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पीवीडी

पीवीडी यानी पेरिफेरल वैस्कुलर डिसीज़ से मतलब है हाथ-पाँवों की रक्तवाहिकाओं के तंग होने की वजह से खून की आवाजाही कम हो जाना। मधुमेह और धूम्रपान इसकी अहम वजहें हैं। इस रोग का जोखिम बढ़ाने वाले जो खास कारण हैं उनमें हाइपरटेंशन, हाई कॉलैस्ट्रॉल, मोटापा और निष्क्रिय जीवनशैली शामिल हैं। इस रोग में रक्त धमनियों की भीतरी दीवारों पर वसा जम जाती है। ये हाथ पाँवों के ऊतकों में रक्त के प्रवाह को रोकता है।

इस रोग के प्राथमिक चरण में चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर पैरों और कूल्हों में थकान या दर्द महसूस होता है। अन्य लक्षण होते हैं दर्द, सुन्न होना, पैर की पेशियों में भारीपन। शारीरिक काम करते समय मांसपेशियों को अधिक रक्त प्रवाह चाहिए होता है। यदि नसें तंग हो जाएं तो पेशियों को पर्याप्त खून नहीं मिलता। आराम के वक्त रक्त प्रवाह की उतनी आवश्यकता नहीं होती इसलिए बैठ जाने से दर्द भी चला जाता है।

शुरु में मरीज़ शारीरिक श्रम के वक्त दर्द की शिकायत करते हैं। फिर जैसे जैसे मर्ज बढ़ता जाता है मरीज़ को आराम के समय भी दर्द रहने लगता है। रिसर्च के मुताबिक फाइबरयुक्त भोजन शुरु करने से कार्डियोवैस्कुलर खतरे में 10 प्रतिशत की कमी आती है। जिन मरीज़ों में पीवीडी होने का पता लग चुका है उनको शारीरिक रूप से ज्यादा सक्रिय होना पड़ेगा तभी उनकी सेहत सुधरेगी।

नियमित रूप से त्वचा व पैरों की देखभाल अहम है ताकि इस रोग से बचा जा सके। मरीज़ को चाहिए की रोज़ाना अपने पाँवो की जांच करें कि उनमें कोई खरोंच, कटना-फटना, ज़ख्म जैसी समस्या तो नहीं है। पैरों को गुनगुने पानी में धोना चाहिए उन्हें नरम साबुन से साफ कर अच्छी तरह सुखाना चाहिए।

- धूम्रपान कम करें। रोजाना व्यायाम करें।
- कम-फैट और कम कोलेस्ट्रॉल वाले भोजन का सेवन करें। रक्त चाप पर नियंत्रण रखें।

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