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डांसिंग लय और ताल में करियर की चाल

अनेक भाव-भंगिमाओं, मुद्राओं तथा भावनाओं को व्यक्त करने का अनूठा माध्यम है डांस, यानी नृत्य। सुरों की धुन सुनते ही मन हिलोरें लेने लगता है और पांव थिरकने लगते हैं। संगीत तथा नृत्य का तो जैसे चोली-दामन का साथ है। दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे दिखाई पड़ते हैं। हिंदू पुराणों में भी नृत्य एवं संगीत का भरपूर उल्लेख मिलता है। राधा-कृष्ण की जोड़ी के बारे में सभी जानते ही हैं कि किस प्रकार कृष्ण की बांसुरी सुन कर राधा सुध-बुध खोकर संगीत की धुनों पर थिरकने लगती थी। मीरा, चैतन्य महाप्रभु इत्यादि भी ऐसे कई उदाहरण हैं।

यह कला उतनी ही पुरानी है, जितना पृथ्वी पर जीवन का सृजन। शिव पुराण के उस अध्याय को हम आज भी याद करते हैं, जब भगवान शिव ने अपनी पत्नी सती के आत्मदाह करने पर जोरदार तांडव नृत्य किया था और अपने दु:ख व रोष को प्रकट करते हुए सम्पूर्ण विश्व को स्वाहा कर दिया था। इस नृत्य को करने के पश्चात ही वे शांत हो पाए और फिर से तपस्या में लीन हो गए। अत: नृत्य का जन्म उस समय हुआ, जिस समय जीव में भावनाएं, जिज्ञासाएं तथा व्यक्त करने की कला उत्पन्न हुई। माना भाषा व्यक्त करने का सबसे सरल व ठोस माध्यम है। नृत्य भी मूक रह कर नाना प्रकार की भाव-भंगिमाएं बनाते हुए अपनी बात को आश्चर्यजनक ढंग से समझा पाने की कला है।

इस विशाल उपमहाद्वीप पर यूं तो हर प्रकार की कला का बोलबाला है, परंतु नृत्य व संगीत में इसका कोई जवाब नहीं। चूंकि यह एक नृत्य अनुशासित देश है, इसलिए इसे नृत्य-कला प्रधान देश की उपलब्धि से नवाजा गया है। विभिन्न संस्कृति व सभ्यताओं के अनूठे दौर से गुजरने के कारण हमारे देश में डांस करने के लिए किसी विशेष अवसर के चयन की आवश्यकता नहीं।

कला-प्रधान देश होने के नाते यहां के लोग ढोल व नगाड़े की आवाज सुनते ही थिरकने लगते हैं, नाचने लगते हैं। उनके दिलों के भाव स्वयं ही नृत्य बन कर झूम कर बाहर आ जाते हैं, फिर लोक-लाज जैसे तत्व पीछे रह जाते हैं।

इतना ही नहीं, हमारे देश में तो यहां तक कहा जाता है कि यदि किसी बच्चे को तीक्ष्ण बुद्धि और वाक्-कला में निपुण बनाना हो तो जन्म के पूर्व से ही उसे अच्छा संगीत अथवा झूमता-गाता नृत्य भरा परिवेश देना चाहिए, ताकि बच्चे व उसके सगे-संबंधियों का आने वाला कल भी हंसता-गाता व खुशियों से भरा हो।

नृत्य अनेक प्रकार से किया जा सकता है। भारत में मूलत: नृत्य को तीन वर्गो में विभाजित किया गया है-
1. शास्त्रीय नृत्य
2. लोक नृत्य तथा
3. पाश्चात्य नृत्य

सामान्य रूप से नृत्य अथवा डांस करने के लिए किसी विशेष ट्रेनिंग की आवश्यकता नहीं होती। यह घर-परिवारों में यूं ही सीख लिया जाता है। परंतु यदि आप इसे अपने करियर के रूप में अपना कर अच्छी-खासी शोहरत बटोरना चाहते हैं तो नृत्य आपको एक अनुशासन के रूप में सीखना होगा।

यह एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें कड़ी मेहनत, सहनशीलता, शारीरिक व मानसिक क्षमता, कला-कौशल इत्यादि पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सफलता के उच्चतम शिखर पर पहुंचने के लिए आपको बेहद कर्मशील, गंभीर, धर्मशील, चरित्रवान व अनुशासित बनने की आवश्यकता है, तभी आप प्रसिद्धि के साथ-साथ पैसा भी कमा पाएंगे।

अधिकांश भारतीय नृत्य जीवन को अभिव्यक्त करते हुए उसे मूक अवस्था में चित्रित करते हैं। वे साहित्य व कथा से व्युत्पन्न पौराणिक कथाओं, लोकगीतों और शास्त्रीय किंवदंतियों से निकलते दिखाई पड़ते हैं, जिन्हें ‘नाट्य शास्त्र’ कहा जाता है। ‘नाट्य शास्त्र’ भरत मुनि द्वारा रचित, दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व का शास्त्र है, जिसके द्वारा आम जनता में नृत्य का चलन आरंभ हुआ।

इसके अंतर्गत नृत्य के दो प्रमुख प्रचलन अत्यंत प्रसिद्ध हुए-शास्त्रीय एवं लोक नृत्य। शास्त्रीय नृत्यों में भरतनाट्यम, कथकली, मणिपुरी, कथक, कुचीपुड़ी, ओडिसी इत्यादि आते हैं। इनमें भरतनाट्यम सबसे शुद्ध और पुराना माना जाता है। लोक नृत्य भाषा, प्रांत इत्यादि के आधार पर अलग-अलग रूपों में दिखाई पड़ते हैं। इनमें कालबेलिया, गरबा, चौकड़ी इत्यादि प्रमुख हैं।

अनेक सभ्यताओं व धर्मो का मिला-जुला मिश्रण होने के कारण भारत ने पाश्चात्य नृत्य को भी खुले दिल से अपनाया है। फिर चाहे वह बैले, साल्सा, जैज, हिप-हॉप, हैपिंग, बाल-रूम डांस, ब्रेक डांस डिस्को, रशियन डांस, ड्रामा, नाटकीय डांस, ओपरा या फिर कोई अन्य आधुनिक नृत्य हो, कुल मिला कर हमने अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की विभिन्न शैलियों को जीवन में पूरी तरह से उतारा है। हम इन सब में बेहद सफल भी रहे हैं, तभी तो भारत नृत्य के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त है।

आधुनिक सामाजिक परिवेश में नृत्य केवल ‘नाचना’ न रह कर, बल्कि और अधिक चुनौतीपूर्ण व व्यापक क्षेत्र बन गया है। इसका प्रमाण विभिन्न टीवी चैनलों पर प्रसारित डांस शो व रियलिटी शोज हैं। जीटीवी का ‘डांस इंडिया डांस’, सोनी चैनल का ‘बूगी-वूगी’ तथा कलर्स चैनल का ‘इंडिया गॉट चैलेंज’ कुछ ऐसे शो हैं, जिन्होंने नृत्य को सफलता के उच्चतम शिखर तक पहुंचाया।

कलर्स चैनल के प्रिंस डांस ट्रप, स्नेहा और विक्टर की धमाकेदार साल्सा जुगलबंदी इत्यादि को दर्शक आज तक नहीं भुला पाए। इसी प्रकार ऐसी अनेक कंपनियां टीवी शो, हॉलीवुड, बॉलीवुड, टॉलीवुड इत्यादि भी हैं, जो आप में छिपी प्रतिभाओं को जनता के सामने लाने में सहायता करते हैं और साथ ही मौका देते हैं पैसे के साथ भरपूर प्रसिद्धि पाने का।

नृत्य के क्षेत्र में उच्च मुकाम बनाने वाले अनेक नर्तक/नर्तकी हैं। इनमें से कुछ ने तो पैसा व अंतरराष्ट्रीय ख्याति के साथ-साथ राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार तक पाए हैं। सोनल मानसिंह, श्यामक डावर, राजा रेड्डी, राधा रेड्डी, उत्तम, सरोज खान, तीजनबाई इत्यादि प्रमुख हैं। सोनल मानसिंह को नृत्य में पद्मश्री विभूषण पुरस्कार से नवाजा गया, जो अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। अत: नृत्य को करियर के रूप में देखने वालों के लिए अवसरों, संभावनाओं, प्रसिद्धि इत्यादि की कोई कमी नहीं है। जरूरत है तो कड़ी मेहनत और कुछ कर गुजरने के जज्बे की।

डांस को करियर बनाने वालों को ध्यान रखना चाहिए कि एक पेशेवर डांसर बनने के लिए बेहोश दिल नहीं, धड़कते दिल की जरूरत है। नृत्य का बुखार जब तक आपकी रग-रग में नहीं पहुंचेगा, आपको चैन नहीं मिलेगा। अत: इस रोग की दवा भी नृत्य ही है। संक्षेप में कहें तो यह बहुत कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प, शारीरिक योग्यता, क्षमता इत्यादि की मांग करता है। यूं तो नृत्य व संगीत भारत की रग-रग में रचा-बसा है, परंतु फिर भी अभिभावक अपने बच्चों को नृत्य में करियर बनाने पर हिचकिचाते हैं। बहुत-से लोग इसे केवल लड़कियों की कला ही मानते हैं।

अधिकांश अभिभावकों का कहना है कि यह बेहद संघर्ष भरा क्षेत्र है, जिसमें सफलता का सेहरा बहुत कम लोगों के माथे पर बंधता है, इसलिए डांस करने वालों को ‘डांसर’ के टैग के अलावा कुछ नहीं मिलता। उन्हें समाज में वह इज्जत, शोहरत तथा पैसा नहीं मिलता, जितना किसी अन्य करियर के क्षेत्र में। परंतु आज के अभिभावकों को यह समझना होगा कि डांस अब किसी विशेष वर्ग तक ही सीमित नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर की ख्याति लिए अनेक संभावनाओं से जुड़ा है।

फिल्मों, स्टेज शो तथा टीवी सीरियल इत्यादि में तो नृत्य का शुरू से ही बोलबाला रहा है, अब अन्य क्षेत्रों में भी इसकी आवश्यकता दिखाई पड़ती है। नृत्य कला में निपुणता प्राप्त कर लेने के बाद आप अच्छे शिक्षक, कोरियोग्राफर, डांसर, नृत्य निर्देशक, नृत्य चिकित्सक, लैक्चरर, बनने के साथ टीवी सीरियलों व फिल्मों में काम भी पा सकते हैं। इतना ही नहीं, आप अपना डांस स्कूल, कॉलेज अथवा मंडली भी तैयार कर सकते हैं। इस प्रकार आप नृत्य प्रदर्शन द्वारा स्टेज शो इत्यादि करके लाखों कमा सकते हैं तथा आम जनता में वाहवाही लूट सकते हैं। अत: इस क्षेत्र में प्रसिद्धि व पैसा, दोनों ही भरपूर मात्र में मिलते हैं। एक अच्छा नर्तक स्वयं की गरिमा तो बढ़ाता ही है, देश की गरिमा में भी चार चांद लगा देता है।

आयु
यह कहना मुश्किल है कि नृत्य प्रशिक्षण के लिए कम-से-कम क्या उम्र होनी चाहिए। यह इच्छानुसार व नृत्य के चयन के अनुसार किसी भी आयु में सीखा व किया जा सकता है। इसमें उम्र की कोई सीमा नहीं है। नृत्य की कला आप में जन्मजात हो सकती है तथा सीखी भी जा सकती है।

बच्चों में पेशेवर नृत्य प्रशिक्षण की शुरुआत 5-6 साल की आयु से की जा सकती है। बैले में रुचि रखने वाले छात्रों को 8-9 वर्ष की आयु से प्रशिक्षण लेना शुरू कर देना चाहिए। नृत्य चाहे कभी भी शुरू करें, इसे सीखने के लिए समर्पण, ध्यान, त्याग, आदर्श, सहनशक्ति, ऊर्जा इत्यादि अति-आवश्यक हैं, जो उन्हें पुरस्कार अर्जित करने में सहायता प्रदान करते हैं।

पात्रता
नृत्य को करियर के रूप में अपनाने वाले कलाकारों के लिए बुनियादी आवश्यकता 10+2 है। वे नृत्य में बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण कर नृत्य में स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएचडी इत्यादि भी कर सकते हैं। इसके अलावा छात्र विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश पाकर विभिन्न नाट्य शास्त्रों में प्रमाणपत्र, डिप्लोमा कोर्स इत्यादि भी कर सकते हैं।

यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि नृत्य से संबंधित पढ़ाई अथवा पाठ्यक्रम केवल नृत्य सीखना ही नहीं, बल्कि नृत्य से जुड़े कौशल, इतिहास, प्रबंधन, आंदोलन, जागृति, विचारधारा इत्यादि की जानकारी भी प्रदान करते हैं। अत: अन्य किसी भी विषय की भांति छात्र इस क्षेत्र में विशिष्टता पा सकते हैं।

करियर की शुरुआत चाहे कैसी भी हो, इसमें सफलता आपकी क्षमता, पसंद, विशिष्टीकरण आदि पर आधारित है। करियर के व्यापक क्षेत्र को अपनाने वालों को 18-20 घंटे काम करने की आदत डालने के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि यह एक शो-बिज है, अत: कड़ी मेहनत इसका पहला चरण है। महान डांसर माइकल जैक्सन को आज भी हम याद करते नहीं थकते। ऐशले, संदीप सोपारकर, लोबो, सरोज खान इत्यादि ने भी घंटों कड़ी मेहनत करके इस क्षेत्र में अपना नाम रोशन किया है।

सन 2012 में इस क्षेत्र में तेजी का अनुमान लगाया जा रहा है। भारी मात्र में आवेदकों को नौकरी मिलने की संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र में प्रगति लाने के लिए सरकार भी निरंतर कार्यशील है। अनेक कॉलेज, विश्वविद्यालय, टीवी चैनल, गीत चित्र, ओपेरा, नृत्य समूह कंपनियां इत्यादि इस क्षेत्र को बढ़ावा देने में कार्यरत हैं। नौकरी के अलावा नर्तकों को सेवानिवृत्ति के पश्चात पेंशन अथवा एकमुश्त राशि देने के प्रावधान पर भी विचार किया जा रहा है ताकि नृत्य मात्र एक कलात्मक बोझ बन कर न रह जाए।

नृत्य सीखना व सिखाना एक कला है, जिसमें करियर बनाने के लिए स्वयं को पूरी तरह से समíपत करने की आवश्यकता होती है। परन्तु फिर भी संघर्ष के दौर से सबको गुजरना ही पड़ता है। ऐसे में छात्रों को ये पंक्तियां नहीं भूलनी चाहिए -
बदल जाए अगर माली, चमन होता नहीं खाली,
बहारें फिर भी आती हैं, बहारें फिर भी आएंगी।

परामर्श
उषा एल्बुकर्क, निदेशक, करियर स्मार्ट

मैंने 12वीं का पेपर दिया है और अब करियर के बारे में सोच कर डर लग रहा है। घर में लोग बीसीए या एमबीए करने के लिए कह रहे हैं, पर मैं डान्स में करियर बनाना चाहती हूं। मेरा रुझान डान्स कोरियोग्राफी की तरफ भी है। क्या इसमें कोई डिग्री कोर्स है या नहीं? क्या यह करियर सेफ है? बताने की कृपा करें।
हेमा बिष्ट, लोनी, गाजियाबाद
मैं आपकी स्थिति समझ सकती हूं कि अभिभावकों को वैकल्पिक करियर के बारे में बताना आसान नहीं है, पर इससे पहले आपको यह देखना होगा कि डान्स को लेकर आप कितनी गंभीर हैं। यह आप सिर्फ फन के लिए कर रही हैं या सचमुच इसे करियर के रूप में अपनाना चाहती हैं। यदि आप सच में डान्स सीखना चाहती हैं तो कोरियोग्राफी को अपना सकती हैं, परंतु अच्छा यह रहेगा कि इसे ग्रेजुएशन के साथ-साथ करें। इसके चार विकल्प हैं-सर्टिफिकेट कोर्स, तीन साल का बैचलर डिग्री कोर्स, तीन साल का पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स या तीन साल का डिप्लोमा कोर्स। अगर आप इसे गंभीरता से लेती हैं तो इसमें भविष्य सुरक्षित है।

मैंने एक साल पहले 12वीं की थी और अब मैं डान्स में करियर बनाना चाहती हूं। दिल्ली में डान्स सिखाने वाले संस्थानों के बारे में जानकारी दें और यह भी बताएं कि उनमें एडमिशन कब होता है और कोर्स कितनी अवधि का होता है।
निधि, आनंद पर्वत, दिल्ली
दिल्ली का कथक केंद्र और भारतीय कला केंद्र तथा चेन्नई का कला क्षेत्र भारत के अग्रणी नृत्य संस्थानों में से हैं। अन्य स्कूलों में कुछ इस प्रकार हैं-

-कला साधनालय
-कला संपूर्ण
-कलाभवन टेलेंट रेजिडेंशियल स्कूल
-कनकसभा
-कथकली सदानम
-केरला कलामंडलम
-लास्य एकेडमी ऑफ मोहिनीअट्टम
-ममता शंकर बैले ट्रप
-नाटय़ डान्स थिएटर

इसके अलावा दिल्ली के कुछ अच्छे प्राइवेट संस्थान हैं-श्यामक डावर इंस्टीटय़ूट ऑफ परफॉर्मिग आर्ट्स और दि डान्स वर्क्स।

मैंने कॉमर्स से 12वीं के पेपर दिए हैं। मुझे डान्स में करियर बनाना है। मैं यह जानना चाहता हूं कि इस क्षेत्र में क्या स्कोप हैं? क्या इसमें एक सफल करियर बनाया जा सकता है?
तुषार, नोएडा
जिस किसी ने भी डान्स में उपयुक्त प्रशिक्षण और शिक्षा हासिल की हो, वह एक कोरियोग्राफर, डान्स ट्रप का एक परफॉर्मर, सोलो परफॉर्मर या किसी डान्स स्कूल या एकेडमी का शिक्षक बन सकता है। भारत की संगीत नाटक एकेडमी डान्स के प्रोजेक्ट्स पर रिसर्च फैलोशिप देती हैं, जिसमें अच्छा-खासा पारिश्रमिक दिया जाता है।
   
कुछ अग्रणी समाचार पत्र और पत्रिकाएं नामी-गिरामी डान्सर्स को नृत्य कार्यक्रमों की समीक्षा लिखवाने के लिए भी अनुबंधित करते हैं। डान्स में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करने के बाद प्रोफेसर या लेक्चरर के रूप में किसी विश्वविद्यालय में भी नौकरी की जा सकती है।

एक्सपर्ट व्यू
प्रोफेशनल नृत्य इतना आसान नहीं, पर हिम्मत न हारें
प्रो. नरेश वर्मा, पूर्व प्रोफेसर और वर्मा डांस व म्यूजिक इंस्टीटय़ूट के संस्थापक

डांस सीखने के लिए छात्रों में क्या-क्या खूबियां होनी चाहिए?
डांस सीखने के लिए सबसे पहले छात्र में उसे सीखने के लिए लगन, धैर्य, संयम व विवेक होना चाहिए। अच्छा डांसर बनने के लिए आपको काफी प्रेक्टिस तथा केन्द्रित होने की आवश्यकता है। कथा, किंवदंतियां, पुराण इत्यादि की जानकारी यदि छात्र को हो तो यह डांस सीखने में काफी सहायक सिद्ध होते हैं।

आजकल सभी क्षेत्रों में विस्तार हो रहा है। क्या नृत्य के क्षेत्र में भी रोजगार की संभावनाएं अधिक हुई हैं?
जी हां, बेशक। आज नृत्य मात्र नाचना न रह कर सभ्य परिवारों की कला का हिस्सा बन चुका है। इसमें पैसे के साथ-साथ ख्याति की भी कोई सीमा नहीं है। पढ़े-लिखे अभिभावक स्वयं अपने बच्चों को नृत्य सीखने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इतना ही नहीं, नृत्य सीखने के बाद आप एक सफल कलाकार, नर्तक, शिक्षक, लेक्चरर, कोरियोग्राफर, नृत्य निदेशक, नृत्य चिकित्सक, म्यूजिक डायरेक्टर इत्यादि बन सकते हैं। चूंकि नृत्य अधिकांशत: मंडली में किया जाता है, अत: आप अपनी नृत्य मंडली बना कर स्टेज शो या फिर अपना संगीत विद्यालय खोल सकते हैं। आप फिल्मों व टीवी में भी अपना करियर बना सकते हैं। अच्छे अंक पाने वाले के लिए स्कॉलरशिप व कैंपस भर्ती दी जाती है।

छात्रों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
नृत्य सीखने वाले छात्रों को मैं यही संदेश देना चाहूंगा कि वे नृत्य सीखते वक्त हिम्मत न हारें। अक्सर यह देखा जाता है कि शुरुआती दौर में तो छात्र बड़े जोश के साथ आते हैं। वे नृत्य को बेहद आसान भी समझते हैं, पर उन्हें प्रोफेशनल नृत्य के बारे में यह अहसास नहीं होता कि यह इतना आसान भी नहीं है कि उसे यूं ही सीखा जा सके। इसमें अनुशासन के साथ-साथ कड़ी मेहनत और प्रैक्टिस की जरूरत होती है। यही वजह है कि कभी-कभी उनका संयम तथा आत्म-विश्वास डगमगाने लगता है। कुछ तो इसे बीच में ही छोड़ देते हैं और कुछ सीखने के बाद। ऐसा नहीं होना चाहिए। निरंतर प्रयास व कड़ी मेहनत ही नृत्य सीखने का प्राथमिक चरण है, इसका कोई शॉर्ट-कट नहीं है। यह भी देखा जाता है कि छात्रों को यह पता ही नहीं होता कि वे कौन-सा नृत्य सीखना चाहते हैं। अधिकांश छात्र इसी कशमकश में उलझ जाते हैं कि वे शास्त्रीय नृत्य सीखें, लोक नृत्य अथवा पाश्चात्य नृत्य सीखें। अपनी पसंद के नृत्य का चयन उन्हें खुद ही करना होगा, तभी वे अपने आपको इस क्षेत्र में फिट कर पाएंगे।

प्रमुख संस्थान
बिरजू महाराज परंपरा
दिल्ली के क्लासिकल डान्स सिखाने वाले संस्थानों में इस संस्थान को काफी सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। संस्थान प्रयाग संगीत समिति, प्रयाग से मान्यताप्राप्त है।

-कोर्स- संस्थान नृत्य में विशारद कोर्स ऑफर करता है, जो कि एक डिप्लोमा कोर्स है। इसके बाद नृत्य में प्रभाकर कोर्स और फिर पीएचडी करवाई जाती है।

-अवधि- विशारद कोर्स की अवधि पांच साल है तथा प्रभाकर कोर्स की अवधि सात साल और पीएचडी करने वाले को दो से आठ वर्ष का समय मिलता है।

-योग्यता- विशारद के लिए नृत्य में रुचि ही प्रवेश की योग्यता मानी जाती है। आठ साल की उम्र में उसे नृत्य कोर्स में प्रवेश के लिए टैस्ट देना होता है। प्रभाकर के लिए कम से कम हिन्दी आनी चाहिए और विशारद को कोर्स पूरा किया हुआ होना चाहिए। पीएचडी के लिए प्रभाकर की हुई होनी चाहिए तथा शिक्षा कम से कम 12वीं तक की हुई होनी चाहिए।

-पता :123, कला विहार अपार्टमेंट, मयूर विहार, फेस-1, नई दिल्ली- 91

अन्य प्रमुख संस्थान
-अखिल भारतीय गंधर्व महाविद्यालय मंडल, मिराज, गंधर्व निकेतन, ब्राह्मणपुरी, मिराज जिला, सोंगली-415410
कोर्स- कथक, भरतनाट्यम्, ओडिसी 

-बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय-वाराणसी-221005
कोर्स- बीए (नृत्य), नृत्य में डिप्लोमा
विशिष्टता- कथक, भरतनाट्यम्

-मुम्बई यूनिवर्सिटी, मुम्बई-400032
कोर्स- बीए (नृत्य), एमए (नृत्य). बीएफए, एमएफए।
विशिष्टता-भरतनाट्यम्, मोहिनी अट्टम, कथकली

-सेंटर फॉर इंडियन क्लासिकल डांसेज, डिफेंस कॉलोनी, दिल्ली-110024

कोचिंग संस्थान
-डांस प्लेनेट, रोहिणी, दिल्ली
-डांस जोन प्रा. लि., प्रशान्त विहार तथा रोहिणी, दिल्ली
-जीके प्रोडक्शन, एचयू-33, बेसमेंट, पीतमपुरा

स्कॉलरशिप
नृत्य के पाठ्यक्रम में अच्छे अंक पाने वाले छात्रों को विशेष छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं। ये राशि अथवा पुरस्कार के रूप में हो सकती हैं। सरकार एवं भारतीय नाट्य संघ ऐसी प्रतिभाओं की तलाश में रहते हैं, जो नृत्य में अच्छे होने के साथ-साथ पढ़ाई में भी अव्वल रहते हों। अत: इस विषय में 80-90 प्रतिशत अंकों के साथ परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों की फीस कम हो जाती है और रोजगार अवसर भी प्रदान किए जाते हैं। कैंपस रिक्रूटमेंट के जरिए जॉब प्रदान की जाती है। साथ ही स्कॉलरशिप के नाम पर उनको प्रतिमाह 5,000-10,000 रु. तक की राशि भी प्रदान की जाती है।

एजुकेशन लोन
वैसे तो सभी राष्ट्रीयकृत बैंक 10 लाख से 20 लाख तक एजुकेशन लोन उपलब्ध कराते हैं, परंतु आंध्रा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक, विजय बैंक इनमें प्रमुख हैं। नृत्य के पाठ्यक्रम के लिए आमतौर पर खर्च 25,000 रु. से लेकर 5 लाख तक आता है। छात्र अपने पाठ्यक्रम के खर्च के अनुसार ही लोन के लिए आवेदन दे सकते हैं। यदि आप अपना डांस इंस्टीट्यूट खोलना चाहते हैं तो खर्चा 50,000 रु. से लेकर 4 लाख तक हो सकता है, क्योंकि इसमें विभिन्न प्रकार के म्यूजिकल इंस्ट्रुमेंट के साथ-साथ जगह की भी आवश्यकता पड़ती है।

नौकरी के अवसर
आप एक शिक्षक, कोरियोग्राफर, नृत्य प्रशिक्षक, कलात्मक निर्देशक, पेशेवर नर्तक, म्यूजिक डायरेक्टर बन सकते हैं। अपना स्कूल खोल सकते हैं। म्यूजिक थियेटर, टीवी सीरियल, फिल्मों, कला विभागों तथा क्रूज पर डांसरों की मांग बनी रहती है। नृत्य में स्नातक अथवा स्नातकोत्तर डिग्री लेने वालों को सरकारी नौकरी तथा राष्ट्रीय नृत्य संघ में विशेष आवश्यकता रहती है। इनके अलावा नृत्य से जुड़े अनेक प्रशासनिक, दस्तावेजी, तकनीकी करियर इत्यादि भी हैं, जो आपको सफल करियर दे सकते हैं।

वेतन
शुरुआती दौर में आप हर माह 6-7 हजार रुपए कमा सकते हैं, परंतु अनुभव के पश्चात् इसमें पैसों की कोई कमी नहीं है। दो से तीन साल के अनुभव में आप 25,000 रु. तक कमा सकते हैं और उसके बाद आपकी वार्षिक आय लाखों में हो सकती है। इस प्रोफेशन में आप पैसे घंटे के हिसाब से कमा सकते हैं।

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