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कॉपियों के मूल्यांकन में गुरुजन पर सख्ती

विद्यालयी शिक्षा बोर्ड की परीक्षाओं की कॉपियां जांचने में गुरुजन को इस बार खास चौकसी बरतनी होगी। उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में जरा भी लापरवाही बरतना शिक्षकों के लिए भारी पड़ सकता है। उत्तर पुस्तिका में अंकेक्षण के कार्य में यदि कोई गलती मिलती है तो संबंधित शिक्षक का पारिश्रमिक कटेगा। बड़ी त्रुटि होने या इसकी प्रकृति गंभीर होने पर संबंधित शिक्षक को तीन साल के लिए परीक्षक बनने से वंचित किया जा सकता है। यानी ऐसे शिक्षक तीन साल के लिए एग्ज़ामिनरशिप से डिबार किये जा सकते हैं।

विद्यालयी शिक्षा बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के बाद अंकेक्षण कार्य होगा। अंकेक्षण कार्य में 50 प्रतिशत उत्तर पुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन किया जाएगा। इसके लिए बाकायदा अंकेक्षकों की नियुक्ति विद्यालयी शिक्षा परिषद कार्यालय से की जाती है। संख्या कम होने पर जिला शिक्षा अधिकारी की सलाह पर उप नियंत्रक द्वारा भी अंकेक्षकों की नियुक्ति की जा सकती है। अंकेक्षक यह देखते हैं कि उत्तर पुस्तिकाओं का अवमूल्यांकन तो नहीं किया गया है।

नम्बर खंडवार चढ़ाए गए हैं या नहीं, पांच नम्बर के प्रश्न के जवाब में 10 नम्बर तो नहीं दे दिए गए हैं। उप नियंत्रक दीपा पांडे ने बताया कि 0 से लेकर 70 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वालों का अंकेक्षण किया जाएगा। अंकेक्षक को कम से कम छह साल का अनुभव होना चाहिए। इसमें विद्यालय में कार्यरत प्रधानाचार्य, प्रवक्ता, सहायक अध्यापक के अलावा अवकाश प्राप्त प्रधानाचार्य को भी लिया जाता है। उन्होंने बताया कि अंकेक्षण में दो-दो का बैच बनेगा। प्रत्येक बैच को चार रुपया पारिश्रमिक प्रति उत्तरपुस्तिका दिया जाएगा। एक बैच 160 उत्तर पुस्तिका जांचेगा।

उन्होंने बताया कि मूल्यांकन में एक प्रतिशत त्रुटि होने पर 50 प्रतिशत मूल्यांकन पारिश्रमिक कटेगा। दो प्रतिशत गलती होने पर संबंधित शिक्षक को तीन साल तक परीक्षक होने से वंचित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अंकेक्षण कार्य में यदि लापरवाही बरती गई तो संबंधित कार्मिकों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।

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