DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पंचायत चुनावों का मसला सीएम के पास पहुँचा

प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतों के चुनावों का मसला अब मुख्यमंत्री मायावती के पास पहुँच गया है। इसके साथ ही शासन और राज्य निर्वाचन आयोग के बीच  विचार-विमर्श और बैठकों के दौर तेज हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार प्रदेश के पंचायतीराज विभाग ने  त्रिस्तरीय पंचायतों के चुनाव एक साथ सितम्बर-अक्टूबर में कराने की सिफारिश के साथ अपने प्रस्ताव मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिए हैं। मुख्यमंत्री को ही यह अन्तिम रूप से तय करना है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव किस महीने कराए जाएँ? बाद में कैबिनेट इसे अपनी मंजूरी देगी।

सूत्रों के अनुसार तीनों पंचायतों के चुनाव एक साथ कराने में केवल एक अड़चन यह है कि चुनाव प्रक्रिया 15 सितम्बर के बाद शुरू हो पाएगी क्योंकि क्षेत्र पंचायतों का कार्यकाल तब से केवल छह माह रह जाएगा। इनका कार्यकाल 15 मार्च को समाप्त हो रहा है। संविधान के अनुसार छह माह से अधिक कार्यकाल शेष रहने वाले सदन के चुनाव नहीं कराए जा सकते हैं।

दूसरी ओर, ग्राम पंचायतों का कार्यकाल सितम्बर में ही समाप्त हो रहा है। इसलिए इसके पूर्व ग्राम पंचायतों के चुनाव करा लिए जाने चाहिए। अगर तीनों पंचायतों एक साथ कराए जाते हैं तो ग्राम पंचायतों में कुछ समय के लिए प्रशासक तैनात किए जाने के अलावा सरकार के पास कोई विकल्प नहीं है। हालाँकि, प्रशासकों की नियुक्ति को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए शुभ नहीं माना जाता है। दूसरे, सरकार के इस निर्णय के विरोध में न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जा सकता है।

सूत्रों का कहना है कि त्रिस्तरीय पंचायतों के चुनाव एक साथ कराए जाने के प्रबल आसार को देखते हुए शासन और राज्य निर्वाचन आयोग के बीच विचार-विमर्श के दौर  तेज हो गए हैं। शासन यह स्पष्ट कर लेना चाहता है कि अगर तीनों पंचायतों के चुनाव एक साथ कराने का निर्णय लिया जाए तो राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव सम्पन्न कराने में कोई दिक्कत तो नहीं आएगी? वैसे, प्रदेश में केवल सन् 2005 को छोड़कर शेष सभी पंचायत चुनाव एक साथ ही हुए हैं। अन्य राज्यों में भी एक साथ चुनाव कराने की परम्परा रही है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:पंचायत चुनावों का मसला सीएम के पास पहुँचा