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आसानी से नहीं होगा निरंतर विद्युत प्रवाह

अब कोई भी उद्योग निरंतर विद्युत प्रवाह की सुविधा आसानी से नहीं ले पाएंगे। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने ऐसे उद्योगों के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। अब उद्योगों की प्रकृति को देखने के बाद ही निरंतर प्रवाह की सुविधा मिलेगी। पहले तक कोई भी उद्योग अतिरिक्त शुल्क देने के बाद यह सुविधा ले सकता था। वर्तमान में डेढ़ सौ से अधिक उद्योग इस सुविधा का लाभ ले रहे हैं। जिनकी संख्या अब आधी से भी कम होने की उम्मीद है।

निरंतर प्रवाह की सुविधा के तहत उद्योगों को हर हालत में बिजली मुहैया कराई जाती है, चाहे प्रदेश में बिजली की कितनी ही किल्लत हो रही हो। इसके लिए निरंतर प्रवाह के उद्योग 15 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ अदा करते हैं। प्रदेश की औद्योगिक इकाइयां 70 प्रतिशत बिजली उपभोग कर रही हैं। इसमें से भी 30 प्रतिशत बिजली निरंतर प्रवाह (कंटीन्यूस प्रोसेस) के उद्योगों के खाते में जाती है। इस तीस प्रतिशत बिजली पर बिजली कटौती का कोई असर नहीं होता। इन्हें चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध करानी पड़ती है।

प्रदेश के बिजली संकट को देखते हुए आयोग ने ऐसे उद्योगों की संख्या कम करने का निर्णय लिया है। अब सिर्फ ऐसे ही उद्योगों को निरंतर प्रवाह की सुविधा मिलेगी, जिनकी यूनिट साल भर 24 घंटे चलती हो। इसके अलावा उद्योग स्वतंत्र फीडर पर ही होना चाहिए। एक स्वतंत्र फीडर पर दो-तीन उद्योग होने पर सभी ने निरंतर प्रवाह की सुविधा लेनी होगी, नहीं तो किसी को नहीं मिलेगी। सीधा असर घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

निरंतर प्रवाह के लिए दी जा रही बिजली घरेलू उपभोक्ताओं को दी जा सकेगी। इससे कटौती में भी कुछ राहत मिल सकती है लेकिन इसमें एक महीने का समय लगेगा। जानकारों के मुताबिक नई गाइडलाइंस जारी होने के बाद कम से कम 50 प्रतिशत उद्योगों को इस सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा।

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