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उर्वरा शक्ति खो रही है तराई की भूमि

तराई के किसान जानकारी के अभाव में गेहूं की कटाई के बाद खेतों को लंबे समय से आग के हवाले करते आ रहे हैं, जिससे खेतों की ऊपरी सतह पर मौजूद सूक्ष्म पोषक तत्व समाप्त हो रहे हैं। पोषक तत्वों के आग में जल जाने से तराई के खेतों की उर्वरा शक्ति लगातार कम हो रही है।

तराई में इन दिनों गेहूं की कटाई चल रही है। कंबाइन से गेहूं की कटाई के बाद किसान गेहूं की ठूंठ को नष्ट करने के लिए पूरे खेत को आग के हवाले कर देते हैं, जिससे खेत की ऊपरी स्तह पर मौजूद सूक्ष्म पोषक तत्व समाप्त हो रहे हैं। स्थिति यह है कि खेत की ऊपरी सतह पर छह इंच तक पोषक तत्वों के अलावा सूक्ष्म जीवाणु भी होते हैं।

यह जीवाणु मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाते हैं, लेकिन खेत में आग लगने के कारण इन जीवाणुओं के जलने से खेतों का जैविक स्वभाव परिवर्तित हो जाता है। जिससे खेतों की नमी समाप्त होने के साथ ही मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित हो रही है। यही कारण है कि मिट्टी में मौजूद मुख्य पोषक नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश तथा सूक्ष्म पोषक जिंक, तांबा, मैगनीज व जीवांश कार्बनों का ग्राफ भी लगातार गिर रहा है।

मुख्य कृषि अधिकारी एके उपाध्याय ने बताया कि गेहूं की ठूंठ को जला देने की प्रवृत्ति किसानों के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने कहा कि गेहूं की कटाई के बाद किसानों को चाहिए कि वह मिट्टी पलटने वाले हल से खेत की जुताई कर दें। जिसके बाद खेत में पानी लगा दें, जिससे मिट्टी की उर्वरा शाक्ति बने रहने के साथ ही खेत को उचित पोषक तत्व भी मिलते रहेंगे।

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