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सेंट्रल रोड फंड के नियमों में बदलाव

सेंट्र्ल रोड फंड (सीआरएफ) के नियमों में बदलाव से राजमार्गो के निर्माण की प्रक्रिया कुछ लंबी होगी। इससे अब राजमार्गो के निर्माण कार्य में पहले से कुछ अधिक समय लगेगा। पर सड़क निर्माण के कार्यो पर केंद्र सरकार के स्तर से नजर रखने से उसकी गुणवत्ता में और सुधार की उम्मीद की जा रही है।

राज्य में एक दजर्न से अधिक राजमार्ग हैं। इनके निर्माण और मरम्मत कार्यो के लिए वर्तमान में प्रदेश सरकार के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार राज्य को बजट देती है। उसके बाद ही लोक निर्माण विभाग में खोले गए राष्ट्रीय राजमार्ग विंग के जरिए इन सड़कों के निर्माण, चौड़ीकरण और मरम्मत का कार्य किया जाता है। पर अब केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रलय ने राजमार्गो का कार्य भी सीधे अपने हाथ में ले लिया है। इसके लिए केंद्र से मिलने वाले फंड नियमों में बदलाव किया गया है।

अब राजमार्ग के निर्माण की लागत, टेंडर प्रक्रिया और तकनीकि रिपोर्ट मंत्रलय स्तर पर होगा। जबकि वर्तमान में यह कार्य राज्य पीडब्ल्यूडी करता है। नए नियम के मुताबिक अब कौन सी सड़क पहले बननी है इसका चयन भी राज्य नहीं केंद्रीय राजमार्ग मंत्रलय करेगा। 

लोक निर्माण सचिव उत्पल कुमार सिंह का कहना है कि सेंट्रल फंड नियमों में बदलाव का राजमार्गो के निर्माण पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। राजमार्गो की मरम्मत इत्यादि कार्य के लिए राज्य सरकार की संस्तुतियों के साथ केंद्र को प्रस्ताव भेजा जाता है। केंद्रीय राजमार्ग मंत्रलय स्तर पर तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक दृष्टि से परीक्षण के बाद ही इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है। योजनाओं के मानक निर्धारित हैं। उन्हीं मानकों के अनुसार प्रस्ताव भेजा जाता है। मानक के विपरीत यदि प्रस्ताव भेजते हैं तो केंद्र उसे रिजेक्ट कर देती है।

कुछ योजनाओं में राज्य सरकार बजट में व्यवस्था करती है।  अधीक्षण अभियंता वीके त्रेहन का कहना है कि फंड नियमों में बदलाव के फलस्वरूप राजमार्ग के निर्माण या मरम्मत कार्य की लागत व टेंडर प्रक्रिया के निर्धारण भी केंद्रीय स्तर पर होने की वजह से अब प्रक्रिया जरूर पहले से लंबी होगी।

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