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न्यायमूर्ति दिनाकरण पर महाभियोग दलितों पर अत्याचारः विनीत नारायण

वरिष्ठ पत्रकार विनीत नारायण ने कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पी.डी. दिनाकरण पर संसद में शुरू किए गए महाभियोग को दलितों पर सवर्णो का अत्याचार बताया है। श्री नारायण ने मंगलवार को यहाँ संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि मेरा उद्देश्य भ्रष्टाचार के आरोपी किसी जज को बचाना नहीं है बल्कि यह मूलभूत सवाल खड़े करना है कि एक अपराध के दो मापदण्ड इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार नहीं किए जा सकते।

दिनाकरण के मामले में तो अभी भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध होने हैं लेकिन इसके पहले भी कई न्यायाधीशों के खिलाफ भ्रष्टाचार के सभी आरोपों के प्रमाण मौजूद थे, लेकिन उस समय उनके खिलाफ महाभियोग क्यों नहीं चलाया गया ? सांसदों ने इस प्रस्ताव का समर्थन क्यों नहीं किया? उन्होंने कहा कि एनडीए की सरकार के कार्यकाल में सुप्रीमकोर्ट के दो न्यायाधीशों के खिलाफ उस समय भ्रष्टाचार के आरोप प्रकाशित हो चुके थे लेकिन तत्कालीन भाजपा नीत सरकार ने उनके खिलाफ महाभियोग नहीं चलाया।

हाल में हरियाणा हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश को घूस लेते पकड़ा गया, उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव नहीं लाया गया। आखिर न्यायमूर्ति दिनाकरण के खिलाफ यह प्रस्ताव क्यों ? क्या इसलिए कि वे दलित वर्ग से हैं और अब तक जितने भी न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार के मामले सामने आये, वे सभी सवर्ण थे? महाभियोग चलाने वाले सांसदों के पास इस बात का क्या जवाब है ? श्री नारायण ने दलितों के हक के लिए लड़ने वाली बसपा की मुखिया और यूपी की मुख्यमंत्री मायावती से इस मामले में कड़े तेवर अपनाने की अपील की है।

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  • Web Title:न्यायमूर्ति दिनाकरण पर महाभियोग दलितों पर अत्याचारः विनीत नारायण