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कैलास क्षेत्र के संरक्षण की पहल

कैलास क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण को भारत, चीन एवं नेपाल के मध्य आपसी सहयोग से ढांचा विकसित करने पर विचार किया गया। इसके अलावा इस क्षेत्र की जैव विविधता, पर्यावरण एवं सांस्कृतिक संरक्षण के लिये सूचनाओं के आदान प्रदान,  नीतियां एवं कानूनी तंत्र विकसित करने का फैसला लिया गया।

कसार देवी स्थित कसार जंगल रिसोर्ट में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला के मुख्य अतिथि पर्यावरण एवं वन मंत्रलय के संयुक्त सचिव डा हेम पाण्डे थे। उन्होंने बताया कि अतिसंवेदनशील कैलाश क्षेत्र के संरक्षण के लिये यह अनूठी पहल ईसीमोड, काठमांडू एवं यूनेक के संयुक्त प्रयासों से चलाई जा रही है। इसके तहत चीन-तिब्बत स्वायत्तशासी भू-भाग के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र, नेपाल के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र एवं उत्तरी भारत का क्षेत्र शामिल हैं।  साथ ही गंगा सहित अनेक नदी तंत्रों के स्नोत भी हैं, इसलिये इस क्षेत्र से सम्बन्धित मसलों पर तीनों देशों के बीच आपसी सहयोग एवं सामंजस्य विकसित करना जरूरी है।

ईसी मोड नेपाल के पर्यावरण बदलाव एवं पारिस्थितिक सेवा विभाग के कार्यक्रम प्रबन्धक डा एकलव्य शर्मा ने कैलास सैक्रे ट लैण्डस्केप कंजरवेशन परियोजना के अनछुए मुद्दों पर प्रकाश डाला। यूनेक नैरोबी मुख्यालय के सह निदेशक टिम कास्टर्न एवं यूनेक क्षेत्रीय कार्यालय बैंकॉक के डा सुब्रतो सिन्हा ने कहा कि यह परियोजना तीनों देशों के मध्य मजबूत सांस्कृतिक आध्यात्मिक एवं सामाजिक सम्बन्धों को जोड़ने एवं विकसित         करने में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग कार्यालय चीन विज्ञान अकादमी के डा डांग ज्यू, डा0 शीपेली एवं डा योंग पिंग ने चीन का प्रतिनिधित्व किया।

वन एवं मृदा मंत्रलय नेपाल के संयुक्त सचिव डा एसपी जोशी, डा एनपी आचार्या, महानिदेशक वन विभाग नेपाल डा केपी शर्मा, उपमहानिदेशक जल एवं मौसम विभाग नेपाल प्रो आरपी चौधरी तथा त्रिभुवन विश्व विद्यालय नेपाल के डा केके श्रेष्ठा ने नेपाल का प्रतिनिधित्व किया। परियोजना के क्षेत्रीय संयोजक डा कृष्ण प्रसाद ओली ने अब तक के किये कार्यों पर प्रकाश डाला।

इस मौके पर भारत से उत्तराखण्ड के मुख्य वन संरक्षक डा आरबीएस रावत, भारतीय वन्य जीव संस्थान के डा गोपाल राव एवं डा जीएस भारद्वाज, यूएनडीपी से डा रूचि पन्त, प्रो शेखर पाठक, डा जेएस रावत, डा आरएस रावत मौजूद थे।

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