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कुरुक्षेत्र में लगाया जाम

सर्व खाप महापंचायत ने जहां खापों की निन्दा करने वालों को आड़े हाथों लिया वहीं समारोह के बाद कुछ प्रतिनिधियों ने सांकेतिक रूप से बिरला मंदिर चौक पर यातायात भी जाम किया। जाट धर्मशाला सभा के प्रधान रणजीत सिंह की अध्यक्षता में हुए इस महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र सिंह टिकैत, हरियाणा के पूर्व डी.जी.पी. महेंद्र सिंह मलिक, हरियाणा गौशाला संघ के अध्यक्ष व प्रसिद्ध आर्यसमाजी नेता आचार्य बलदेव, गठवाला खाप के दादा बलजीत सिंह, जाट सभा के राष्ट्रीय महासचिव युद्धवीर सिंह, भलेराम बैनीवाल, ओमप्रकाश धनखड़, संतोष दहिया, जसबीर मलिक, भरत सिंह बैनीवाल, महम चौबिसी के प्रतिनिधियों सहित अनेक खापों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

भारी शोरगुल व अव्यवस्था के बीच लगभग तीन घंटे चलने वाले इस सम्मेलन में अधिकतर वक्ताओं ने खापों के फैसलों की निंदा करने वाले संगठनों और मीडिया को आड़े हाथों लिया। मनोज-बबली हत्याकांड में पांच लोगों को फांसी और दो लोगों को उम्र कैद का मुद्दा समारोह में छाया रहा। जाट महासभा के राष्ट्रीय महासचिव युद्धवीर सिंह ने तो खुले शब्दों में कहा कि मनोज-बबली हत्याकांड एक शुरुआत है। जब भी कोई समगोत्री शादी होगी, उनका भी हश्र मनोज-बबली जैसा ही होगा।

उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब अशोक मदीना नामक युवक ने गठवाला खाप के दादा बलजीत सिंह पर कुछ आरोप लगा दिए। हंगाम इतना अधिक बढ़ गया कि महेंद्र सिंह टिकैत को माइक संभाल कर लोगों को शांत कराना पड़ा। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि कुछ लोग षड्यंत्र रच कर खापों को बदनाम कर रहे हैं, जबकि आज तक किसी भी खाप ने किसी भी व्यक्ति को कोई शारीरिक दंड नहीं दिया। मृत्यु दंड देना तो बहुत दूर की बात है। खापों की परंपरा और मर्यादाओं को न जानने वाले लोग उनके फैसलों को तालिबानी व तुगलकी कहकर इन संस्थाओं का अपमान कर रहे हैं जबकि खापों का गौरवशाली इतिहास रहा है।

महेंद्र सिंह टिकैत ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम में संशोधन अनिवार्य है। इसके लिए सभी को संगठित होकर संघर्ष करना पड़ेगा। मनोज-बबली हत्याकांड के दोषियों को सजा सुनाने की कड़ी निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि एक ही गौत्र में शादी करने वाले प्रेमी युगल नहीं हो सकते। पूर्व पुलिस महानिदेशक महेंद्र सिंह मलिक ने कहा कि खाप व पंचायतों का इतिहास तीन हजार वर्ष पुराना है।

उन्होंने सरकार व मीडिया को चेतावनी देते हुए कहा कि सामाजिक पंरपराओं को तोड़ने की जो कोशिश करता है, उसका हश्न बुरा होता है। मलिक ने कहा कि हिंदू मैरिज एक्ट 1955 हमारी मर्यादाओं के खिलाफ है। इसमें संशोधन के लिए हमें कई मोर्चों पर लड़ना पड़ेगा। मलिक ने कहा कि खापों को निर्णय लेते समय महिलाओं और युवाओं को भी उसमें भागीदारी बनाना चाहिए।

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