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दलाल से मुक्त आठ बच्चे रिमांड होम गए

जिन मासूमों की उम्र कलम पकड़ने व खेलने-कूदने की है उसे अपने स्वार्थ के लिए तीन दलाल काम कराने बेंगलुरू ले जा रहे थे। यह तो नन्हे बच्चों की किस्मत अच्छी थी कि जीआरपी ने ऐन मौके पर दलालों से उन्हें मुक्त करा लिया। पटना जंक्शन पर सोमवार की रात जीआरपी से थोड़ी चूक होती तो बच्चों को कमजोर हाथों से बेंगलुरू में बैग फैक्ट्री में काम करना पड़ता। जीआरपी ने प्लेटफार्म नम्बर एक पर संघमित्रा एक्सप्रेस के खुलने से पहले ही दलालों जियाउद्दीन, बहाउद्दीन व दिलीप चौरसिया को पकड़ लिया तथा आठ बच्चों को मुक्त कराकर सबों को थाने ले आई।ड्ढr ड्ढr पुलिस ने पूछताछ के बाद दलालों को जेल तथा मासूमों को रिमांड होम भेज दिया। सभी बच्चों की उम्र 6 से 14 वर्ष के बीच है। दलाल और मासूम माधोपुर, चिरैया थाना, पूर्वी चंपारण, मोतिहारी के हैं। मुक्त कराए गए बच्चे मो. अनवर, मोहन पासवान, संदीप पासवान, राजकिशोर पासवान, मनोज पासवान, राकेश कुमार, सोने लाल कुमार व गुड्डू आलम ने बताया कि इन दलालों ने परिानों से कहा कि बैग कारखाने में तीन हाार रुपए मिलेंगे। घर से बेंगलुरू का किराया भी मां-बाप से दलालों ने लिया।ड्ढr ड्ढr पूछताछ के दौरान दलालों ने पुलिस को बताया कि ये लोग ठेका पर काम कराने बच्चों को ले जाते हैं। फैक्ट्री मालिक इसके एवज में कमीशन देते हैं। उधर दलालों का कहना है कि इन बच्चों के रिश्तेदार बेंगलुरू में काम करते हैं। उन्हीं लोगों ने उन्हें बुलाया था। उसका कसूर सिर्फ इतना है कि वे बच्चों को ले जा रहे थे। बहरहाल पुलिस ने बाल व्यापार करने की प्राथमिकी दर्ज कर दलालों को जेल भेज दिया।

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