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फैला गुरु का प्रकाशपुंज

दुखी क्यों हो? अपनी चिंताएं मुझे दे दोरांची। तारीख : 17 फरवरी। स्थान: मोरहाबादी मैदान में बना भव्य मुक्ताकाश मंच। समय : शाम के 6.45 बजे। आर्ट ऑफ लििवग के प्रणेता श्री श्री रविशंकर चिरपरिचित सौम्य मुस्कान बिखेरते मंच पर पहुंचते हैं। दोनों हाथ जुड़े हुए। गुरु की एक झलक पाने को बेताब मैदान में मौजूद हाारों भक्तों के बीच गूंजती है हर्षध्वनि। गुरु की आभा कुछ यूं बिखरती है कि लगता है दिव्य प्रकाश पुंज रोशन हो गया हो। हंसी किसी अबोध बालक की निश्छल मुस्कान जसी। सब सुध-बुध खो बैठे थे। कोई भक्ित संगीत की लहरों संग अठखेलियां कर रहा था, तो कोई आखें बंद कर ध्यान मुद्रा में लीन था। लगा, जसे दुनिया भर की परशानियों से निजात दिलाने कोई देवदूत आया है। कार्यक्रम में शामिल हाारों झारखंडियों के लिए यह अनोखा अवसर था, कभी न भूलने वाला।ड्ढr मांग लो एक वरदानड्ढr श्रीश्री रविशंकर ने लोगों से उनकी अशांति, चिंता और परशानियां मांगीं। उन्होंने कहा कि वे यह सब कुछ हरने आये हैं। लोग उन्हें अपने दुख सौंप दें और खुशी-खुशी घर जायें। श्रीश्री ने भक्तों से कहा - मांग लो जो मांगना है, एक वरदान मिलेगा। बस आज की रात केवल ओम का उच्चारण कर शांत चित्त सो जाओ, जीवन में जो चाहिए, मिल जायेगा।ड्ढr जब गुरुदेव ने बजाया मांदरड्ढr मंच पर एक अनोखी जुगलबंदी भी दिखी। श्रीश्री रविशंकर ने झारखंडी संस्कृति के पारंपरिक लोक वाद्य ‘मांदर’ पर थाप देकर देखने वालों को चमत्कृत कर दिया। उनके साथ थे राज्य के जाने-माने कलाकार मुकुंद नायक। गुरुदेव का यह रूप झारखंडी जनमानस की आत्मा को तृप्त कर गया। सब खड़े होकर देर तक तालियां बजाते रहे। गूंजा गुरु का जयघोषड्ढr श्रीश्री रविशंकर को देखने-सुनने आनेवालों में महिलाएं अधिक थीं। ओम के उच्चारण के साथ मंच पर आये श्रीश्री ने ने वॉकिंग कॉरीडोर पर जा कर सबको आशीर्वाद दिया। लोग उन्हें स्पर्श करने, फूल-माला समर्पित करने उमड़ पड़े। श्रीश्री के मंचासीन होते ही हर तरफ ‘जय गुरुदेव’ का उद्घोष गूंजने लगा। लोग उनके दर्शन पाकर खुद को धन्य मान रहे थे।ड्ढr नक्सली बुलेट छोड़ें, बैलेट की राह पकड़ेंसंवाददाता रांची आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता श्री श्री रविशंकर ने नक्सलियों का आह्वान किया है कि वे बुलेट छोड़ बैलेट की राह पकड़ें। उन्होंने कहा : झारखंड के जिन युवकों ने नक्सलवाद की राह पकड़ी है, वे दिल से बुर नहीं हैं। अत्याचार से तंग आकर ही उन्होंने हथियार उठाये हैं। नफरत की आग नेताओं की वजह से भड़की है। इन युवकों के भीतर ऊरा है। कुछ करने की क्षमता है। इनका मानस बदल दें तो ये समाज और देश के लिए जान दे सकते हैं। यह असंभव नहीं है। हम इसकी पहल करंगे।ड्ढr श्री श्री रविशंकर ने कहा कि वे मंगलवार को जमशेदपुर के पटमदा में नक्सलियों से मिले। उनसे मिलकर और बातचीत कर काफी अच्छा लगा। आज यहा हिंसाविहीन समाज की स्थापना की जरूरत है। जो समता पर आधारित हो। उन्होंने कहा कि जहां अपनापन खत्म हो जाता है वहीं भ्रष्ट्राचार का खेल शुरू हो जाता है। धर्म में जातिवाद का जहर घुला हुआ है। इसे समाप्त करने की जरूरत है।ड्ढr मोबाइल से सुना रही थी गुरुाी के प्रवचन : आर्ट ऑफ लीविंग के कार्यक्रम में गुरुाी के प्रवचन को सुनने आयी एक महिला अपने हसबैंड को मोबाइल के जरिये अपने हसबेंड को उनका प्रवचन लाइव सुना रही थी। बोल रही थी- कहे थे न आने के लिये। रिकार्डिंग साफ नहीं होगा तो हमें बाद में कुछ नहीं कहेंगे। फिलहाल केवल प्रवचन सुन लीजिये। दुख से मुक्ित के पांच उपायरांची। श्र्रीश्री रविशंकर ने मोरहाबादी में सत्संग के दौरान भक्तों को दुख से मुक्ित के पांच उपाय सुझाये।ड्ढr पहला-प्राणायाम। कहा, यह करने से तन-मन मजबूत होता है। दुखों से छुटकारा पाने की ताकत मिलती है।ड्ढr दूसरा, यह समझ लो कि वक्त एक जसा नहीं रहता। परिस्थितियां जरूर बदलती हैं। दुख आया है तो चला भी जायेगा। वह टिकेगा नहीं।ड्ढr तीसरा-तुमसे ज्यादा दुखी हैं जो लोग, उनकी सेवा करो। उनका दुख बांटो। अपना दुख भूल जाओ। तब देखना तुम्हारा दुख कम हो जायेगा।ड्ढr चौथा उपाय यह है कि खुद के भीतर विश्वास पैदा करो। यह भाव जगाओ कि दुख जसा भी होगा, सामना कर लूंगा।ड्ढr पांचवां और आखिरी उपाय सबसे सरल है-अपनी मुसीबतें और चिंताएं गुरु को सौंप दो।ड्ढr खुद के भीतर उगेगा सूराड्ढr श्रीश्री ने जीवन को आनंद से रोशन करने के गुर सिखाये। कहा: मन को साफ करो. दिल में झांको.. उसके भीतर जमी धूल हटाओ। अंतरात्मा को शुद्ध करो.. स्फटिक की तरह। मन मीठा तो जग मीठा। खुद के अंदर से ही उगेगा सूरा। दूसरों के दुख से दुखी होओ, दूसरों के सुख में देखो अपना सुख। पुरुषार्थ करो। आत्मज्ञान की ज्योति जगाओ। देखना फिर कैसे महक उठेगी जीवन की बगिया! दुख का नामोनिशान नहीं रहेगा।

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