रहम हुआ तो समाज में गलत संदेश जाएगा। बाद में केस जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में चला गया। बोर्ड ने अपना फैसला सुनाते हुए रिशु को दस हजार रुपये के मुचलके पर छोड़ दिया। साथ में उसको एक साल तक बस स्टैंड पर आने-जाने वाले यात्रियों को पानी पिलाने की सजा भी सुनाई।

रिशु ठीक से काम कर रहा है या नहीं इसकी रिपोर्ट बस अड्डा इंचार्ज बोर्ड को देगा। रिपोर्ट संतोषजनक न पाए जाने की सूरत में रिशु को बोर्ड आगे भी सजा सुना सकता है।

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