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दमश्क गुलाब की खुशबू से महकेगी चारधाम यात्रा

चुनींदा देशों में होने वाली दमश्क गुलाब की खेती अब उत्तराखंड में भी परवान चढ़ रही है। दो वर्ष पहले किए गए प्रयोग का सार्थक नतीजा निकला है। चमोली समेत कई जिलों में लगभग सौ किसान दमश्क गुलाब (बल्गेरियन) की खेती कर रहे है। दमश्क गुलाब से निकाले गए गुलाब जल की इस बार चार धाम यात्रा के दौरान मार्केटिंग होनी है। सैलाकुई स्थित सगंध पादप केंद्र (कैप) इसके लिए किसानों की मदद कर रहा है।

दमश्क गुलाब की खेती अमूमन बल्गेरिया, फ्रांस, मोरक्को व टर्की में ज्यादा होती है। विश्व भर में प्रतिवर्ष 20 टन गुलाब तेल का उत्पादन होता है। भारत में दमश्क की खेती प्रमुख रूप से यूपी, राजस्थान, हिमाचल में की जाती है। यूपी में लखनऊ, गाजीपुर, कन्नौज, एटा के अलावा अलीगढ़ में लगभग 1500 हेक्टेयर में इस प्रजाति की खेती होती है। लेकिन उत्तराखंड के लिए दमश्क गुलाब नई प्रजाति है।

अभी पहली फसल से गुलाब जल तैयार किया गया है। किसानों को गुलाब जल निकालने के यूनिट व ट्रेनिंग निशुल्क दी गई है। इसके अलावा पैकिंग, बोटलिंग आदि का कार्य कैप कर रहा है। इस बार दमश्क गुलाब जल को चारधाम यात्रा में मार्केटिंग की रणनीति बनाई गई है। पर्यटन व यात्रा के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थानों पर स्थित दुकानों पर बिक्री के लिए रखा जाएगा।

यूपी व राजस्थान में दमश्क गुलाब की फसल केवल मार्च माह में होती है। मुफीद जलवायु के आधार पर उत्तराखंड में यह फसल वर्ष में तीन बार हो रही है। फिलहाल अलग अलग जनपदों में लगभग सौ हेक्टेयर में किसान इस प्रजाति की खेती कर रहे है।

देहरादून, हरिद्वार जैसे जनपदों में इस प्रजाति के फूलों का मौसम केवल मार्च माह में होता है। 1200-1500 मीटर की ऊंचाई वाले स्थानों पर अप्रैल व 2000 मीटर से ज्यादा ऊंचाई के क्षेत्रों में यह प्रजाति मई माह में होती है। राज्य औषधीय पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष डा.आदित्य कुमार ने बताया कि जोशीमठ के किसान अपने खेतों की मेंढ पर अतिरिक्त फसल के रूप में इसकी खेती कर रहे है। सरकार किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए निशुल्क पौधे दे रही है।

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  • Web Title:दमश्क गुलाब की खुशबू से महकेगी चारधाम यात्रा