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बैंक पीओ सपनों का फिक्स्ड डिपॉजिट

बैंकिंग सेक्टर शुरू से ही युवाओं के लिए रोजगार प्रदाता के रूप में पहचाना जाता रहा है। आजकल यह सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। मैकिन्स की रिपोर्ट ‘इंडिया बैंकिंग 2010’ की मानें तो भारत में बैंकिंग सेक्टर 2001 से ही 51 प्रतिशत की वार्षिक दर से विकास कर रहा है। 7,500 बिलियन (लगभग 7,500 अरब) के बाजार पर स्थापित हो चुका यह सेक्टर 7.7 प्रतिशत की जीडीपी भी हासिल कर चुका है। साथ ही यह 1.5 मिलियन (लगभग 15 लाख) जॉब प्रदान करने वाला सेक्टर भी बन चुका है।

आजकल बैंक नए उत्पाद एवं नयी सेवाओं जैसे क्रेडिट कार्ड, कंज्यूमर फाइनेंस, वैल्थ मैनेजमेंट, लाइफ एवं जनरल इंश्योरेंस, प्राइवेट इक्विटी, स्टॉक ब्रोकिंग सर्विस आदि में बेहतर कार्य कर रहे हैं। 2008 से अब तक एसबीआई 7 हजार प्रोबेशनरी ऑफिसर्स की भर्ती कर चुका है तथा उसे 2012 तक पांच हजार पीओ की और जरूरत है।

तारा इंस्टीटय़ूट ऑफ बैंक पीओ, नई दिल्ली के डायरेक्टर सत्येन्द्र कुमार का कहना है, ‘अपनी लगातार रिक्तियों एवं जॉब सिक्योरिटी के चलते बैंक पीओ की पोस्ट हर छात्र को आकर्षित करती है। पीओ परीक्षा में अधिक भीड़ जुटने की एक वजह यह भी हो सकती है। इसमें सेलरी स्ट्रक्चर भी पहले से काफी बेहतर हो गया है तथा काम भी काफी रोमांचक हो चुका है। पहले की अपेक्षा छात्र कोचिंग सेंटरों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं तथा इसका उनको फायदा भी मिल रहा है। बैंक पीओ के कामकाज को देखते हुए इसे कहीं से भी कमतर नहीं आंका जा सकता। मैं छात्रों को यही सलाह देता हूं कि इस क्षेत्र में कदम रखने से पूर्व इसके कार्यक्षेत्र, पाठय़क्रम तथा पूछे जाने वाले प्रश्नों के स्वरूप आदि के बारे में पूरी तरह से जरूर अवगत हो लें।’

विस्तारीकरण के दौर में जहां शाखाओं के खुलने और जॉब देने के रूप में बैंकों की अलग पहचान सामने आई है, वहीं बैंक कर्मियों को मिलने वाले वेतन में भी अधिक उछाल आया है। पिछले दिनों गत वर्ष नवंबर से वेतन वृद्धि को लेकर भारतीय बैंक संघ (आईबीए) तथा बैंक कर्मचारी यूनियनों के बीच चली आ रही बातचीत का निर्णायक दौर में पहुंचने का सीधा फायदा यह हुआ कि वेतन में बेतहाशा वृद्धि देखने को मिलेगी।

संघ ने उनके वेतन में 17.5 फीसदी की वृद्धि की सहमति प्रदान कर 28 सरकारी बैंकों के करीब आठ लाख बैंक कर्मियों के घर में दीपावली जैसा माहौल ला दिया है। इसमें सबसे खास बात यह है कि यह समझौता एक नवंबर 2007 से लागू होगा यानी उन्हें 25 महीने का एरियर भी मिलेगा। इस फैसले से न सिर्फ बैंक कर्मियों की बल्ले-बल्ले हुई है, बल्कि बैंकिंग सेक्टर में जॉब के इच्छुक लोगों के सपनों में भी रंग भर गये हैं।

वहीं दूसरी ओर यह अनुमान है कि 2013 तक करीब डेढ़ लाख बैंक कर्मचारी रिटायर होने वाले हैं (जो कि 20 फीसदी से भी ज्यादा हैं)। इसमें अधिक संख्या बैंक प्रोबेशनरी ऑफिसर्स (पीओ) की होगी। पीओ की नौकरी को शुरू से ही सम्मान की दृष्टि से देखा जाता रहा है।

युवाओं की एक बड़ी जनसंख्या इस जॉब को लपकने के लिए लालायित रहती है। महिलाओं के लिए भी यह क्षेत्र ‘सेफ जोन’ माना जाता है तथा उनकी भी लिस्ट में बैंक पीओ की नौकरी पहले नंबर पर रहती है। देश के सभी बैंक फ्रेशर्स की नियुक्ति पीओ लेवल पर ही करते हैं। खासतौर पर सरकारी बैंकों में अधिकारी के तौर पर नौकरी पाने का सबसे सही रास्ता बैंक पीओ की परीक्षा को ही माना जाता है।

बैंक पीओ की भूमिका
किसी भी बैंक में पीओ की भूमिका अधिक महत्त्वपूर्ण होती है। संचालन से लेकर मैनेजमेंट के को-ऑर्डिनेशन का पूरा काम बैंक पीओ ही देखते हैं। बैंक को किस प्रोजेक्ट अथवा प्रोफाइल पर काम करना है, यह तय करने की जिम्मेदारी भी पीओ की होती है। इसके अलावा स्टाफ किस तरह से कार्य कर रहा है या उसे किस तरह से प्रयोग में लाया जा सकता है, यह सब देखना पीओ के जिम्मे होता है। हालांकि यह कार्य दो साल के प्रोबेशन पीरियड के बाद ही शुरू होता है।

ज्वॉइनिंग के दो साल तक उन्हें कैशियर, क्लर्क तथा लोन पासिंग जैसे कार्य करने पड़ते हैं। बैंक पीओ की परीक्षा देने वाले नई दिल्ली के रोहित शर्मा का कहना है कि ‘बैंक पीओ में मेरी दिलचस्पी का एक सबसे बड़ा कारण जल्दी जॉब पाना भी है। इसकी रिक्तियां भी विभिन्न बैंकों में लगातार निकलती रहती हैं, जिसके चलते सफलता पाने के अवसर बढ़ जाते हैं। अभी मैंने सिर्फ एक बार बैंक पीओ की परीक्षा दी है। पिछले साल मैं इंटरव्यू में सलेक्ट नहीं हो पाया, परन्तु मुझे उम्मीद है कि अगले एक-दो सालों में मैं सफल हो जाऊंगा।’

एग्जाम स्ट्रक्चर एवं प्रिपरेशन
बैंक पीओ के लिए वही छात्र आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने 55 प्रतिशत अंकों के साथ ग्रेजुएशन की परीक्षा पास की हो। कुछ बैंक बारहवीं के पश्चात ही आवेदन मांगते हैं। इसमें उम्र सीमा भी 21 से लेकर 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए। परीक्षा दो चरणों में (लिखित परीक्षा व साक्षात्कार) आयोजित की जाती है।

लिखित परीक्षा
इसमें दो पार्ट ऑब्जेक्टिव तथा डिस्क्रिप्टिव होते हैं। पहले में 200 प्रश्न पूछे जाते हैं तथा इसके लिए 200 अंक भी निर्धारित होते हैं। दूसरे डिस्क्रिप्टिव पार्ट में 50 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। पहले पार्ट जहां तर्कशक्ति, संख्यात्मक योग्यता, अंग्रेजी, सामान्य जागरूकता तथा कम्प्यूटर आदि पर आधारित होता है, वहीं दूसरे पार्ट में कॉम्प्रिहेंशन, शॉर्ट प्रेसिस, लेटर राइटिंग तथा लेख से संबंधित प्रश्न होते हैं। प्रश्नों का माध्यम हिन्दी व अंग्रेजी दोनों होता है।

साक्षात्कार
यह खण्ड 50 अंकों का (30 नंबर का साक्षात्कार व 20 नंबर का ग्रुप डिस्कशन) होता है। इसमें किसी भी उम्मीदवार को 40 प्रतिशत अंक लाना आवश्यक है। साक्षात्कार के दौरान करेंट अफेयर्स, आरबीआई के नए रूल-रेगुलेशन तथा नयी स्कीमों, जिस बैंक के लिए सलेक्शन हुआ है, आदि पर प्रश्न पूछे जाते हैं।

तैयारी के लिए पत्र-पत्रिकाओं का नियमित अध्ययन, मैथ्स, अंग्रेजी की व्याकरण, कम्प्यूटर नॉलेज आदि से अपडेट रहना जरूरी है। प्रतिदिन पत्र-पत्रिकाओं के अध्ययन के दौरान महत्त्वपूर्ण घटनाक्रमों को नोट करने, रीजनिंग पर खास निगाह तथा मैथ्स के प्रश्नों का अभ्यास इसमें औसत दर्जे के उम्मीदवार को भी कारगर बना सकता है।

जॉब के लिहाज से खास
लगभग सभी राष्ट्रीयकृत बैंक अपने यहां बैंक पीओ से संबंधित रिक्तियां निकालते हैं। एक अनुमान के मुताबिक महीने में एक या दो बार किसी न किसी बैंक से पीओ पद के लिए रिक्तियां जरूर घोषित की जाती हैं। यदि छात्र जागरूक हों तथा आधारभूत तैयारी से लैस हों तो उनके लिए कोई दिक्कत नहीं है। इस सेक्टर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सभी 27 बैंकों में विस्तार की प्रक्रिया जारी है तथा हजारों शाखाएं खोली जा रही हैं। इस लिहाज से नए लोगों की खूब भर्तियां हो रही हैं।

जॉब सिक्योरिटी के चलते औसत वेतनमान पर भी युवा भारी संख्या में जुट रहे हैं। आजकल जॉब के स्वरूप को देखते हुए कम्प्यूटर का ज्ञान अनिवार्य कर दिया गया है, क्योंकि आगे चल कर उन्हें कम्प्यूटर पर अधिक काम करना होता है। बैंक पीओ की परीक्षा में इस टॉपिक से सवाल भी पूछे जाते हैं। उम्मीदवार यदि इसे गंभीरतापूर्वक लें तो बैंक की जॉब उनसे दूर नहीं है।

परामर्श
परवीन मल्होत्रा, निदेशक, करियर गाइडेंस इंडिया

मैंने आर्ट्स विषय से ग्रेजुएशन की है। मैं यह जानना चाहता हूं कि पीओ की परीक्षा में सफलता का प्रतिशत क्या होता है? रीजनिंग, मैथ्स, इंग्लिश या सामान्य ज्ञान में से किसमें सबसे ज्यादा फोकस करने की जरूरत है?
उत्तम कुमार, मुखर्जी नगर
सभी पब्लिक सेक्टर के बैंक पीओ परीक्षा के जरिए समय-समय पर प्रोबेशनरी ऑफिसर की भर्ती करते हैं। पीओ परीक्षा के अंतर्गत आपकी रीजनिंग क्षमता, क्वांटिटेटिव स्किल, अंग्रेजी और सामान्य जानकारी की जांच होती है। ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू में सिर्फ उन्हीं लोगों को बुलाया जाता है, जो लिखित परीक्षा (ऑब्जेक्टिव और सब्जेक्टिव दोनों) को पास कर लेते हैं। आपको प्रश्नों को जितनी तेजी से हो सके, हल करने का अभ्यास करना चाहिए, लेकिन इस बात का खास ख्याल रखें कि कुछ पेपरों में निगेटिव मार्किग भी होती है। प्रश्नों को हल करते समय याद रखें कि किसी प्रश्न के पीछे न पड़ें। ऐसा करने से आपको आते हुए प्रश्नों के उत्तर छूट सकते हैं।

मैंने कॉमर्स स्ट्रीम से 12वीं की परीक्षा दी है। क्या बैंक पीओ की परीक्षा 12वीं के बाद दी जा सकती है?
मनीष, उत्तम नगर
सिर्फ 21 से 30 साल के ग्रेजुएट, जिन्होंने मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटी से डिग्री प्राप्त की हो और बैंक द्वारा मांगे गए न्यूनतम अंक (यह हर बैंक में अलग-अलग हो सकता है) प्राप्त किए हों, वही प्रोबेशनरी ऑफिसर के लिए अप्लाई कर सकते हैं। इसके साथ ही कंप्यूटर का ज्ञान होना भी आवश्यक है।

प्राइवेट सेक्टर बैंक में नौकरी करने के लिए क्या योग्यताएं जरूरी हैं? क्या वे पब्लिक सेक्टर बैंकों की तरह ही सुविधाएं देते हैं?
विनीत शर्मा
प्राइवेट सेक्टर बैंक बड़ी तादाद में नौकरियां दे रहे हैं। बिजनेस के विस्तार के साथ ही वहां ढेरों जॉब सामने आ रहे हैं। इस तरह के बैंक अपने नए बिजनेस प्लान को बढ़ाने और ब्रांच नेटवर्क को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर लोगों की भर्ती कर रहे हैं। कुछ बैंक जैसे कि यूटीआई अपने एग्रीकल्चर सेक्टर को बढ़ाने के लिए एग्रीकल्चर ग्रेजुएट की भी नियुक्तियां कर रहे हैं।

इस तरह के प्रतिस्पर्धात्मक नए जनरेशन बैंकों में नौकरी के लिए बेहतरीन कम्युनिकेशन स्किल के साथ एक अच्छी एमबीए की डिग्री या एक सीए होना जरूरी योग्यता है, ताकि मार्केटिंग, फाइनेंशियल सलाह, बैंक ऑपरेशन और मैनेजमेंट जैसे महत्त्वपूर्ण कार्यो को अच्छी तरह से संभाला जा सके। कुछ इंटरनेशनल बैंक जैसे कि एमेक्स या एबीएन एमरो ऑफिस वर्क के लिए अपने बैंकों में फ्रेशर्स की भर्ती करते हैं, जिससे वो अपने बेहतरीन क्षमता और स्किल के जरिए बैंक के न्यूमेरिकल डाटा और जरूरी कामों को पूरा करें।

फाइनेंशियल मार्केट और बैंकिंग ऑपरेशन (एटीएम, टेलीबैंकिंग इत्यादि) के ग्लोबलाइजेशन की वजह से बैंकिंग सेक्टर में बहुत तेजी से बदलाव हो रहा है। कस्टमर फ्रैंडली स्कीम के साथ ही इस क्षेत्र में जबरदस्त कम्पिटीशन है। जहां प्राइवेट बैंक अपनी टेली-बैंकिंग के जरिए नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रहे हैं, वहीं पब्लिक सेक्टर बैंक ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों में अपनी ब्रांचों का विस्तार कर रहे हैं। बैंक आकर्षक पैकेज के अलावा सालाना अच्छा इंक्रीमेंट भी देते हैं। बैंकों में जॉब के लिए न्यूमेरिकल क्षमता के अलावा आपका कंप्यूटर जानकार होना भी आवश्यक है।

सफल शख्सियत
स्पीड टैस्ट से मिली सफलता
रथिन कुमार सिंह, पीओ, इलाहाबाद बैंक

विज्ञान विषयों के साथ इंटरमीडिएट, बीएससी और फिर एमएससी के बाद भी मेरा रुझान बैंकिंग सेक्टर की ओर रहा। मेरे कई सीनियर बैंक पीओ अथवा क्लर्क की परीक्षा में सफलता प्राप्त कर चुके थे, जिसके चलते मुझे भी उनसे प्रेरणा मिलती रही। आखिरकार मैंने भी इस सेक्टर की ओर छलांग लगा दी।
 
मैंने कई बार पीओ तथा क्लर्क का रिटन टैस्ट क्लीयर किया था, परन्तु इंटरव्यू में सफलता नहीं मिल पाई। इसे लेकर मेरे अंदर निराशा के भाव भी उत्पन्न हो गए थे। आखिरकार मेरे पेरेन्ट्स, मित्र एवं भाई ने मेरा हौसला बढ़ाया और इलाहाबाद बैंक पीओ पर कुछ महीने पूर्व मेरा चयन हो गया। मैंने इसके लिए लखनऊ के एक प्रतिष्ठित सेंटर से कोचिंग भी ली, जिसका मुझे फायदा हुआ।

बैंक पीओ की तैयारी करने वाले छात्रों को मेरी व्यक्तिगत यही सलाह है कि वे रैगुलर करेंट अफेयर्स, रीजनिंग एवं डाटा इंटरप्रिटेशन(मैथ्स) का अध्ययन करें। पिछले तीन-चार सालों के प्रश्नपत्रों तथा कोचिंग सेंटर में हर हफ्ते कराए जाने वाले स्पीड टैस्ट जरूर दें। आजकल कम्प्यूटर की जानकारी भी अहम है। इन सबको साथ लेकर चलने पर सफलता अवश्य मिलेगी।

कंप्यूटर प्रेमी पीओ को ही मिलेगी सफलता
एससी सिन्हा, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, नई दिल्ली

बैंकिंग सेक्टर अपने बूम पर है। इसमें पीओ की कितनी भूमिका है?
आमतौर पर पीओ का काम जूनियर मैनेजर लेवल का होता है। बैंकों की जो स्थिति है, उसके मद्देनजर 2-3 सालों में लाखों लोग रिटायर हो रहे हैं। इस समय या अगले साल तक जो लोग ज्वॉइन करेंगे, उनके लिए आगे बढ़ने की संभावना अधिक रहेगी। पहले लोग कम्प्यूटर पर काम करने से घबराते थे, लेकिन अब हर ब्रांच कम्प्यूटर नेटवर्किग के जरिए एक दूसरे से जुड़ चुकी है। हर किसी को कम्प्यूटर पर ही काम करना है, इसलिए जो पीओ कम्प्यूटर प्रेमी होंगे, वही आगे तक जाएंगे।

बतौर पीओ ज्वॉइन करने पर किस बुलंदी तक पहुंचा जा सकता है?
आज के दौर में क्वालिटी ऑफ वर्क का चलन है। बैंकिंग किसी भी देश की रीढ़ की हड्डी होती है। पीओ बनने के साथ-साथ इंस्टीटय़ूट ऑफ बैंकर्स में रजिस्ट्रेशन कराने के बाद आगे का रास्ता खुलता है। यह संभव है कि इस समय ज्वॉइन करने के बाद 10-12 साल के अंदर प्रमोशन करके डीजीएम तथा 40-45 साल की उम्र तक जीएम के पद तक पहुंचा जा सकता है। बड़ी अथवा छोटी पोस्ट पर अब कोई भेदभाव नहीं रह गया है।

विस्तारीकरण के दौर में जॉब सिक्योरिटी की कितनी गारंटी है?
बैंकिंग के सेक्टर में पूरी जॉब सिक्योरिटी है। यही कारण है कि आईआईएम व आईआईटी के लोग इस फील्ड में आ रहे हैं। हर व्यक्ति बैंक नहीं चला सकता, क्योंकि यह एक रिस्क ओरिएंटेड जॉब है तथा इसमें हर किसी को समझदारी से काम करने की जरूरत है। जॉब के साथ-साथ इसमें हर तरह का एक्सपीरिएंस होता है तथा हर तरह की जानकारी मिलती है।

इस फील्ड में आने वाले लोगों को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहूंगा कि बैंक पीओ के रूप में काम करके आप काफी हद तक खुद को आत्मनिर्भर बना सकते हैं। बस इसमें परिश्रम एवं ईमानदारीपूर्वक काम करते रहने की जरूरत है। उसके बाद आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। जो भी इच्छुक लोग हैं, उन्हें बेफिक्र होकर इस फील्ड में आना चाहिए। इसमें पैसा और समय-समय पर प्रमोशन भी है।

कोई यूनिवर्सिटी अथवा संस्थान, जो बैंक पीओ का कोर्स कराते हों?
नहीं, अभी तक कोई यूनिवर्सिटी या संस्थान बैंक पीओ के कोर्स में दाखिला नहीं देता। इसमें कोचिंग सेंटर के जरिए बारीकियों से अवगत होकर परीक्षा में सफलता प्राप्त की जा सकती है। हर शहर में कोचिंग सेंटर मौजूद हैं। छात्र अपनी इच्छानुसार ज्वाइन कर सकते हैं।

प्रमुख बैंक
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई)
एसबीआई देश का सबसे जाना-पहचाना बैंक है। इसका कॉर्पोरेट ऑफिस मुबई में है। यह बैंक 1973 से सक्रिय रूप से सामाजिक सेवा बैंकिंग का कार्य कर रहा है। इस समय इसके 14 स्थानीय हैड ऑफिस एवं करीब 57 जोनल ऑफिस हैं। साथ ही पूरे भारत में इसके 12,000 से भी अधिक एटीएम उपलब्ध हैं, जो देश का सबसे बड़ा एटीएम नेटवर्क है। इसके 32 देशों में 131 विदेशी ऑफिस तथा हैदराबाद व गुड़गांव में ट्रेनिंग सेंटर मौजूद हैं। इसकी प्रमुख सेवाएं-विश्व यात्रा फॉरेन ट्रैवल कार्ड, संशोधित सेवा शुल्क, एटीएम सेवाएं, इंटरनेट बैंकिंग, ई-रेल, ई-भुगतान, सुरक्षित जमा लॉकर आदि हैं। यह बैंकिंग में सबसे ज्यादा जॉब भी उपलब्ध करवाता है।

अन्य प्रमुख बैंक
-बैंक ऑफ बड़ौदा
-आंध्रा बैंक
-ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स
-इलाहबाद बैंक
-सिंडिकेट बैंक
-सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया 
-विजया बैंक
-कार्पोरेशन बैंक
-केनरा बैंक

कोचिंग संस्थान
-तारा इंस्टीटय़ूट ऑफ बैंक पीओ, नई दिल्ली-110062
-आरएनआईएस कॉलेज ऑफ बैंकिंग, नोएडा, उ.प्र.-201301
-जेटीएस इंस्टीटय़ूट, बेंगलुरू-560001
-महेन्द्रा कोचिंग फॉर बैंक एग्जाम, लखनऊ

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