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होटल मैनेजमेंट मेहमान नवाजी से जीतें बाजी

होटल इंडस्ट्री सीधे तौर पर पर्यटन से जुड़ी है, परन्तु पर्यटकों का आना ही काफी नहीं होता, उन्हें मिलने वाली सुविधाएं भी काफी महत्त्वपूर्ण होती हैं। उनकी गुणवत्ता के आधार पर ही पर्यटकों को इस ओर आकर्षित किया जा सकता है। इसके अलावा बढ़ते औद्योगीकरण ने भी होटल व्यवसाय को तेजी से बढ़ाने में मदद की है। 

उदारीकरण के विस्तार में यह निश्चित है कि अर्थव्यवस्था की मजबूती इस क्षेत्र को भी नई ऊंचाइयां देगी।
पर्यटन और होटल इंडस्ट्री की जुगलबंदी से न सिर्फ देश में, बल्कि विदेश में भी रोजगार के बेशुमार अवसर सामने आ रहे हैं। कॉमनवेल्थ खेल सिर पर हैं। भारत की होटल इंडस्ट्री के लिए इसे स्वर्ण युग ही कहा जाएगा और इसमें करियर बनाने वालों के लिए यह अपार संभावनाओं का समय है।

यह ग्लैमर से भरपूर ऐसा पेशा है, जिसमें अच्छे व प्रशिक्षित लोगों की फिलहाल कमी है। कहने को तो अन्य क्षेत्रों की भांति इसमें भी रोजगार तलाशने वालों की कमी नहीं है, किन्तु ऐसे लोगों की कमी है, जो इस पेशे के लिए जरूरी योग्यताओं पर खरे उतरते हों।

भारत में बढ़ रही व्यावसायिक गतिविधियों का आलम यह है कि यहां के होटलों में कमरे खाली नहीं मिलते। एशिया प्रशांत क्षेत्र में होटल इंडस्ट्री के विकास के मामले में भारत का नम्बर चीन के बाद दूसरा है। एक अनुमान के अनुसार भारत में होटलों में 1,10,000 से भी अधिक कमरे हैं।

पर्यटन मंत्रालय के मुताबिक पिछले साल 41 लाख विदेशी पर्यटक भारत आए और इस साल के रुझान और कॉमनवेल्थ खेलों को देखते हुए लगता है कि यह संख्या एक करोड़ को भी पार कर जाएगी। देशी भ्रमणकारियों की भी बड़ी संख्या है। वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल, भारत के आंकड़े कहते हैं कि बिजनेस ट्रैवल के मामले में भारत का स्थान 18वां है और इस दशक में इसके पांचवें स्थान पर पहुंचने की उम्मीद है। इन बातों के आईने में यह साफ नजर आता है कि होटल मैनेजमेंट कोर्स करके इस क्षेत्र में करियर बनाना एक समझदारी भरा निर्णय हो सकता है।

व्यक्तिगत गुण
इस पेशे में रुचि रखने वालों के लिए सबसे जरूरी तो यह है कि उनका व्यक्तित्व आकर्षक हो। उनमें ऐसी बात हो कि उससे उनका दोस्ताना रवैया झलके। उनके करीब आते ही सामने वाला इस बात के लिए न हिचके कि वह उनसे मदद मांगे कि नहीं। व्यक्ति ऐसे होने चाहिए कि उनसे शालीन खुलेपन की सुगंध आए। वे अपनी जिम्मेदारियों को समझें, न कि टालमटोल और दूसरों पर डालने की प्रवृत्ति के मारे हों।

काम को मिलजुल कर करने का हौसला रखते हों तो क्या कहने। किसी भी मसले पर तरतीब से सोचने की क्षमता हो और प्रशासनिक दक्षता भरपूर हो। इनके अलावा स्वस्थ हों और किसी भी समय कार्य करने के लिए तत्पर हों। आत्म-विश्वास और हर काम की बारीकियों को समझने और उसे अपेक्षानुसार करने का गांभीर्य भी होना चाहिए उन सबमें, जो इस स्वागत सत्कार के संसार में अपनी पहचान बनाने की हिम्मत रखते हों।

बताने की जरूरत नहीं कि होटल में आने वाला हर गेस्ट खास होता है। लिहाजा उसकी हर बात को गंभीरता से लेना होता है और उसे समझदारी से संभालना होता है। काम के दबाव में भी आपके चेहरे पर मुस्कान होनी चाहिए, ऐसा इंडस्ट्री के पंडित कहते हैं। यदि ऐसा कुछ आप में है तो कोई वजह नहीं कि कोई आपको नकार दे।

होटल इंडस्ट्री में कैसा काम
होटल इंडस्ट्री में बतौर प्रशिक्षु कार्य करने से लेकर प्रबंधक बनने तक अनुभव व कार्य कौशल के कई चरणों से होकर गुजरना होता है। यह उम्मीदवार को तय करना पड़ता है कि किस विभाग के कार्य में उसकी विशेष रुचि है और आने वाले समय में उसका लक्ष्य क्या है। यह उसकी व्यक्तिगत योग्यता और व्यक्तित्व पर निर्भर करेगा कि उसे कैसा अवसर मिल पाता है। वैसे किसी भी होटल में प्रबंधक व तमाम विभागों की अलग-अलग जिम्मेदारियां होती हैं। कुछ पर नजर डालते हैं:

प्रबंधक
होटल के प्रबंधक इस बात के लिए जिम्मेदार होते हैं कि उनका होटल सुचारू रूप से चले और लाभ कमाए। महाप्रबंधक तो इस बारे में अपनी योग्यता का इस्तेमाल करते हैं कि वित्त की स्थिति ठीक रहे, कर्मचारी अतिथियों को स्तरीय सेवा प्रदान करने के साथ-साथ संस्थान के नियमों का भी पालन करें, हाउसकीपिंग ठीक हो, खाने का स्वाद व क्वालिटी ठीक हो, होटल की आंतरिक साज-सज्जा उच्च कोटि की हो इत्यादि। अलग-अलग विभागों के सहायक प्रबंधक अपने विभागों के कार्य पर निगरानी रखते हैं। बड़े होटलों में तो रेजिडेंट मैनेजर भी होते हैं।

फ्रंट ऑफिस
फ्रंट ऑफिस में बैठने वाले कर्मचारी होटल में आने वाले अतिथियों का स्वागत करते हैं। यहां रिसेप्शन होता है, सूचना डेस्क होता है, अतिथियों के लिए आरक्षण की व्यवस्था देखने वाले होते हैं और बेलकैप्टन, बेल बॉय और डोरमैन होते हैं। ये लोग अतिथियों का सामान उनके कमरे में पहुंचवाने से लेकर उनको सूचनाएं भिजवाने का कार्य करते हैं।

फूड एंड बेवरेज (एफ एंड बी)
इस विभाग में तीन ईकाइयां होती हैं- पाकशाला यानी किचन, स्टीवर्ड विभाग और फूड सर्विस विभाग। इस विभाग के मैनेजर और कर्मचारी मिल कर इस विभाग की जिम्मेदारियों को निपटाते हैं। खाना बनाने से लेकर परोसने तक का काम यहां होता है। इससे जुड़ी हर चीज का रख-रखाव करना होता है।

हाउसकीपिंग
किसी भी होटल को उम्दा किस्म की देखभाल की जरूरत होती है। हाउसकीपिंग विभाग सभी कमरों, मीटिंग हॉल, बैंक्वेट हॉल, लाउंज, लॉबी, रेस्तरां इत्यादि की साफ-सफाई की जिम्मेदारी उठाता है। हर चीज करीने से दिखनी चाहिए, यह इस विभाग के काम करने का मूलमंत्र है। यह होटल का बेहद महत्त्वपूर्ण विभाग है और 24 घंटे काम करता है। इसमें पालियों में काम होता है।

मार्केटिंग विभाग
आज होटल में उपलब्ध सेवाओं व सुविधाओं की मार्केटिंग होटल मैनेजमेंट का अहम पहलू है। यह विभाग संभावित ग्राहकों की जरूरतों के लिहाज से पैकेज तैयार करता है और उन्हें बेचता है। इनकी काबिलियत का ही प्रत्यक्ष लाभ होटल को मिलता है। बेहतर पैकेजिंग से आकर्षित होकर जितने ग्राहक आते हैं, वे होटल को न सिर्फ बिजनेस देते हैं, बल्कि दूसरों को भी बताते हैं।इन सबके अलावा होटल में भी अन्य वे विभाग होते हैं, जो दूसरे संगठनों या कंपनियों में होते हैं, जैसे अकाउंट्स, सिक्योरिटी, मेंटेनेंस इत्यादि।

अब आपको तय करना है कि एक कामयाब करियर होटल मैनेजमेंट की चुनौतियों को स्वीकार करना है कि नहीं। इंडस्ट्री तो अपनी जरूरतों के हिसाब से प्रशिक्षित लोगों को अवसर देने के लिए तैयार है।

तैयारी
संयुक्त प्रवेश परीक्षा में 5 विषय होते हैं, जिनमें से 4 में 30-30 सवाल आते हैं और अंग्रेजी में 80 सवाल पूछे जाते हैं। कुल 120 सवाल पूछे जाते हैं और उत्तर देने के लिए तीन घंटे का समय मिलता है। विषय हैं :
-न्यूमेरिकल एबिलिटी एंड साइंटिफिक एप्टीटय़ूड
-रिजनिंग एंड लॉजिकल डिडक्शन
-जनरल नॉलेज एंड करंट अफेयर्स
-इंग्लिश लैंग्वेज
-एप्टीटय़ूड फॉर सर्विस सेक्टर

पढ़ाई व प्रशिक्षण
अब सवाल यही उठता है कि होटल इंडस्ट्री में काम करने के लिए कहां से क्या पढ़ा जाए तथा कैसा प्रशिक्षण प्राप्त किया जाए? इस विषय में पढ़ाई करने के लिए सर्टिफिकेट कोर्स से लेकर पीजी कोर्स तक उपलब्ध हैं, जिन्हें अलग-अलग संस्थान कराते हैं। होटल मैनेजमेंट कोर्स कराने वाले सरकारी संस्थान हैं और निजी संस्थान भी।

सरकारी संस्थानों में अभ्यर्थी संयुक्त प्रवेश परीक्षा के माध्यम से दाखिला लेते हैं और निजी संस्थानों में साक्षात्कार व अंक प्रतिशत के आधार पर चयन किया जाता है। निजी संस्थानों में दाखिले के लिए अभ्यर्थी को अपनी सुविधा और सामर्थ्य के मुताबिक संस्थान का चयन करना चाहिए।

दोनों को तुलनात्मक दृष्टि से परखने की बात पर एलबीआईआईएचएम, पीतमपुरा, दिल्ली के निदेशक सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी कमल कुमार का कहना है कि सरकारी संस्थान बुनियादी सुविधाओं के मामले में तो बेहतर हो सकते हैं, किन्तु उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कोई तरीका नहीं है। फिर भी सरकारी तंत्र के अपने लाभ हैं। बहरहाल, निम्न पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं :

-बेकरी एंड कन्फेक्शनरी/होटल रिसेप्शन एंड बुक कीपिंग/रेस्तरां एंड काउंटर सर्विस में एक वर्षीय डिप्लोमा
-होटल मैनेजमेंट में तीन वर्षीय डिप्लोमा
-होटल मैनेजमेंट एंड केटरिंग टेक्नोलॉजी में चार वर्षीय स्नातक डिग्री
-होटल मैनेजमेंट में तीन वर्षीय बीएससी
-हॉस्पिटेलिटी एंड टूरिज्म मैनेजमेंट में तीन वर्षीय बीए
-इंटरनेशनल होटल्स में दो साल का पीजी डिप्लोमा
-हॉस्पिटेलिटी एडमिनिस्ट्रेशन में दो साल की एमएससी
-होटल एंड केटरिंग मैनेजमेंट में छह महीने का सर्टिफिकेट कोर्स

योग्यता
इन पाठ्यक्रमों को करने के लिए किसी भी मान्यताप्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय से10वीं/12वीं या स्नातक होना जरूरी है। 12वीं में अंग्रेजी एक अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ी होनी चाहिए।

परामर्श
अशोक सिंह, करियर काउंसलर

बीएचएम और बीएससी (होटल मैनेजमेंट) में से कौन-सा कोर्स करियर की दृष्टि से ज्यादा उपयोगी कहा जा सकता है?
अभिनव, नजफगढ़, दिल्ली
देश में होटल मैनेजमेंट की शिक्षा का दायित्व नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी पर है। काउंसिल की स्थापना 1982 में केंद्रीय पर्यटन मंत्रलय के अंतर्गत की गई थी। देश में बीएससी (हॉस्पिटेलिटी एंड होटल एडमिनिस्ट्रेशन) का तीन वर्षीय अवधि का डिग्री कोर्स काउंसिल और इग्नू द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जा रहा है। इनके तत्वावधान में होटल मैनेजमेंट के 21 केंद्रीय संस्थान, 7 प्रदेश संस्थान तथा 7 निजी होटल प्रबंधन संस्थान हैं। इनकी 5700 सीटों के लिए अखिल भारतीय स्तर पर संयुक्त चयन परीक्षा का आयोजन प्रति वर्ष किया जाता है, जबकि बीएचएम कोर्स का आयोजन प्रति वर्ष किया जाता है। महत्त्व, रोजगार और उपयोगिता की दृष्टि से नि:संदेह काउंसिल द्वारा बीएससी (हॉस्पिटेलिटी एंड होटल एडमिनिस्ट्रेशन) को प्राथमिकता देना गलत नहीं कहा जा सकता।

दिल्ली में होटल मैनेजमेंट की शिक्षा किन संस्थानों से हासिल की जा सकती है?
कंवर खान, सागरपुर, दिल्ली
होटल मैनेजमेंट की शिक्षा के लिए आप सरकारी ट्रेनिंग संस्थानों में निम्न से संपर्क कर सकते हैं :
-नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी, लाइब्रेरी एवन्यू, पूसा कॉम्पलेक्स, नई दिल्ली-110012
-इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, मैदान गढ़ी, नई दिल्ली
-गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, कश्मीरी गेट, दिल्ली-110047
इनमें से प्रत्येक के दाखिले की प्रक्रिया चालू है। अधिक एवं विस्तृत जानकारी के लिए संबंधित वेबसाइट देख सकते हैं।

देश में होटल मैनेजमेंट की शिक्षा देने वाला टॉप इंस्टीटय़ूट कौन-सा है। कृपया इसके एडमिशन की प्रक्रिया के बारे में बताएं।
संदीप शर्मा, गाजियाबाद
जैसा कि पहले प्रश्न में भी यह जानकारी दी गई है कि केन्द्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी द्वारा ही देश भर में होटल मैनेजमेंट ट्रेनिंग का दायित्व वहन किया जाता है। इसके अंतर्गत विभिन्न संस्थान देश के प्रमुख शहरों में स्थित हैं, जिनके विभिन्न कोर्सेज में दाखिले संयुक्त चयन परीक्षा के आधार पर दिए जाते हैं। इसमें 10+2 पास युवा (सभी स्ट्रीम) शामिल हो सकते हैं। इसकी लिखित परीक्षा का पैटर्न इस प्रकार से होता है। परीक्षा की अवधि तीन घंटे की होती है और इसमें न्यूमेरिकल एबिलिटी एंड साइंटिफिक एप्टीट्यूड (30 प्रश्न) रीजनिंग एंड लॉजिकल डिडक्शन (30 प्रश्न), जनरल नॉलेज एंड करंट अफेयर्स (30 प्रश्न), इंग्लिश लैंग्वेज (20 प्रश्न) तथा एप्टीट्यूड और सर्विस सैक्टर (20 प्रश्न) शामिल होते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 29 मार्च थी और परीक्षा 8 मई से आयोजित की जाएगी।

होटल मैनेजमेंट में करियर निर्माण के किस प्रकार के विकल्प हैं?
निशा, रामपुरा, दिल्ली
होटल मैनेजमेंट के कोर्स के बाद आपके लिए निरंतर तेजी से बढ़ रहे टूरिज्म के क्षेत्र में तमाम तरह की करियर संभावनाएं हो सकती हैं। इनमें गैस्ट/कस्टमर रिलेशन एग्जीक्यूटिव/फ्रंट ऑफिस, किचन मैनेजमेंट/शेफ, फास्ट फूड चेन में एक्जीक्यूटिव, कैटरिंग सर्विस, फूड एंड इंडस्ट्री, एयर लाइन में फ्लोर केबिन क्रू, क्लबों और ईवेंट मैंनेजमेंट कंपनियों में होटल ट्रेड मार्केटिंग एंड ब्रांड प्रमोशन विभागों में, टूर ऑपरेटर कंपनियों, हाउस कीपिंग विभागों आदि का खासतौर से उल्लेख किया जा सकता है। इसके अलावा सैल्फ एम्प्लॉयमेंट और सीनियर होटल मैनेजमेंट संस्थानों में भी विकल्प हैं।


एक्सपर्ट व्यू
बलराम गौतम, विभागाध्यक्ष, एफ एंड बी सर्विसेज, इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, केटरिंग एंड न्यूट्रीशन, पूसा, नई दिल्ली
होटल मैनेजमेंट की फील्ड में इतना बदलाव आया है कि इसका पूरा चेहरा बदल गया है। एक समय था, जब इसे अच्छा ट्रेड नहीं माना जाता था, लेकिन आज समाज की सोच इसे लेकर बदली है। इससे ग्लैमर आ जुड़ा है। बेहतर पे-पैकेज मिलने लगे हैं। मैनेजमेंट ट्रेनी लगते ही 18-20,000 रुपये मिलने लगते हैं। अब उच्च-मध्य वर्ग व इससे ऊपर की हैसियत वाले परिवार के बच्चे इसमें आने लगे हैं, क्योंकि इसकी पढ़ाई का खर्चा भी कम नहीं है। कोर्स पूरा होते-होते तकरीबन 5-6 लाख खर्च हो जाते हैं। इसमें वे छात्र तो आते ही हैं, जिन्हें नौकरी के सहारे आगे बढ़ना है, बल्कि वे भी आते हैं, जिनका परिवार किसी न किसी रूप में इससे जुड़ा है।

सरकारी संस्थानों में तो एजुकेशन लोन लेकर कोई नहीं पढ़ता। हां, निजी संस्थानों में इसकी व्यवस्था है। आरक्षित श्रेणी के बच्चों को तो संबंधित राज्य सरकारें स्पॉन्सर कर देती हैं, लेकिन ऐसे अप्रवासी भारतीय भी हैं, जो स्पॉन्सर करते हैं। लेकिन यह फील्ड सबके लिए आसान नहीं है। इसमें उन्हीं लोगों को आना चाहिए, जिनमें इसके लायक गुण हों।

वैसे तो हर क्षेत्र के लिए यह सही है, लेकिन इसमें अधिक ध्यान इसलिए देना होता है, क्योंकि यह हॉस्पिटेलिटी का मामला है। आकर्षक व्यक्तित्व तो होना ही चाहिए, इसके अलावा अंग्रेजी में बातचीत करने का सौम्य व सहज अंदाज भी होना चाहिए। यहां सबसे खास बात यह है कि गेस्ट को हैंडल करना होता है। उसकी संतुष्टि हमारा पहला लक्ष्य होता है। इसके लिए हर परिस्थिति को संभालने का हुनर आप में नहीं है तो बात नहीं बनेगी। फिर आप पूरी तरह इसी ट्रेड के लिए बने हैं, ऐसा साबित करना होता है।

होटल मैनेजमेंट कोर्स का जहां तक सवाल है तो वह एक समग्र कोर्स है। इससे होकर गुजरने के बाद कोई किसी भी विभाग में काम कर सकता है। अभी किसी विभाग की स्पेशलाइजेशन की व्यवस्था तो नहीं है, लेकिन इस पर विचार हो रहा है। अब काउंसिल ने सेमेस्टर सिस्टम लागू कर दिया है, जिसमें पहले व दूसरे सत्र का तो सिलेबस बन गया है, आगे का तैयार हो रहा है। संभवत: आखिरी साल में स्पेशलाइजेशन की बात हो।

वैसे फूड प्रोडक्शन, फूड एंड बेवरेजेज सर्विस, फ्रंट ऑफिस, एकोमोडेशन ऑपरेशन, कंप्यूटर एप्लिकेशन, होटल इंजीनियरिंग, प्रिंसिपल्स ऑफ फूड साइंस, न्यूट्रीशन, एकाउंटेंसी, कम्युनिकेशन इत्यादि विषयों को पढ़ाया जाता है, जिससे विद्यार्थी को इस इंडस्ट्री की कम्पलीट समझ हो जाए और वह हॉस्पिटेलिटी सेक्टर के किसी भी क्षेत्र में अपने हुनर का इस्तेमाल कर सके।

होटल मैनेजमेंट चुनने वालों को मेरी सलाह यह है कि पहले अच्छी तरह सोच लें, काउंसलिंग करा लें, अपनी ताकत व कमजोरियों को समझ लें, उसके बाद ही इधर कदम बढ़ाएं, क्योंकि बाद में दिक्कत होती है। कई ऐसे छात्र मुझे मिले, जो होटल मैनेजमेंट के अनुशासन व मेहनत के सांचे में फिट नहीं बैठ रहे थे, इसलिए सोच-समझ कर काम करें।

रहा इस फील्ड में नौकरी का सवाल तो तकरीबन 90 प्रतिशत छात्र यहां नौकरी पा जाते हैं। कुछ विदेश चले जाते हैं। इसलिए मैं तो कहूंगा कि इस फील्ड में अवसरों की कमी नहीं है और इसमें बढ़ोतरी ही होगी।

प्रमुख संस्थान
नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी

कोर्स : बीएससी प्रोग्राम इन हॉस्पिटेलिटी एंड होटल एडमिनिस्ट्रेशन (तीन वर्षीय)। इसमें प्रवेश के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई-2010) में बैठना होगा, जो 08 मई, 2010 में होगी।

योग्यता : 12वीं पास होना जरूरी है तथा इंग्लिश अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ी होनी चाहिए।
पता : लाइब्रेरी एवेन्यू, पूसा कॉम्प्लेक्स, नई दिल्ली-110012

अन्य प्रमुख संस्थान
-गुरु गोविन्द सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली
-दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली
-लक्ष्य भारती इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल होटल मैनेजमेंट, दिल्ली
-बनारसीदास चांदीवाला इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट एंड केटरिंग टेक्नोलॉजी,
-नैम इंस्टीटय़ूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज
-पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी

कोचिंग संस्थान
-दिल्ली पब्लिक कॉलेज ऑफ कम्पीटीशन्स, ईस्ट ऑफ कैलाश, नई दिल्ली
-मेरा पाथ अकादमी, जनकपुरी, दिल्ली
-अकादमी फॉर होटल मैनेजमेंट, मोती बाग, नई दिल्ली

स्कॉलरशिप
होटल मैनेजमेंट कोर्स से संबंधित कोई विशेष स्कॉलरशिप ऑफर नहीं की जाती। हां, कुछ कॉलेज व संस्थान अपने स्तर पर अवश्य स्कॉलरशिप या अवॉर्ड की घोषणा करते हैं, जिनकी शर्ते भी अलग-अलग संस्थानों में अलग-अलग ही होती हैं। ऐसी स्कॉलरशिप तभी मिलती हैं, जब छात्र उन्हीं संस्थानों में एडमिशन लेते हैं।

एजुकेशन लोन
बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स सहित कई बैंक लोन उपलब्ध कराते हैं। इसके संस्थान तथा कोर्स केंद्र सरकार या राज्य सरकार या यूजीसी या एआईसीटीई से मान्यताप्राप्त होने चाहिएं। अभ्यर्थी भारत का नागरिक होना चाहिए तथा इस पाठ्यक्रम में दाखिला मिला होना चाहिए। इसमें उसे संस्थान की फीस, हॉस्टल फीस, परीक्षा की फीस देने व कंप्यूटर इत्यादि खरीदने के लिए लोन दिया जाता है।

नौकरी के अवसर
होटल मैनेजमेंट कोर्स करने वालों के लिए कई विकल्प हैं- 
-होटल एवं हॉस्पिटेलिटी उद्योग में मैनेजमेंट प्रशिक्षु।
-होटलों में किचन मैनेजमेंट या हाउसकीपिंग मैनेजमेंट।
-एयरलाइन केटरिंग एंड केबिन सर्विसेज।
-होटल एवं अन्य सर्विस सेक्टर में गेस्ट या कस्टमर रिलेशन एक्जिक्यूटिव।
-फास्ट फूड चेन। ल्लरिसोर्ट मैनेजमेंट।
-क्रूज शिप होटल मैनेजमेंट, ल्लगेस्ट हाउसेज।
-हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन एंड केटरिंग।
-रेलवे या बैंक या बड़े संस्थानों में केटरिंग या कैंटीन।
-स्वरोजगार

वेतन
कोर्स पूरा करने के बाद नौकरी के तमाम अवसर हैं, जिनमें अपनी रुचि और दक्षता के आधार पर करियर बनाया जा सकता है। इनमें शुरुआती स्तर पर 12,000 रुपये से लेकर 15,000 रुपये तक का स्टाइपेंड मिलता है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद नियमित नौकरी मिल सकती है। जैसे-जैसे अनुभव बढ़ेगा और कुशलता आएगी, वेतन उसी अनुपात में बढ़ता जाएगा, जो लाखों में भी हो सकता है।

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