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आसमान से बरस रही जेठ की आग

अप्रैल के महीने में ही लोगों को जेठ की दोपहरी का अहसास हो रहा है। आसमान आग से बचने के लिए लोग घरों में दुबक कर बैठ रहे हैं। लू के डर से दोपहर को सड़कें खाली दिखाई दे रही है। इससे कामकाज भी प्रभावित हो रहा है।


सूरज की तपिश कम होने का नाम नहीं ले रही। पारे का चढ़ना लगातार जारी है और इसने लोगों को बुरी तरह हलकान कर दिया है। दिन निकलते ही आसमानी आग बरसने लगती है। मौसम वैज्ञानिक भी मौसम के बदले मिजाज से चकित है। दोपहर में स्थिति बहुत खराब हो रही है, गर्म हवाओं से बचने के लिए लोग घरों से निकलने से परहेज कर रहे हैं। सड़कों पर वाहनों की संख्या बहुत घट गई है। बाजारों में भी दिन में कामकाज प्रभावित हो रहा है और लोग शाम के समय ही घरों से निकल रहे हैं। मौसम वैज्ञानिक डॉ. मयंक राय का कहना है कि अप्रैल में ही जून की भीषण गर्मी पड़ रही है। अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस चल रहा है। न्यूनतम तापमान में भी इजाफा हो रहा है। अभी पसीने वाली गर्मी नहीं पड़ने से लोगों को वैसे राहत है। लेकिन लू चलने से मुसीबत भी बढ़ रही है। आने वाले दिनों में पसीने वाली भयंकर गर्मी भी लोगों को सताएगी।

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