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भारत में उत्पीड़न का शिकार है आम आदमी: एसीएचआर

गैर सरकारी संगठन एशियन सेंटर फार हयूमन राइटस ने कहा कि देश में उत्पीड़न और अमानवीय कृत्यों का शिकार आम आदमी है और संप्रग सरकार उनके अधिकारों के उल्लंघन पर ध्यान देने में नाकाम रही है।

संगठन ने मंगलवार को टार्चर इन इंडिया 2010 शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के आंकड़ों के हवाले से कहा गया है कि 2000.2001 को आधार वर्ष मान लें तो संप्रग सरकार के शासन में 2004.05 में तथा 2007.08 में हिरासत में मौत के मामलों में 41.66 प्रतिशत की बढ़त हुई है।

एसीएचआर के निदेशक सुहास चकमा ने रिपोर्ट जारी करते हुए यहां संवाददाताओं से कहा कि आम आदमी उत्पीड़न और अमानवीय तरीकों का सबसे अधिक शिकार होता है। हालांकि संप्रग सरकार खासतौर पर आम आदमी के अधिकारों के उल्लंघन पर ध्यान नहीं दे सकी है।

हालांकि उन्होंने संप्रग सरकार द्वारा नरेगा, शिक्षा का अधिकार कानून, घरेलू हिंसा अधिनियम आदि लागू किये जाने की प्रशंसा भी की। चकमा ने हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा यातना रोकथाम विधेयक 2010 लाने का फैसला करने का जिक्र करते हुए कहा कि इस विधेयक को गोपनीय दस्तावेज की तरह से नहीं रखा जाना चाहिए।

 

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